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जैव विविधताओं का संरक्षण महत्वपूर्ण चुनौती
Updated Wed, 28 Nov 2018 02:03 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड और जीआईजेड की ओर से ‘एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (एबीएस) पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमेें वन विकास निगम के अफसरों को जैव विविधता अधिनियम 2002 के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस मौके पर
उत्तराखंड वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक गंभीर सिंह ने कहा कि जैव विविधता का संरक्षण सरकार और वन विभाग के लिए गंभीर चुनौती है। जैव विविधता का संरक्षण नहीं किया गया तो मनुष्यों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव एसएस रसायली ने जैव विविधता अधिनियम-2002 की उत्पत्ति और प्रावधानों के बारे मेें जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य में 8000 जैव विविधता प्रबंधन समितियों का गठन प्रस्तावित है। जबकि, 1000 समितियां पहले से ही गठित हैं। प्रोजेक्ट के परिणाम के रूप में एक संक्षिप्त पुस्तिका चुयरा (डिप्लोक्नेमा ब्यूटरीसा) का विमोचन भी किया गया। कार्यशाला में टनकपुर, रामनगर, हल्द्वानी, देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश के प्रतिभागियों ने कार्यशाला में भाग लिया। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड और जीआईजेड उत्तराखंड में एबीएस पर एक सहयोगी परियोजना को कार्यान्वित कर रहे हैं। कार्यशाला में महेशचंद्र आर्य, श्रीकृष्ण कुमार, एचएस अधिकारी, मोहम्मद हनीफ , राजेश नौटियाल, बीएस राणा, अनिल जोशी, डॉ. प्रदीप मेहता, दिनेशचंद्र आदि उपस्थित रहे।
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उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड और जीआईजेड की ओर से ‘एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (एबीएस) पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमेें वन विकास निगम के अफसरों को जैव विविधता अधिनियम 2002 के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस मौके पर
उत्तराखंड वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक गंभीर सिंह ने कहा कि जैव विविधता का संरक्षण सरकार और वन विभाग के लिए गंभीर चुनौती है। जैव विविधता का संरक्षण नहीं किया गया तो मनुष्यों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव एसएस रसायली ने जैव विविधता अधिनियम-2002 की उत्पत्ति और प्रावधानों के बारे मेें जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य में 8000 जैव विविधता प्रबंधन समितियों का गठन प्रस्तावित है। जबकि, 1000 समितियां पहले से ही गठित हैं। प्रोजेक्ट के परिणाम के रूप में एक संक्षिप्त पुस्तिका चुयरा (डिप्लोक्नेमा ब्यूटरीसा) का विमोचन भी किया गया। कार्यशाला में टनकपुर, रामनगर, हल्द्वानी, देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश के प्रतिभागियों ने कार्यशाला में भाग लिया। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड और जीआईजेड उत्तराखंड में एबीएस पर एक सहयोगी परियोजना को कार्यान्वित कर रहे हैं। कार्यशाला में महेशचंद्र आर्य, श्रीकृष्ण कुमार, एचएस अधिकारी, मोहम्मद हनीफ , राजेश नौटियाल, बीएस राणा, अनिल जोशी, डॉ. प्रदीप मेहता, दिनेशचंद्र आदि उपस्थित रहे।
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