पापा के हाथ में बेटे की बाइक का कंट्रोल
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कॉलेज की शुरुआत के साथ ही नवयुवाओं में बाइक पर मस्ती का दौर भी शुरू हो जाता है। लेकिन एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में बाइक कब स्पीड की लिमिट क्रॉस कर जाती है, वे नहीं जान पाते।
नतीजा अकसर दर्दनाक हादसों के तौर पर सामने आता है। और फिर सिवाय अफसोस के कुछ बाकी नहीं रह जाता।
यही वजह है कि हर सुबह जब भी बेटा घर से बाइक लेकर निकलता है तो हर माता-पिता पीछे से यह हिदायत जरूर देते हैं, ‘बेटा भगाना मत।’ इसके बाद बेटे के घर लौटने तक चिंता उन्हें खाए रहती है।
ये है ‘एक्सीडेंट रिस्क रिडक्शन’
देहरादून के दो युवाओं ने माता-पिता की इस टेंशन का हल निकाल लिया है। इन्होंने एक ऐसी डिवाइस बनाई है जो मां-पिता की चिंता दूर करने के साथ बेटे की बाइक का कंट्रोल भी पापा के हाथों में दे देगी।
डिवाइस बनाने वाले विकासनगर निवासी हिमांशु चावला और दून निवासी विजय सिंह ने बताया कि इस डिवाइस को ‘एक्सीडेंट रिस्क रिडक्शन’ नाम दिया है।
इसे बनाने में उन्हें चार माह का वक्त लगा। हिमांशु माया इंस्टीट्यूट में बीटेक के छात्र हैं। विजय इंजीनियरिंग छात्र रहे हैं। इस डिवाइस का डेमोंस्ट्रेशन आठ अप्रैल को ओएनजीसी ऑफिसर्स क्लब में होने जा रहा है, जिसमें परिवहन विभाग और पुलिस के कई अधिकारी शामिल होंगे।
तीन बार मैसेज, एक बार कॉल
बाइक के 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पार करते ही डिवाइस इसमें दर्ज पापा के नंबर पर मैसेज भेजेगी। तीन बार मैसेज भेजा जाएगा।
इनका जवाब नहीं मिला तो डिवाइस आटोमेटिकली उसी नंबर पर कॉल करेगी। बताया जाएगा कि ‘बेटा तय सीमा से अधिक गति पर बाइक दौड़ा रहा है। उसे संभालिए।’
कॉल का भी जवाब नहीं मिला तो डिवाइस खुद ही स्पीड को 45 किलोमीटर प्रति घंटा पर लॉक कर देगी। इसके बाद चालक चाहकर भी इससे अधिक गति नहीं पकड़ सकेगा।
पापा तय करेंगे स्पीड
बाइक की गति तय सीमा से अधिक जाने पर मिले मैसेज का जवाब पापा को देना होगा। इस जवाब में वह डिवाइस को वह स्पीड भेज सकेंगे, जिस पर वह बाइक चलवाना चाहते हैं।
मैसेज मिलते ही डिवाइस उसी स्पीड पर बाइक को लॉक कर देगी। मैसेज का जवाब न मिलने पर कॉल की जाएगी।
कॉल के बाद भी पापा मनचाही स्पीड मैसेज कर सकेंगे। अगर किसी वजह से कॉल रिसीव न हुई तो डिवाइस खुद ही स्पीड लॉक कर देगी।
ऐसे काम करती है डिवाइस
बाइक में एक सेंसर वाली केबल लगाई जाती है, जो बाइक के आरपीएम के आधार पर इसकी स्पीड तय करती है।
यह केबल एक्सीडेंट रिस्क रिडक्शन डिवाइस से जुड़ी रहती है। डिवाइस गाड़ी के कार्बोरेटर से जुड़ी होती है, जो खुद ही स्पीड कम कर देती है।