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स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज-RISHIKESH
Updated Fri, 28 Sep 2018 01:11 AM IST
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भव्यता बढ़े पर दिव्यता बरकरार रहे : स्वामी चिदानंद
ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
देहरादून। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतनके परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने उत्तराखंड के नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य को सुरक्षित रखने का आह्वान किया। साथ ही उत्तराखंड की संस्कृति, संसाधन, प्राकृतिक धरोहर, आध्यात्मिक एवं धार्मिक स्थलों को संरक्षित और सुरक्षित करने की अपील भी की। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि भव्यता बढ़नी चाहिए, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि दिव्यता बरकरार रहे।
पर्यावरण और जल संरक्षण की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पास अपार जल और शुद्ध वायु का भंडार है, फिर भी देहरादून के आसपास के क्षेत्र व राज्य के विभिन्न गाड़-गदेरे सूखते जा रहे हैं। इस पर भी हमें ध्यान देने की जरूरत है। उत्तराखंड की संस्कृति और पर्यटन दोनोें विश्व को एक मार्गदर्शन दे सकते हैं। यह केवल पर्यटन ही नहीं, बल्कि भीतरी परिवर्तन भी होगा। उत्तराखंड का पर्यटन भीतरी परिवर्तन के लिए है। हम इस क्षेत्र को साधना और ध्यान के लिए उपयुक्त बनाएं, ताकि दूर-दूर से यहां पर साधक साधना करने आएं।
उत्तराखंड में बने मेडिटेशन ड्राइव
स्वामी चिदानंद ने कहा कि पूरे विश्व में मरिन ड्राइव बने, लेकिन उत्तराखंड में मेडिटेशन ड्राइव बनना चाहिए। यहां ध्यान पथ बने और आस्था पथ बने। होटल कल्चर हो, लेकिन गंगा के किनारों पर हट कल्चर भी हो। इससे गंगा के किनारे भी बचेंगे और हरित वातावरण बनेगा, जो पूरे विश्व के लोगों को आकर्षित करेगा। इससे आर्थिकी भी बढ़ेगी और आध्यात्मिक वातावरण भी तैयार होगा।
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
देहरादून। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतनके परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने उत्तराखंड के नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य को सुरक्षित रखने का आह्वान किया। साथ ही उत्तराखंड की संस्कृति, संसाधन, प्राकृतिक धरोहर, आध्यात्मिक एवं धार्मिक स्थलों को संरक्षित और सुरक्षित करने की अपील भी की। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि भव्यता बढ़नी चाहिए, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि दिव्यता बरकरार रहे।
पर्यावरण और जल संरक्षण की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पास अपार जल और शुद्ध वायु का भंडार है, फिर भी देहरादून के आसपास के क्षेत्र व राज्य के विभिन्न गाड़-गदेरे सूखते जा रहे हैं। इस पर भी हमें ध्यान देने की जरूरत है। उत्तराखंड की संस्कृति और पर्यटन दोनोें विश्व को एक मार्गदर्शन दे सकते हैं। यह केवल पर्यटन ही नहीं, बल्कि भीतरी परिवर्तन भी होगा। उत्तराखंड का पर्यटन भीतरी परिवर्तन के लिए है। हम इस क्षेत्र को साधना और ध्यान के लिए उपयुक्त बनाएं, ताकि दूर-दूर से यहां पर साधक साधना करने आएं।
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उत्तराखंड में बने मेडिटेशन ड्राइव
स्वामी चिदानंद ने कहा कि पूरे विश्व में मरिन ड्राइव बने, लेकिन उत्तराखंड में मेडिटेशन ड्राइव बनना चाहिए। यहां ध्यान पथ बने और आस्था पथ बने। होटल कल्चर हो, लेकिन गंगा के किनारों पर हट कल्चर भी हो। इससे गंगा के किनारे भी बचेंगे और हरित वातावरण बनेगा, जो पूरे विश्व के लोगों को आकर्षित करेगा। इससे आर्थिकी भी बढ़ेगी और आध्यात्मिक वातावरण भी तैयार होगा।
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