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बिना शुल्क कैसे होगी पीजी काउंसिलिंग
Updated Sun, 11 Mar 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में एमडी और एमएस की काउंसिलिंग में शुल्क की अड़चन पैदा हो गई है। एक साल बाद भी सरकार पीजी की फीस तय नहीं कर पाई है। ऐसे में 25 मार्च से होने वाली पीजी काउंसिलिंग पर संकट पैदा हो गया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अब शासन को पत्र भेजकर काउंसिलिंग से पहले ही शुल्क निर्धारित करने की मांग की है। एमसीआई का भी यह नियम है कि काउंसिलिंग से पहले सीट और शुल्क तय होनी जरूरी हैं।
प्रदेश में एमडी और एमएस की करीब 100 प्राइवेट कालेजों और 70 सरकारी कॉलेजों की एमडी, एमएस सीटों पर दाखिले के लिए 25 मार्च से काउंसिलिंग शुरू होनी है। गत वर्ष पीजी काउंसिलिंग में शुल्क तय नहीं था। इसलिए सभी दाखिला लेने वाले छात्रों से शपथ पत्र लेकर काउंसिलिंग करा दी गई थी। अब तक यह छात्र शपथ पत्र के आधार पर ही पढ़ाई कर रहे हैं। शपथ पत्र में छात्रों से लिखवाया गया कि अगर सरकार शुल्क निर्धारित करेगी तो नया शुल्क देना होगा। एक साल का समय बीत गया लेकिन सरकार पीजी का शुल्क तय नहीं कर पाई। अब 25 मार्च से पीजी की काउंसिलिंग होनी है। ऐसे में बिना शुल्क काउंसिलिंग कराना मुश्किल नजर आ रहा है। मेडिकल कॉलेज भी सरकार से लगातार शुल्क निर्धारित की मांग करते आ रहे हैं लेकिन शुल्क तय होने से पहले ही शुल्क निर्धारण समिति के अध्यक्ष इस्तीफा दे चुके हैं।
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एमबीबीएस और पीजी कोर्सेज में फ ीस निर्धारण को लेकर हमने प्रस्ताव बनाकर फ ीस कमेटी के पास भेजा हुआ है। इस विषय पर बैठक भी हुई है। 25 मार्च से पीजी की काउंसलिंग शुरू हो रही है। हम सरकार से यही निवेदन करेंगे कि पीजी काउंसलिंग शुरू होने से पहले फ ीस का निर्धारण कर लिया जाए।
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- डॉ. अनिल कुमार मेहता, प्रिंसिपल, एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज
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सरकार ने अभी तक फीस तय नहीं की है। हमने फीस को लेकर शुल्क निर्धारण समिति को पत्र भेजा हुआ है। कोर्ट ने यह भी तय किया था कि विवि जो शुल्क तय करेगी, वही ली जाएगी। अब देखते हैं कि सरकार कब तक फैसला लेगी।
- डॉ. विजय धस्माना, कुलपति, एसआरएचयू
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हमने फीस को लेकर शासन को पत्र भेजा है। नियम के हिसाब से 25 मार्च को काउंसिलिंग से पहले सीट और शुल्क की स्थिति स्पष्ट होनी जरूरी है। हमने फीस को लेकर 12 मार्च को बैठक भी बुलाई है। उम्मीद है कुछ न कुछ हल निकल जाएगा।
- डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा
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उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में एमडी और एमएस की काउंसिलिंग में शुल्क की अड़चन पैदा हो गई है। एक साल बाद भी सरकार पीजी की फीस तय नहीं कर पाई है। ऐसे में 25 मार्च से होने वाली पीजी काउंसिलिंग पर संकट पैदा हो गया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अब शासन को पत्र भेजकर काउंसिलिंग से पहले ही शुल्क निर्धारित करने की मांग की है। एमसीआई का भी यह नियम है कि काउंसिलिंग से पहले सीट और शुल्क तय होनी जरूरी हैं।
प्रदेश में एमडी और एमएस की करीब 100 प्राइवेट कालेजों और 70 सरकारी कॉलेजों की एमडी, एमएस सीटों पर दाखिले के लिए 25 मार्च से काउंसिलिंग शुरू होनी है। गत वर्ष पीजी काउंसिलिंग में शुल्क तय नहीं था। इसलिए सभी दाखिला लेने वाले छात्रों से शपथ पत्र लेकर काउंसिलिंग करा दी गई थी। अब तक यह छात्र शपथ पत्र के आधार पर ही पढ़ाई कर रहे हैं। शपथ पत्र में छात्रों से लिखवाया गया कि अगर सरकार शुल्क निर्धारित करेगी तो नया शुल्क देना होगा। एक साल का समय बीत गया लेकिन सरकार पीजी का शुल्क तय नहीं कर पाई। अब 25 मार्च से पीजी की काउंसिलिंग होनी है। ऐसे में बिना शुल्क काउंसिलिंग कराना मुश्किल नजर आ रहा है। मेडिकल कॉलेज भी सरकार से लगातार शुल्क निर्धारित की मांग करते आ रहे हैं लेकिन शुल्क तय होने से पहले ही शुल्क निर्धारण समिति के अध्यक्ष इस्तीफा दे चुके हैं।
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एमबीबीएस और पीजी कोर्सेज में फ ीस निर्धारण को लेकर हमने प्रस्ताव बनाकर फ ीस कमेटी के पास भेजा हुआ है। इस विषय पर बैठक भी हुई है। 25 मार्च से पीजी की काउंसलिंग शुरू हो रही है। हम सरकार से यही निवेदन करेंगे कि पीजी काउंसलिंग शुरू होने से पहले फ ीस का निर्धारण कर लिया जाए।
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- डॉ. अनिल कुमार मेहता, प्रिंसिपल, एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज
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सरकार ने अभी तक फीस तय नहीं की है। हमने फीस को लेकर शुल्क निर्धारण समिति को पत्र भेजा हुआ है। कोर्ट ने यह भी तय किया था कि विवि जो शुल्क तय करेगी, वही ली जाएगी। अब देखते हैं कि सरकार कब तक फैसला लेगी।
- डॉ. विजय धस्माना, कुलपति, एसआरएचयू
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हमने फीस को लेकर शासन को पत्र भेजा है। नियम के हिसाब से 25 मार्च को काउंसिलिंग से पहले सीट और शुल्क की स्थिति स्पष्ट होनी जरूरी है। हमने फीस को लेकर 12 मार्च को बैठक भी बुलाई है। उम्मीद है कुछ न कुछ हल निकल जाएगा।
- डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा