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स्कूलों में पुख्ता हो बच्चों की सुरक्षा - बाल आयोग
Updated Tue, 06 Mar 2018 01:48 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
प्रदेशभर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पुख्ता करने के लिए बाल आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूड़ी ने मुख्य सचिव उत्पल कुमार को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा है कि चूंकि परीक्षाओं के बाद करीब डेढ़ माह का ग्रीष्मकालीन अवकाश होगा। लिहाजा इस दौरान सभी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर दिए जाएं। इसके तहत स्कूलों की जर्जर इमारतों की मरम्मत से लेकर स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ ही दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप बनाया जाए।
बाल आयोग के अध्यक्ष ने अपने पत्र में निर्देश दिए हैं कि पूर्व में बच्चों की सुरक्षा को लेकर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय सभी राज्यों को नौ अक्तूबर 2014 को पत्र भेज चुका है। बावजूद इसके कई जिलों विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। उन्होंने शासन को निर्देशित किया है कि स्कूलों में बच्चों को जीर्ण-शीर्ण भवनों में न बैठाया जाए। विद्यालय में दो गेट हों, सीसीटीवी कैमरे लगे हों, अग्निशमन यंत्र हों, सीढ़ी वाले विद्यालयों में रेलिंग लगी हो, दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय में रैंप की व्यवस्था हो, स्कूलों में फर्स्ट ऐड बॉक्स हो, स्कूल के ऊपर से हाइटेंशन लाइन न हो, स्कूलों में बिजली की फिटिंग अंडर ग्राउंड हो और शौचालयों की सफाई पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाए।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि स्कूलों में पेयजल की टंकी की छत खुली न हो, मिड-डे-मील के तहत दिया जाने वाला खाद्यान्न एक्सपायरी डेट का न हो, स्कूल आने-जाने वाले रास्ते खतरनाक न हों, स्कूल अगर सड़क पर है तो वहां स्पीड ब्रेकर हो, प्रार्थना सभा में छात्रों को ज्यादा देर तक खड़ा न किया जाए, छात्र-छात्राओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण हो, उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर डांटा न जाए, उनकी समस्याओं को शांतिपूर्वक सुना जाए और प्रयोगशालाओं में भी बच्चों की हिफाजत के पुख्ता इंतजाम हों।
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प्रदेशभर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पुख्ता करने के लिए बाल आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूड़ी ने मुख्य सचिव उत्पल कुमार को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा है कि चूंकि परीक्षाओं के बाद करीब डेढ़ माह का ग्रीष्मकालीन अवकाश होगा। लिहाजा इस दौरान सभी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर दिए जाएं। इसके तहत स्कूलों की जर्जर इमारतों की मरम्मत से लेकर स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ ही दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप बनाया जाए।
बाल आयोग के अध्यक्ष ने अपने पत्र में निर्देश दिए हैं कि पूर्व में बच्चों की सुरक्षा को लेकर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय सभी राज्यों को नौ अक्तूबर 2014 को पत्र भेज चुका है। बावजूद इसके कई जिलों विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। उन्होंने शासन को निर्देशित किया है कि स्कूलों में बच्चों को जीर्ण-शीर्ण भवनों में न बैठाया जाए। विद्यालय में दो गेट हों, सीसीटीवी कैमरे लगे हों, अग्निशमन यंत्र हों, सीढ़ी वाले विद्यालयों में रेलिंग लगी हो, दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय में रैंप की व्यवस्था हो, स्कूलों में फर्स्ट ऐड बॉक्स हो, स्कूल के ऊपर से हाइटेंशन लाइन न हो, स्कूलों में बिजली की फिटिंग अंडर ग्राउंड हो और शौचालयों की सफाई पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाए।
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इसके अलावा उन्होंने कहा कि स्कूलों में पेयजल की टंकी की छत खुली न हो, मिड-डे-मील के तहत दिया जाने वाला खाद्यान्न एक्सपायरी डेट का न हो, स्कूल आने-जाने वाले रास्ते खतरनाक न हों, स्कूल अगर सड़क पर है तो वहां स्पीड ब्रेकर हो, प्रार्थना सभा में छात्रों को ज्यादा देर तक खड़ा न किया जाए, छात्र-छात्राओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण हो, उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर डांटा न जाए, उनकी समस्याओं को शांतिपूर्वक सुना जाए और प्रयोगशालाओं में भी बच्चों की हिफाजत के पुख्ता इंतजाम हों।
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