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कवियों ने शहीदों को किया नमन
Updated Wed, 15 Aug 2018 02:48 AM IST
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कवियों ने शहीदों को किया नमन
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मंगलवार को संस्कृति विभाग की ओर से नगर निगम सभागार में कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया। जिसमें कवियों और शायरों ने शहीदों के सम्मान में काव्य पाठ किया।
कवि सुदीप भोला ने वतन की देहरी के प्रहरी सो गए नींद बहुत गहरी, तिरंगा ओढ़ के वे सोए..., डॉ. अर्जुन सिसौदिया ने शेखर, सुुभाष अशफाक की धरा है ये, यहां क्रांति का प्रवाह कभी रुक नहीं पाएगा... सुनाकर देशभक्ति का संचार किया। शायर वसीम बरेलवी ने लहराती बलखाती चिड़िया हवा से कहती लगती है, उड़ने पर आओ तो दुनिया कितनी छोटी लगती है... सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।
प्रसिद्ध कवि और गायक संतोष आनंद ने एक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है, जिंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है..., जिंदगी की न टूटे लड़ी, प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी... सुनाकर खूब दाद बटोरी। राजेंद्र प्रसाद बहुगुणा ने एक खटमल ने कहा चिंघाड़ कर कुछ ना पाओगे तुम हमको मारकर, आपसे ज्यादा जुनून है हमें, क्योंकि हमारी रगों में हाथी का खून है... सुनाकर दाद बटोरी। इंद्र सिंह नेगी, कवि वीरेंद्र डंगवाल पार्थ, जनकवि डॉ. अतुल शर्मा, सुनीता प्रवीण, नीता कुुकरेती, अफजल मंगलोरी, डॉ. सरिता शर्मा ने भी काव्य पाठ किया। संचालन कवि हेमंत बिष्ट ने किया। इस दौरान केबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, विधायक गणेश जोशी, भाजपा नेता सुनील उनियाल गामा, वरिष्ठ शायर जिया नहटौरी, नदीम बर्नी, निदेशक बीना भट्ट आदि मौजूद रहे।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मंगलवार को संस्कृति विभाग की ओर से नगर निगम सभागार में कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया। जिसमें कवियों और शायरों ने शहीदों के सम्मान में काव्य पाठ किया।
कवि सुदीप भोला ने वतन की देहरी के प्रहरी सो गए नींद बहुत गहरी, तिरंगा ओढ़ के वे सोए..., डॉ. अर्जुन सिसौदिया ने शेखर, सुुभाष अशफाक की धरा है ये, यहां क्रांति का प्रवाह कभी रुक नहीं पाएगा... सुनाकर देशभक्ति का संचार किया। शायर वसीम बरेलवी ने लहराती बलखाती चिड़िया हवा से कहती लगती है, उड़ने पर आओ तो दुनिया कितनी छोटी लगती है... सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।
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प्रसिद्ध कवि और गायक संतोष आनंद ने एक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है, जिंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है..., जिंदगी की न टूटे लड़ी, प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी... सुनाकर खूब दाद बटोरी। राजेंद्र प्रसाद बहुगुणा ने एक खटमल ने कहा चिंघाड़ कर कुछ ना पाओगे तुम हमको मारकर, आपसे ज्यादा जुनून है हमें, क्योंकि हमारी रगों में हाथी का खून है... सुनाकर दाद बटोरी। इंद्र सिंह नेगी, कवि वीरेंद्र डंगवाल पार्थ, जनकवि डॉ. अतुल शर्मा, सुनीता प्रवीण, नीता कुुकरेती, अफजल मंगलोरी, डॉ. सरिता शर्मा ने भी काव्य पाठ किया। संचालन कवि हेमंत बिष्ट ने किया। इस दौरान केबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, विधायक गणेश जोशी, भाजपा नेता सुनील उनियाल गामा, वरिष्ठ शायर जिया नहटौरी, नदीम बर्नी, निदेशक बीना भट्ट आदि मौजूद रहे।
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