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पीरूल से निर्मित बिजली को 7.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदेगा यूपीसीएल
Updated Sat, 08 Sep 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राज्य विद्युत नियामक आयोग ने घरों की छतों पर लगे सोलर प्लांट और पिरूल से बनने वाली बिजली की खरीद दरें निर्धारित कर दी हैं। यूपीसीएल सोलर प्लांटों से पैदा होने वाली बिजली को चार रुपये 18 पैसे प्रति यूनिट और पिरूल से बनने वाली बिजली को 7.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदेगा।
शुक्रवार को आयोग के सचिव नीरज सती ने बताया कि दो किलोवाट से लेकर 10 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाते समय केंद्र सरकार 70 फीसदी सब्सिडी देगी। दो किलोवाट क्षमता का प्लांट छत पर लगाने में 94306 रुपये खर्च आता है। इसमें 70 फीसदी केंद्र सब्सिडी देगी। सब्सिडी के बाद 28,292 रुपये बचती है। इसमें से उपभोक्ता से 8488 रुपये लिए जाएंगे। बाकी की रकम पर बैंक लोन देगा। सती ने बताया कि दो किलोवाट के संयंत्र से इतनी बिजली पैदा होती है कि उपभोक्ता सालभर बिजली इस्तेमाल करने के बाद 12364 रुपये की बिजली यूपीसीएल को बेच सकता है। जबकि चार किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाने के बाद उपभोक्ता 24728 रुपये की बिजली बेच सकता है। छह किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट से 41034 रुपये, आठ किलोवाट क्षमता के प्लांट से 54711 रुपये और 10 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने पर उपभोक्ता 68389 रुपये की सालाना बिजली बेच सकता है।
पिरूल से मजबूत होगी पहाड़ की अर्थव्यवस्था
राज्य विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन सुभाष कुमार ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 300 से 400 किलोग्राम पिरूल की पत्तियां इकट्ठा कर सकता है। इनकी पत्तियों से बिजली बनाने वाले संयंत्र लगाए जाने के बाद लोगों को सालाना 60,000 से 96000 हजार रुपये की सालाना आय हो सकती है। अब जबकि सरकार ने पिरूल को लेकर नीति बना दी है तो संयंत्रों के लगाने का भी रास्ता साफ हो गया है। सचिव नीरज सती ने बताया कि आरई विनियम 2018 के तहत बिजली खरीद की दरें तय की गई हैं।
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राज्य विद्युत नियामक आयोग ने घरों की छतों पर लगे सोलर प्लांट और पिरूल से बनने वाली बिजली की खरीद दरें निर्धारित कर दी हैं। यूपीसीएल सोलर प्लांटों से पैदा होने वाली बिजली को चार रुपये 18 पैसे प्रति यूनिट और पिरूल से बनने वाली बिजली को 7.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदेगा।
शुक्रवार को आयोग के सचिव नीरज सती ने बताया कि दो किलोवाट से लेकर 10 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाते समय केंद्र सरकार 70 फीसदी सब्सिडी देगी। दो किलोवाट क्षमता का प्लांट छत पर लगाने में 94306 रुपये खर्च आता है। इसमें 70 फीसदी केंद्र सब्सिडी देगी। सब्सिडी के बाद 28,292 रुपये बचती है। इसमें से उपभोक्ता से 8488 रुपये लिए जाएंगे। बाकी की रकम पर बैंक लोन देगा। सती ने बताया कि दो किलोवाट के संयंत्र से इतनी बिजली पैदा होती है कि उपभोक्ता सालभर बिजली इस्तेमाल करने के बाद 12364 रुपये की बिजली यूपीसीएल को बेच सकता है। जबकि चार किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाने के बाद उपभोक्ता 24728 रुपये की बिजली बेच सकता है। छह किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट से 41034 रुपये, आठ किलोवाट क्षमता के प्लांट से 54711 रुपये और 10 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने पर उपभोक्ता 68389 रुपये की सालाना बिजली बेच सकता है।
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पिरूल से मजबूत होगी पहाड़ की अर्थव्यवस्था
राज्य विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन सुभाष कुमार ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 300 से 400 किलोग्राम पिरूल की पत्तियां इकट्ठा कर सकता है। इनकी पत्तियों से बिजली बनाने वाले संयंत्र लगाए जाने के बाद लोगों को सालाना 60,000 से 96000 हजार रुपये की सालाना आय हो सकती है। अब जबकि सरकार ने पिरूल को लेकर नीति बना दी है तो संयंत्रों के लगाने का भी रास्ता साफ हो गया है। सचिव नीरज सती ने बताया कि आरई विनियम 2018 के तहत बिजली खरीद की दरें तय की गई हैं।
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