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Dehradun News: देव दर्शन के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब
Wed, 27 Aug 2025 02:05 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Wed, 27 Aug 2025 02:05 AM IST
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लखवाड मंदिर प्रांगण में देवता की पालकी को कंधा लगाकर धर्म लाभ प्राप्त करते हुए श्रद्धालु
चार महासू देवता के सबसे बड़े धार्मिक स्थल हनोल मंदिर में राजकीय जागड़ा मेला धूमधाम के साथ मनाया गया। महासू देवता के जयकारों से पूरा हनोल क्षेत्र रात भर गूंजता रहा। देवता के हारूल पर रात भर पारंपरिक नृत्यों का दौर चलता रहा। करीब 25 हजार से अधिक महासू भक्तों ने हनोल मंदिर में रात लगाते हुए न्याय के देवता की आराधना की।
मंगलवार को हरितालिका तीज पर हनोल मंदिर में परंपरागत जागड़ा मेला बड़े धूमधाम से आयोजित किया गया। हजारों की संख्या में मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं ने महासू देवता के आगे माथा टेका। उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, उत्तरप्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने रात भर मंदिर परिसर में जाग कर देवता की स्तुति की। ढोल-दमोऊ की थाप पर श्रद्धालुओं ने नृत्य कर रात्रि जागरण किया। कई श्रद्धालु मंदिर में देवता के नाम सुमिरन करते नजर आए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में भंडारे की व्यवस्था की गई थी। बुधवार को देव चिह्नों को मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाया जाएगा। भक्तों को देवता की कढ़ाई और पवित्र जल का प्रसाद वितरित की जाएगी।
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पुलिस महानिदेशक हिमाचल प्रदेश पहुंचे
पुलिस महानिदेशक हिमाचल प्रदेश विवेक गुप्ता, गीता राम गौड़, प्रभारी एसडीएम योगेश प्रसाद मेहरा, एसडीएम विकासनगर विनोद कुमार सीओ बीएल शाह साह, तहसीलदार सुशील कोठियाल, तहसीलदार सरदार सिंह राणा, मंदिर समिति के सचिव मोहन लाल सेमवाल, सीआर राजगुरु, हरीश राजगुरु, पुजारी हरिचंद नौटियाल, जगमोहन जोशी, प्रताप सिंह रावत, राजा थरोच, विजेंद्र सिंह राणा आदि उपस्थित रहे।
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देव दर्शन कर प्राप्त किया आशीर्वाद
कालसी क्षेत्र के प्रसिद्ध महासू देवता मंदिर लक्सयार, लखवाड़ तथा बिसोई में मंगलवार को जागड़ा पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओंं ने देव पालकियों के दर्शन कर इष्ट देव का आशीर्वाद प्राप्त किया। दिनभर मंदिरों में दर्शन का दौर चलता रहा।
मंगलवार को विशेष पूजा अनुष्ठान के बाद लक्सयार, लखवाड़ तथा बिसोई मंदिर में गर्भगृह से पालकियों को बाहर लाया गया। पालकियों के बाहर आते ही द्धालुओं में खुशी की लहर दौड़ गई। श्रद्धालुओं ने उल्लास पूर्वक पालकियों को कंधा लगाकर धर्मलाभ प्राप्त किया। महिलाओं ने परंपरागत ढंग से देव पूजन किया।
देव चिह्नों को पवित्र जल में स्नान कराने के बाद पालकियां मंदिर प्रांगण में लाई गईं। दर्शन के बाद पालकियों को मंदिर में प्रवेश करवाया गया। बिसोई मंदिर में विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, ओमप्रकाश असवाल और रितेश असवाल की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंदिर समिति लक्सयार के अध्यक्ष पंडित मुन्नालाल नौटियाल, प्रधान गजेंद्र सिंह तोमर, सुनील तोमर, रणवीर सिंह तोमर, दिनेश तोमर, आनंद तोमर, राजेश्वर तोमर, लखवाड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष गंभीर सिंह चौहान आदि उपस्थित रहे।
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जमकर हुई ओवरलोडिंग
जागड़ा पर्व को लेकर प्रशासन की ओर से अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की गई थी, लेकिन व्यवस्था फेल हो गई। यूटिलिटी और जीप की छत पर बैठकर श्रद्धालु मंदिरों तक पहुंचे। इस दौरान परिवहन विभाग और पुलिस मूकदर्शन बने रहे।
हरतालिका के अवसर पर हनोल, थैना, लखवाड, बिसोई, दसोऊ और अन्य महासू मंदिरों में जागड़े का आयोजन होता है। उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश, दिल्ली आदि राज्यों से श्रद्धालु देव दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की संख्या की अनुमानित संख्या की जानकारी होने के बाद भी प्रशासन की ओर से पर्याप्त वाहनों की व्यवस्था नहीं की जाती है। इस बार छह अतिरिक्त बसों की व्यवस्था भी नाकाफी साबित हुई। सुबह ही व्यवस्था धड़ाम हो गई। विकासगनर, कालसी और साहिया से श्रद्धालु पिकअप और जीप की छतों पर बैठकर मंदिर में दर्शन के लिए निकले।
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मंगलवार को हरितालिका तीज पर हनोल मंदिर में परंपरागत जागड़ा मेला बड़े धूमधाम से आयोजित किया गया। हजारों की संख्या में मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं ने महासू देवता के आगे माथा टेका। उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, उत्तरप्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने रात भर मंदिर परिसर में जाग कर देवता की स्तुति की। ढोल-दमोऊ की थाप पर श्रद्धालुओं ने नृत्य कर रात्रि जागरण किया। कई श्रद्धालु मंदिर में देवता के नाम सुमिरन करते नजर आए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में भंडारे की व्यवस्था की गई थी। बुधवार को देव चिह्नों को मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाया जाएगा। भक्तों को देवता की कढ़ाई और पवित्र जल का प्रसाद वितरित की जाएगी।
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पुलिस महानिदेशक हिमाचल प्रदेश पहुंचे
पुलिस महानिदेशक हिमाचल प्रदेश विवेक गुप्ता, गीता राम गौड़, प्रभारी एसडीएम योगेश प्रसाद मेहरा, एसडीएम विकासनगर विनोद कुमार सीओ बीएल शाह साह, तहसीलदार सुशील कोठियाल, तहसीलदार सरदार सिंह राणा, मंदिर समिति के सचिव मोहन लाल सेमवाल, सीआर राजगुरु, हरीश राजगुरु, पुजारी हरिचंद नौटियाल, जगमोहन जोशी, प्रताप सिंह रावत, राजा थरोच, विजेंद्र सिंह राणा आदि उपस्थित रहे।
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देव दर्शन कर प्राप्त किया आशीर्वाद
कालसी क्षेत्र के प्रसिद्ध महासू देवता मंदिर लक्सयार, लखवाड़ तथा बिसोई में मंगलवार को जागड़ा पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओंं ने देव पालकियों के दर्शन कर इष्ट देव का आशीर्वाद प्राप्त किया। दिनभर मंदिरों में दर्शन का दौर चलता रहा।
मंगलवार को विशेष पूजा अनुष्ठान के बाद लक्सयार, लखवाड़ तथा बिसोई मंदिर में गर्भगृह से पालकियों को बाहर लाया गया। पालकियों के बाहर आते ही द्धालुओं में खुशी की लहर दौड़ गई। श्रद्धालुओं ने उल्लास पूर्वक पालकियों को कंधा लगाकर धर्मलाभ प्राप्त किया। महिलाओं ने परंपरागत ढंग से देव पूजन किया।
देव चिह्नों को पवित्र जल में स्नान कराने के बाद पालकियां मंदिर प्रांगण में लाई गईं। दर्शन के बाद पालकियों को मंदिर में प्रवेश करवाया गया। बिसोई मंदिर में विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, ओमप्रकाश असवाल और रितेश असवाल की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंदिर समिति लक्सयार के अध्यक्ष पंडित मुन्नालाल नौटियाल, प्रधान गजेंद्र सिंह तोमर, सुनील तोमर, रणवीर सिंह तोमर, दिनेश तोमर, आनंद तोमर, राजेश्वर तोमर, लखवाड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष गंभीर सिंह चौहान आदि उपस्थित रहे।
जमकर हुई ओवरलोडिंग
जागड़ा पर्व को लेकर प्रशासन की ओर से अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की गई थी, लेकिन व्यवस्था फेल हो गई। यूटिलिटी और जीप की छत पर बैठकर श्रद्धालु मंदिरों तक पहुंचे। इस दौरान परिवहन विभाग और पुलिस मूकदर्शन बने रहे।
हरतालिका के अवसर पर हनोल, थैना, लखवाड, बिसोई, दसोऊ और अन्य महासू मंदिरों में जागड़े का आयोजन होता है। उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश, दिल्ली आदि राज्यों से श्रद्धालु देव दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की संख्या की अनुमानित संख्या की जानकारी होने के बाद भी प्रशासन की ओर से पर्याप्त वाहनों की व्यवस्था नहीं की जाती है। इस बार छह अतिरिक्त बसों की व्यवस्था भी नाकाफी साबित हुई। सुबह ही व्यवस्था धड़ाम हो गई। विकासगनर, कालसी और साहिया से श्रद्धालु पिकअप और जीप की छतों पर बैठकर मंदिर में दर्शन के लिए निकले।