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Dehradun News: प्रभु राम का बुलावा होगा तो फिर जाऊंगा अयोध्या
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I- राम मंदिर आंदोलन में 80 वर्षीय राम कुमेर ने निभाई थी सक्रिय भूमिका
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I- घर से लड़-झगड़कर रैली में हुए शामिलI
पूर्बिया लाइन निवासी 80 वर्षीय राम कुमेर ने राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। वे आंदोलन के दौरान चार बार अयोध्या गए। उनका कहना है कि प्रभु राम का बुलावा होगा तो वे उम्र के आखिरी पड़ाव में भी अयोध्या में रामलला के दर्शन को जरूर जाएंगे।
आंदोलन की यादें ताजा कर कई बार उनकी आंखें नम हो गईं। राम कुमेर ने बताया कि वे सात बेटियों के पिता हैं। कहा कि चार बार उन्होंने अयोध्या में हुई रैलियों में प्रतिभाग किया। हर बार घर से लड़-झगड़ कर रैली में गए। उन्होंने बताया कि छह दिसंबर 1992 की रैली में भी उन्हें शामिल होना था, लेकिन राजा रोड पर पुलिस ने कार सेवकों को रोक लिया। उन्हें साथियों के साथ गिरफ्तार कर पंडितवाड़ी स्थित केंद्रीय विद्यालय में बनाई गई अस्थायी जेल में करीब सात दिन रखा गया। बताया कि उनके साथ करीब 300 कार सेवक अस्थायी जेल में थे। सभी लोग प्रभु राम की भक्ति की। जिस दिन राम मंदिर का फैसला आया उस दिन घर पर मिठाइयां बांटीं। जब अयोध्या से पूजित अक्षत लेकर गांव के बच्चे मेरे घर आए तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि उनकी तरह लाखों कार सेवकों के संघर्ष का परिणाम आज राम मंदिर के रूप में फलीभूत होता नजर आ रहा है। सबसे बड़ा सौभाग्य है कि मेरे जीवित रहते ही राम मंदिर बन रहा है।
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I- घर से लड़-झगड़कर रैली में हुए शामिलI
पूर्बिया लाइन निवासी 80 वर्षीय राम कुमेर ने राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। वे आंदोलन के दौरान चार बार अयोध्या गए। उनका कहना है कि प्रभु राम का बुलावा होगा तो वे उम्र के आखिरी पड़ाव में भी अयोध्या में रामलला के दर्शन को जरूर जाएंगे।
आंदोलन की यादें ताजा कर कई बार उनकी आंखें नम हो गईं। राम कुमेर ने बताया कि वे सात बेटियों के पिता हैं। कहा कि चार बार उन्होंने अयोध्या में हुई रैलियों में प्रतिभाग किया। हर बार घर से लड़-झगड़ कर रैली में गए। उन्होंने बताया कि छह दिसंबर 1992 की रैली में भी उन्हें शामिल होना था, लेकिन राजा रोड पर पुलिस ने कार सेवकों को रोक लिया। उन्हें साथियों के साथ गिरफ्तार कर पंडितवाड़ी स्थित केंद्रीय विद्यालय में बनाई गई अस्थायी जेल में करीब सात दिन रखा गया। बताया कि उनके साथ करीब 300 कार सेवक अस्थायी जेल में थे। सभी लोग प्रभु राम की भक्ति की। जिस दिन राम मंदिर का फैसला आया उस दिन घर पर मिठाइयां बांटीं। जब अयोध्या से पूजित अक्षत लेकर गांव के बच्चे मेरे घर आए तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि उनकी तरह लाखों कार सेवकों के संघर्ष का परिणाम आज राम मंदिर के रूप में फलीभूत होता नजर आ रहा है। सबसे बड़ा सौभाग्य है कि मेरे जीवित रहते ही राम मंदिर बन रहा है।
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