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अब शासन तय करेगा दमयंती रावत का भविष्य
Updated Fri, 19 Jan 2018 02:01 AM IST
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अब शासन तय करेगा दमयंती का भविष्य
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निनिर्माण कर्मचारी कल्याण बोर्ड की अपर कार्याधिकारी बनाई गईं दमयंती रावत का भविष्य अब शासन तय करेगा। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने दमयंती रावत को एनओसी न देने के साथ ही कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे। इसके लिए उन्होंने सचिव विद्यालयी शिक्षा भूपिंदर कौर औलख को तीन दिन का समय भी दिया था। सूत्रों के अनुसार अब दमयंती रावत पर बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है।
पहले बिना बताए करीब 14 माह गायब रहने और बाद में बिना एनओसी लिए दूसरे विभाग में प्रतिनिुयक्ति पर जाने के मामले में दमयंती रावत घिरती नजर आ रही हैं। हालांकि श्रम मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत खुद मामले को देख रहे हैं। इसके बावजूद इस मामले में दमयंती के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय इस मामले में खुद को पूर्व शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी की तरह कमजोर नहीं दिखाना चाहते, जिन्होंने दबाव में अपना फैसला वापस ले लिया था। मंत्री प्रसाद नैथानी के समय हरक सिंह रावत न केवल दमयंती को बचाने में कामयाब रहे बल्कि अपने साढू भाई डॉ. यशवंत बर्त्वाल को भी मनचाही तैनाती दी। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय खुले तौर पर दमयंती को बर्खास्त करने की बात कह चुके हैं। इस मामले में उन्हें लगातार ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा कर रहे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत का भी साथ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में बहुत संभव है कि दमयंती के खिलाफ बड़ा फैसला ले लिया जाए।
बीईओ पद पर तैनात दमयंती के खिलाफ कार्रवाई शासन स्तर से ही होनी है। निदेशालय स्तर पर प्रधानाचार्य पद तक कार्रवाई का अधिकार होता है। जबकि इससे उच्च स्तर के अधिकारी के खिलाफ महानिदेशक और शासन ही कार्रवाई कर सकता है।
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बर्त्वाल के मामले में भी हरक की चली
पूर्ववर्ती सरकार में डॉ. यशवंत बर्त्वाल को कृषि विभाग में प्रतिनियुक्ति दी गई थी। उन्होंने भी विभाग से विधिवत एनओसी नहीं ली। वहीं कृषि विभाग की ओर से प्रतिनियुक्ति का पत्र आने पर विद्यालय से उन्हें रिलीव कर दिया गया। तत्कालीन शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने उन्हें निलंबित कर दिया। साथ ही मामले की जांच के निर्देश दिए। जांच में एनओसी की प्रक्रिया पूरी न करने का खुलासा हुआ। हालांकि इस दौरान शासन के निर्देश पर उन्हें एनओसी जारी कर दी गई। बाद में उन्हें विभाग में बहाल भी कर दिया गया।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निनिर्माण कर्मचारी कल्याण बोर्ड की अपर कार्याधिकारी बनाई गईं दमयंती रावत का भविष्य अब शासन तय करेगा। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने दमयंती रावत को एनओसी न देने के साथ ही कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे। इसके लिए उन्होंने सचिव विद्यालयी शिक्षा भूपिंदर कौर औलख को तीन दिन का समय भी दिया था। सूत्रों के अनुसार अब दमयंती रावत पर बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है।
पहले बिना बताए करीब 14 माह गायब रहने और बाद में बिना एनओसी लिए दूसरे विभाग में प्रतिनिुयक्ति पर जाने के मामले में दमयंती रावत घिरती नजर आ रही हैं। हालांकि श्रम मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत खुद मामले को देख रहे हैं। इसके बावजूद इस मामले में दमयंती के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय इस मामले में खुद को पूर्व शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी की तरह कमजोर नहीं दिखाना चाहते, जिन्होंने दबाव में अपना फैसला वापस ले लिया था। मंत्री प्रसाद नैथानी के समय हरक सिंह रावत न केवल दमयंती को बचाने में कामयाब रहे बल्कि अपने साढू भाई डॉ. यशवंत बर्त्वाल को भी मनचाही तैनाती दी। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय खुले तौर पर दमयंती को बर्खास्त करने की बात कह चुके हैं। इस मामले में उन्हें लगातार ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा कर रहे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत का भी साथ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में बहुत संभव है कि दमयंती के खिलाफ बड़ा फैसला ले लिया जाए।
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बीईओ पद पर तैनात दमयंती के खिलाफ कार्रवाई शासन स्तर से ही होनी है। निदेशालय स्तर पर प्रधानाचार्य पद तक कार्रवाई का अधिकार होता है। जबकि इससे उच्च स्तर के अधिकारी के खिलाफ महानिदेशक और शासन ही कार्रवाई कर सकता है।
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बर्त्वाल के मामले में भी हरक की चली
पूर्ववर्ती सरकार में डॉ. यशवंत बर्त्वाल को कृषि विभाग में प्रतिनियुक्ति दी गई थी। उन्होंने भी विभाग से विधिवत एनओसी नहीं ली। वहीं कृषि विभाग की ओर से प्रतिनियुक्ति का पत्र आने पर विद्यालय से उन्हें रिलीव कर दिया गया। तत्कालीन शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने उन्हें निलंबित कर दिया। साथ ही मामले की जांच के निर्देश दिए। जांच में एनओसी की प्रक्रिया पूरी न करने का खुलासा हुआ। हालांकि इस दौरान शासन के निर्देश पर उन्हें एनओसी जारी कर दी गई। बाद में उन्हें विभाग में बहाल भी कर दिया गया।