फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   युवाओं को भी गिरफ्त में ले रहा काला मोतिया

युवाओं को भी गिरफ्त में ले रहा काला मोतिया

Mon, 26 Mar 2018 02:28 AM IST
Updated Mon, 26 Mar 2018 02:28 AM IST
विज्ञापन
युवाओं को भी गिरफ्त में ले रहा काला मोतिया
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन

काला मोतिया अब बुजुर्गों को ही नहीं बल्कि युवाओं को भी अपना शिकार बना रहा है। ढाई माह के भीतर दून अस्पताल में काला मोतिया के 180 मामले सामने आए हैं, जिसमें दस से ज्यादा मामले युवाओं की बीमारी के हैं। डॉक्टर भी इस बात को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यह बीमारी उन युवाओं को अपना शिकार बना रही है, जो कि नजर का चश्मा लगाते हैं और समय-समय पर आंखों की जांच नहीं कराते।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील ओझा का कहना है कि काला मोतिया आमतौर पर 40 वर्ष से अधिक की आयु में होता है। यह लाइलाज बीमारी है, जिसमें धीरे-धीरे आंखों की रोशनी चली जाती है। उन्होंने बताया कि ढाई माह के भीतर 180 काला मोतिया के मामले प्रकाश में आए हैं, जिनमें युवाओं की दस्तक एक चिंता की बात है। उन्होंने अपनी जांच में पाया कि काला मोतिया का शिकार होने वाले अधिकतर युवा ऐसे हैं जो कि पहले से नजर के चश्मे का इस्तेमाल करते हैं लेकिन समय-समय पर अपनी नजर की जांच नहीं कराते हैं। काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा)शहर में धीमे-धीमे पकड़ बना रहा है। जो कि एक गंभीर समस्या है।
विज्ञापन

..........................
यह होता है काला मोतिया
आंखों की ऑप्टिक नर्व जो किसी वस्तु का चित्र दिमाग तक पहुंचाती है। जहां कालामोेतिया बिंद रोग के दौरान अत्यधिक दबाव आने के कारण नर्व के फाइबर के निकलने वाला पानी बंद हो जाता है। इससे नर्व बंद पड़ जाने के कारण आंखों की रोशनी धीरे-धीरे घटती चली जाती है। जो कि अंधेपन का प्रमुख कारण है। आंखों की जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

......................
दून में काला मोतिया
वर्ष मामलों की संख्या
2017 80
2017 100
2018 180
(वर्ष 2018 का यह आंकड़ा केवल ढाई माह का है।)
..............................
कालामोतिया के लक्षण
आंखों के सामने छोटे-छोटे बिंदु और रंगीन धब्बे दिखाई देना।
इंद्रधनुषी रंग दिखाई देना।
भारी पन व चक्कर आना।
आंखों में तेज दर्द होना।
लंबे समय से आंखों में सूजन आना।
परिवार में किसी को जन्म से आंखोें की परेशानी के कारण।
.........................
ये है बचाव
स्टेरॉइड का कम इस्तेमाल करे।
साल में एक बार आंखों की जांच जरूर कराएं।
यदि परिवार में जन्म से किसी को आंखों की परेशानी हो तो छह माह के भीतर जांच कराए।
गर्मियों की दिनों में धूल मिट्टी से बचें।
.........................
काला और सफेद मोतियाबिंद में अंतर
दोनों की बीमारियों अहम है लेकिन काला मोतिया इस वजह से खतरनाक है क्योंकि इस रोग में एक बार दृष्टि की जितनी हानि हो चुकी होती है, उसे किसी भी इलाज से वापस लाना मुश्किल होता है। वहीं सफेद मोतियाबिंद में ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी को वापस लाया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed