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राष्ट्र विकास के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण जरूरी : अग्रवाल

Mon, 21 May 2018 01:52 AM IST
Updated Mon, 21 May 2018 01:52 AM IST
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राष्ट्र विकास के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण जरूरी : अग्रवाल
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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देश को विश्व मंच पर सबसे आगे खड़ा करने और विश्व कल्याण में अधिक योगदान के लिए वैज्ञानिक दृष्टि का होना अनिवार्य है। वैज्ञानिक सोच न केवल व्यक्ति वरन राष्ट्र के जीवन को भी बदल देती है।
उक्त बातें विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहीं। विधानसभा अध्यक्ष रविवार को श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित विज्ञान भारती के उत्तराखंड चैप्टर के एक दिवसीय प्रथम प्रदेश अधिवेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज विज्ञान को लेकर बहुत जागरूक थे। पूर्वजों ने वृक्षों को धर्म से जोड़कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था। यही कारण है पीपल, नीम और आम जैसे हजारों वनस्पतियों को भी हमने देवता मानकर पूजा करते हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि देश के नवोत्थान में विज्ञान भारती की भूमिका सराहनीय है।
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कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आईसीटी के सदस्य सचिव प्रो. आलोक मित्तल ने कहा कि उत्तराखंड विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों वाला राज्य है। ऐसे में लोगों को वैज्ञानिक सोचों से अवगत होना बेहद जरूरी है। आपदाओं से निपटने और बचाव के विभिन्न तरीकों से अवगत कराना समय की मांग है। विज्ञान भारती के राष्ट्रीय महासचिव ए. जयकुमार ने कहा कि किसी भी देश के विकास में आज विज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारे देश के युवाओं में एक नई विज्ञान दृष्टि पैदा हो इसका प्रयास किया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से विज्ञान भारती सतत प्रयासरत है। उन्होंने उपस्थित लोगों से विज्ञान के प्रसार में सहभागिता का अनुरोध किया। कार्यक्रम को यूटीयू के कुलपति उदय सिंह रावत, एसजीआरआर के कुलपति प्रो. पीसी ध्यानी आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन दून विश्वविद्यालय के डीन प्रो. एचसी पुरोहित ने किया। विज्ञान भारती उत्तराखंड के संगठन मंत्री प्रजातंत्र गंगेले ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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कार्यक्रम के समापन सत्र के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने विज्ञान भारती के कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आज कोई भी देश विज्ञान के महत्व की उपेक्षा नहीं कर सकता है। विज्ञान से मानव जीवन में नई क्रांति आयी है और मानवता के कल्याण में नया आयाम जोड़ा है। पंत ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे ज्यादा युवा देश है। युवा वह शक्ति है जिनके भरोसे देश का भविष्य अपने उच्चतम स्तर को छू लेगा। उन्होंने युवाओं को विज्ञान से जुड़ने और समाज को जोड़ने का आह्वान किया।
समापन सत्र में कवि श्रीकांत श्री ने अपनी वीर रस की ओजपूर्ण प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावुक कर दिया। इसके अलावा संगठन की संस्था ‘शक्ति’ की कार्यकर्ताओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इसके पहले ओएनजीसी की कार्यकारी निदेशक प्रीता पंत और विज्ञान भारती के राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण रामदास ने कार्यक्रम को संबोधित किया। इसके बाद कार्यक्रम ने उपस्थित सभी सहभागियों को पतंजलि आयुर्वेद की ओर से गिफ्ट पैक दिए गए। इस अवसर पर विश्व संवाद केंद्र के निदेशक विजय कुमार, आरएसएस के महानगर प्रचार प्रमुख हिमांशु अग्रवाल, डॉ. दिनेश उपमन्यु, धीरेंद्र प्रताप सिंह, अमित अग्रवाल, अमित दास, जगदीश पाटनी, रवि तोमर, चंडीधर असवाल, पंतजलि के प्रतिनिधि हितेश त्यागी, स्मिता सेमवाल, अर्चना केरो, एकता त्रिपाठी, रजनी सिन्हा समेत बड़ी संख्या में गणमान्य उपस्थित रहे।

नई प्रांतीय कार्यकारिणी गठित
अधिवेशन के दौरान विज्ञान भारती की नई प्रांतीय कार्यकारिणी का चुनाव भी हुआ। इसमें डॉ. महेश भट्ट को अध्यक्ष और गिरीश सेमवाल को कार्यकारिणी का महासचिव चुना गया। चुनाव आजाद सिंह रावत की देखरेख में हुआ। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने दायित्व निर्वहन जिम्मेदारी के साथ करने का संकल्प लिया।
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