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कुंभ तक एक और ब्रह्मकुंड घाट बनेगा
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
सिंचाई विभाग की योजना परवान चढ़ी तो कुंभ 2021 तक गंगा की नीलधारा में हरकी पैड़ी जैसा एक और ब्रह्मकुंड जैसा घाट तैयार किया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो संभावना जताई जा रही है कि शहर को मेला और स्नान पर्वों पर उमड़ने वाली भीड़ से छुटकारा मिल जाएगा। इससे श्रद्धालुओं को भी राहत मिलेगी। प्रशासन की मेलों को बाहर ले जाने की कवायद को भी इससे मदद मिलेगी।
सिंचाई खंड हरिद्वार ने मुख्य सचिव की 12 दिसंबर की बैठक में दक्षिण काली मंदिर उदासीन आश्रम के निकट नीलधारा पर 148 लाख रुपये की लागत से कुंभ योजना में नए ब्रह्मकुंड घाट का निर्माण करना प्राथमिकता के कार्य में प्रस्तावित किया है। इसके साथ ही कुंभ मेला के विशाल गौरीशंकर द्वीप के लिए स्वामी श्रद्धानंद की तपस्थली कांगड़ी में 242 लाख रुपये की लागत से बड़ा घाट बनाने की योजना प्रस्तावित है। कुंभ सहित सभी मेलों को शहर से बाहर ले जाने की अटकलबाजी तभी से शुरू हो गई थी जब दो साल पूर्व तत्कालीन गंगा पुनरुद्धार एवं विकास मंत्री उमा भारती ने नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत नीलधारा चंडीघाट में एक बड़ा स्नानघाट बनवाने का एलान किया था। लगभग 50 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से इस घाट का निर्माण और साज-सज्जा का काम एक निजी संस्था से कराया जा रहा है। घाट लगभग बनकर तैयार है। घाट के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए स्नान करने के बाद पूजा अर्चना करने के लिए कई पूजा स्थल भी बनाए जा रहे हैं। नीलाधारा चंडीघाट के किनारे ही एक शानदार श्मशानघाट भी बनाया जा रहा है।
पहले भी हो चुका विवाद
वर्ष 1998 के कुंभ के अवसर पर पद्मश्री साहित्यकार लीलाधर जगूड़ी ने कहा कि था कि ब्रह्मकुंड नीलधारा में था। तब वह उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में ज्वाइंट निदेशक थे। तब उनके इस बयान का अखाड़ों सहित धार्मिक जगत के लोगों ने कड़ा विरोध किया था। मेला प्रशासन ने बड़ी मुश्किल से विवाद को शांत किया था। जाहिर है कि अब भी सरकार के लिए हरकी पैड़ी की तरह एक और ब्रह्मकुंड बनाकर कुंभ सहित मेलों को शहर से बाहर ले जाना इतना आसान काम भी नहीं है, लेकिन कदम बढ़ गया है तो देर सबेर योजना परवान भी चढ़ ही जाएगी।
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अभी सहमति प्राथमिक स्तर
दक्षिण काली मंदिर उदासीन आश्रम के पास ब्रह्मकुंड और कांगड़ी में घाट बनाने की योजना पर प्राथमिक तौर पर सहमति है, लेकिन जब तक योजना की स्वीकृति नहीं मिल जाती है तब तक निश्चित रूप से कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
- सुंदरलाल कुड़ियाल अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड हरिद्वार
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सिंचाई विभाग की योजना परवान चढ़ी तो कुंभ 2021 तक गंगा की नीलधारा में हरकी पैड़ी जैसा एक और ब्रह्मकुंड जैसा घाट तैयार किया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो संभावना जताई जा रही है कि शहर को मेला और स्नान पर्वों पर उमड़ने वाली भीड़ से छुटकारा मिल जाएगा। इससे श्रद्धालुओं को भी राहत मिलेगी। प्रशासन की मेलों को बाहर ले जाने की कवायद को भी इससे मदद मिलेगी।
सिंचाई खंड हरिद्वार ने मुख्य सचिव की 12 दिसंबर की बैठक में दक्षिण काली मंदिर उदासीन आश्रम के निकट नीलधारा पर 148 लाख रुपये की लागत से कुंभ योजना में नए ब्रह्मकुंड घाट का निर्माण करना प्राथमिकता के कार्य में प्रस्तावित किया है। इसके साथ ही कुंभ मेला के विशाल गौरीशंकर द्वीप के लिए स्वामी श्रद्धानंद की तपस्थली कांगड़ी में 242 लाख रुपये की लागत से बड़ा घाट बनाने की योजना प्रस्तावित है। कुंभ सहित सभी मेलों को शहर से बाहर ले जाने की अटकलबाजी तभी से शुरू हो गई थी जब दो साल पूर्व तत्कालीन गंगा पुनरुद्धार एवं विकास मंत्री उमा भारती ने नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत नीलधारा चंडीघाट में एक बड़ा स्नानघाट बनवाने का एलान किया था। लगभग 50 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से इस घाट का निर्माण और साज-सज्जा का काम एक निजी संस्था से कराया जा रहा है। घाट लगभग बनकर तैयार है। घाट के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए स्नान करने के बाद पूजा अर्चना करने के लिए कई पूजा स्थल भी बनाए जा रहे हैं। नीलाधारा चंडीघाट के किनारे ही एक शानदार श्मशानघाट भी बनाया जा रहा है।
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पहले भी हो चुका विवाद
वर्ष 1998 के कुंभ के अवसर पर पद्मश्री साहित्यकार लीलाधर जगूड़ी ने कहा कि था कि ब्रह्मकुंड नीलधारा में था। तब वह उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में ज्वाइंट निदेशक थे। तब उनके इस बयान का अखाड़ों सहित धार्मिक जगत के लोगों ने कड़ा विरोध किया था। मेला प्रशासन ने बड़ी मुश्किल से विवाद को शांत किया था। जाहिर है कि अब भी सरकार के लिए हरकी पैड़ी की तरह एक और ब्रह्मकुंड बनाकर कुंभ सहित मेलों को शहर से बाहर ले जाना इतना आसान काम भी नहीं है, लेकिन कदम बढ़ गया है तो देर सबेर योजना परवान भी चढ़ ही जाएगी।
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अभी सहमति प्राथमिक स्तर
दक्षिण काली मंदिर उदासीन आश्रम के पास ब्रह्मकुंड और कांगड़ी में घाट बनाने की योजना पर प्राथमिक तौर पर सहमति है, लेकिन जब तक योजना की स्वीकृति नहीं मिल जाती है तब तक निश्चित रूप से कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
- सुंदरलाल कुड़ियाल अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड हरिद्वार