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साहित्यकार हेमचंद्र को प्रतियोगिता में तीसरा स् थान
Updated Mon, 05 Mar 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
मंजिल ग्रुप साहित्यिक मंच (मगसम) की ओर से होली पर्व पर आयोजित खुली साहित्यिक प्रतियोगिता में विकासनगर निवासी प्रसिद्ध साहित्यकार हेमचंद्र सकलानी की रचनाओं को तीसरा स्थान मिला है।
व्हाट्सएप ग्रुप पर हजारों सदस्यों के सामने हुई प्रतियोगिता में दो सौ प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में एक कोड नंबर के माध्यम से रचनाएं मंगवाई गई। नाम से रचना भेजने पर एंट्री निरस्त कर दी गई। जांचकर्ताओं ने रचनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सर्वश्रेष्ठ 21 रचनाओं का चयन किया।
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर वंदना दूबे, द्वितीय स्थान पर गोपाल कौशल, तीसरे स्थान पर विकासनगर यमुना घाटी के प्रसिद्ध साहित्यकार हेमचंद्र सकलानी की रचनाओं ‘मैं उसकी हर नफरत का जवाब दूंगा इस होली में, मैं जब उस पर प्यार से गुलाल फेंकूंगा इस होली में’ और ‘ऐसा रंग लगाना भय्या खो जाये मेरी पहचान, ऐसा दिखूं मैं हिंदू न दिखूं मुसलमान, जो भी देखे बोले हो ऐसा इंसान’ को प्राप्त हुआ। हेमचंद्र सकलानी ने कहा कि उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी उनकी रचनाओं को तीसरा स्थान मिलेगा।
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मंजिल ग्रुप साहित्यिक मंच (मगसम) की ओर से होली पर्व पर आयोजित खुली साहित्यिक प्रतियोगिता में विकासनगर निवासी प्रसिद्ध साहित्यकार हेमचंद्र सकलानी की रचनाओं को तीसरा स्थान मिला है।
व्हाट्सएप ग्रुप पर हजारों सदस्यों के सामने हुई प्रतियोगिता में दो सौ प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में एक कोड नंबर के माध्यम से रचनाएं मंगवाई गई। नाम से रचना भेजने पर एंट्री निरस्त कर दी गई। जांचकर्ताओं ने रचनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सर्वश्रेष्ठ 21 रचनाओं का चयन किया।
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प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर वंदना दूबे, द्वितीय स्थान पर गोपाल कौशल, तीसरे स्थान पर विकासनगर यमुना घाटी के प्रसिद्ध साहित्यकार हेमचंद्र सकलानी की रचनाओं ‘मैं उसकी हर नफरत का जवाब दूंगा इस होली में, मैं जब उस पर प्यार से गुलाल फेंकूंगा इस होली में’ और ‘ऐसा रंग लगाना भय्या खो जाये मेरी पहचान, ऐसा दिखूं मैं हिंदू न दिखूं मुसलमान, जो भी देखे बोले हो ऐसा इंसान’ को प्राप्त हुआ। हेमचंद्र सकलानी ने कहा कि उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी उनकी रचनाओं को तीसरा स्थान मिलेगा।
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