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स्कूलों में हो रंगमंच की पढ़ाई
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स्कूलों में हो रंगमंच की पढ़ाई
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। स्कूलों में बच्चों को रंगमंच की पढ़ाई भी कराई जानी चाहिए। इससे उनके व्यक्तित्व का विकास होगा। साथ ही शुरुआत से रोजगारपरक विषय से जुड़ने का उन्हें लाभ होगा। राष्ट्रीय नाट्य संस्थान (एनएसडी) की ओर से आयोजित की जा रही कार्यशाला में विशेषज्ञों ने यह बात कही।
पूर्व निदेशक देवेंद्र राज कुंवर ने कहा कि उत्तराखंड से बड़ी संख्या में एनएसडी स्नातक निकले हैं। उनमें से कुछ लोग नई पीढ़ी को रंगमंच का ज्ञान देने के लिए आगे आए हैं। उन्होंने कहा श्रीश डोभाल जैसे वरिष्ठ और मंझे हुए रंगकर्मी के अनुभवों से युवाओं को काफी कुछ सीखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर स्कूली शिक्षा में रंगमंच को शामिल किया जाए तो यह सोने पर सुहागा जैसा होगा।
प्रोफेसर अंकुर ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं नियमित तौर पर आयोजित की जानी चाहिए। इसमें युवाओं को काफी कुछ सीखने और अपनी कमियों को सुधारने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि कई दिन के प्रशिक्षण के बाद जब मंच पर उतरकर कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं, तो उसका एक अलग आनंद होता है।
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शिविर संयोजक श्रीश डोभाल ने बताया कि अप्रैल मध्य तक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। कई अन्य मंझे हुए कलाकारों व विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि युवा कलाकार अधिक से अधिक सीख सकें।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। स्कूलों में बच्चों को रंगमंच की पढ़ाई भी कराई जानी चाहिए। इससे उनके व्यक्तित्व का विकास होगा। साथ ही शुरुआत से रोजगारपरक विषय से जुड़ने का उन्हें लाभ होगा। राष्ट्रीय नाट्य संस्थान (एनएसडी) की ओर से आयोजित की जा रही कार्यशाला में विशेषज्ञों ने यह बात कही।
पूर्व निदेशक देवेंद्र राज कुंवर ने कहा कि उत्तराखंड से बड़ी संख्या में एनएसडी स्नातक निकले हैं। उनमें से कुछ लोग नई पीढ़ी को रंगमंच का ज्ञान देने के लिए आगे आए हैं। उन्होंने कहा श्रीश डोभाल जैसे वरिष्ठ और मंझे हुए रंगकर्मी के अनुभवों से युवाओं को काफी कुछ सीखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर स्कूली शिक्षा में रंगमंच को शामिल किया जाए तो यह सोने पर सुहागा जैसा होगा।
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प्रोफेसर अंकुर ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं नियमित तौर पर आयोजित की जानी चाहिए। इसमें युवाओं को काफी कुछ सीखने और अपनी कमियों को सुधारने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि कई दिन के प्रशिक्षण के बाद जब मंच पर उतरकर कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं, तो उसका एक अलग आनंद होता है।
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शिविर संयोजक श्रीश डोभाल ने बताया कि अप्रैल मध्य तक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। कई अन्य मंझे हुए कलाकारों व विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि युवा कलाकार अधिक से अधिक सीख सकें।