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खनन का 70 फीसदी कार्य निजी हाथों में सौंपा

Wed, 23 Oct 2013 11:30 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 23 Oct 2013 11:30 PM IST
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70 per cent of mining tasks assigned to private hands

राज्य की नदियों में 70 फीसदी खनन और चुगान कार्य अब निजी हाथों में देने का फैसला हुआ है। उत्तराखंड वन विकास निगम केवल छह नदियों में ही खुद से खनन-चुगान कर सकेगा।

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उससे शारदा और दाबका नदी में ओपन टेंडर से लाट्स आवंटित करने को कहा गया है। इसके अलावा 22 नई नदियां भी खनन-चुगान के लिए चिह्नित की गई हैं।

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खनन-चुगान के संबंध में बनी राज्य कैबिनेट की उप समिति की बैठक में बुधवार को तय हुआ कि जिन नदियों में वन विकास निगम खनन-चुगान नहीं करता, उनमें खुला टेंडर कर लाट्स का आवंटन किया जाए।
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औपचारिकताएं पूरी कराने का प्रयास
उद्योग विभाग ने प्रदेश में ऐसी 22 नदियां चिह्नित की हैं, जिनमें वन विकास निगम ने आज तक खनन-चुगान नहीं किया है। इन निदयों में खनन-चुगान के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से स्वीकृति लेने समेत अन्य औपचारिकताएं पूरी कराने का प्रयास चल रहा है।

सब-कमेटी ने अदालती आदेशों के परिप्रेक्ष्य में वन विकास निगम को दाबका और शारदा में खनन-चुगान का काम पारदर्शी तरीके से ओपन टेंडर कराने का सुझाव दिया है।

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खनन-चुगान का सुझाव कमेटी ने दिया

बताया गया कि दाबका और शारदा में वन विकास निगम कुल क्षमता का पचास फीसदी मटेरियल भी नहीं निकाल पाता। इसे देखते हुए ओपन टेंडर के जरिए इन दोनों नदियों में निजी क्षेत्र से खनन-चुगान का सुझाव कमेटी ने दिया है।

बैठक के बाद सचिवालय में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने पत्रकारों को बताया कि वन विकास निगम को 30 अक्तूबर से खनन-चुगान का काम शुरू करने को कहा गया है। उन्होंने साफ किया कि वन विकास निगम के कार्यक्षेत्र में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है।

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बल्कि मनमाने तरीके से लाट्स आवंटित करने की बजाए राजस्व बढ़ाने के लिए ओपन टेंडर करने को कहा गया है। आठ में से छह नदियों में फिलहाल पूर्व की भांति ही निगम को खनन-चुगान शुरू करने का आदेश है।

पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित

उन्होंने कहा कि खनन-चुगान कार्य हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए पूरी पारदर्शिता और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए होगा।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसी नदी में खनन चोरी रोकने पर विशेष विजिलेंस टीम और शासन का ध्यान रहेगा। उन्होंने कहा कि स्पेशल माइनिंग विजिलेंस टीम का गठन भी अगले एक सप्ताह में हो जाएगा। इस टीम का मुखिया डीआईजी संजय गुंज्याल को बनाया गया है।

अब ये नदियां बचीं वन विकास निगम के पास
सौंग, जाखन, कोसी, गोला-हल्द्वानी, गोला-लालकुआं और नंदौर। इसमें से प्रमुख गोला नदी है, जिसकी रेत की मांग निर्माण कार्यों में सबसे ज्यादा है। कहा जाता है कि इसकी रेत की गुणवत्ता काफी बेहतर है।

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