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प्राइवेट स्कूल बोले, गुणवता से नहीं करेंगे
Updated Mon, 12 Mar 2018 01:44 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन (पीपीएसए) ने साफ किया है कि वह सरकार की हर बात मानने को तैयार है, लेकिन गुणवत्ता से समझौता नहीं करेगा। एक ओर शिक्षा का अधिकार अधिनियम का पैसा समय से नहीं मिल रहा है, दूसरी ओर सरकार अब केवल एनसीईआरटी किताबों को लागू कर रही है। ऐसे में अगर रेफरेंस के तौर पर प्राइवेट बुक्स नहीं लगाने दी गई तो यह गुणवत्ता से बड़ा समझौता होगा, जो एसोसिएशन को कतई मंजूर नहीं है।
रविवार को प्रेम कश्यप की अध्यक्षता में पीपीएसए की बैठक चिल्ड्रंस एकेडमी में हुई। बैठक में पहले सरकार के लगातार बदलते नियमों पर असमंजस को लेकर चर्चा हुई। इसके बाद करीब 50 स्कूलों के मालिक और निदेशकों ने साफ किया है कि आरटीई का जो पैसा सरकार को देना है, उस पर काम तेज किया जाए। नए सत्र के आरटीई दाखिलों की फीस को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग रखी गई। अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने कहा कि वह सरकार का पूरा सहयोग करेंगे। सरकार के हर फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन अपनी पहचान और गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि केवल एनसीईआरटी किताबों का लागू करना सही नहीं है। इससे छात्र का भविष्य प्रभावित होगा। इसके लिए जरूरी है कि एनसीईआरटी किताबों के साथ रेफरेंस के तौर पर प्राइवेट बुक्स भी दी जाएं। बैठक में एशियन स्कूल के प्रिंसिपल एके दास, श्री साईं बाबा स्कूल के चेयरमैन अनुराग शर्मा, एशियन स्कूल के वाइस प्रेसीडेंट मदनजीत सिंह, संत कबीर एकेडमी के निदेशक अतुल राठौर, इंडियन एकेडमी के चेयरमैन मुनेंद्र खंडूड़ी, दून भवानी स्कूल के चेयरमैन बीपी उनियाल, शिवालिक एकेडमी के निदेशक सोम दत्त त्यागी, केसी पब्लिक स्कूल की अनीशा अरोड़ा, जेपी शर्मा सहित कई निदेशक एवं प्राचार्य मौजूद रहे।
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प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन (पीपीएसए) ने साफ किया है कि वह सरकार की हर बात मानने को तैयार है, लेकिन गुणवत्ता से समझौता नहीं करेगा। एक ओर शिक्षा का अधिकार अधिनियम का पैसा समय से नहीं मिल रहा है, दूसरी ओर सरकार अब केवल एनसीईआरटी किताबों को लागू कर रही है। ऐसे में अगर रेफरेंस के तौर पर प्राइवेट बुक्स नहीं लगाने दी गई तो यह गुणवत्ता से बड़ा समझौता होगा, जो एसोसिएशन को कतई मंजूर नहीं है।
रविवार को प्रेम कश्यप की अध्यक्षता में पीपीएसए की बैठक चिल्ड्रंस एकेडमी में हुई। बैठक में पहले सरकार के लगातार बदलते नियमों पर असमंजस को लेकर चर्चा हुई। इसके बाद करीब 50 स्कूलों के मालिक और निदेशकों ने साफ किया है कि आरटीई का जो पैसा सरकार को देना है, उस पर काम तेज किया जाए। नए सत्र के आरटीई दाखिलों की फीस को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग रखी गई। अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने कहा कि वह सरकार का पूरा सहयोग करेंगे। सरकार के हर फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन अपनी पहचान और गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं कर सकते।
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उन्होंने कहा कि केवल एनसीईआरटी किताबों का लागू करना सही नहीं है। इससे छात्र का भविष्य प्रभावित होगा। इसके लिए जरूरी है कि एनसीईआरटी किताबों के साथ रेफरेंस के तौर पर प्राइवेट बुक्स भी दी जाएं। बैठक में एशियन स्कूल के प्रिंसिपल एके दास, श्री साईं बाबा स्कूल के चेयरमैन अनुराग शर्मा, एशियन स्कूल के वाइस प्रेसीडेंट मदनजीत सिंह, संत कबीर एकेडमी के निदेशक अतुल राठौर, इंडियन एकेडमी के चेयरमैन मुनेंद्र खंडूड़ी, दून भवानी स्कूल के चेयरमैन बीपी उनियाल, शिवालिक एकेडमी के निदेशक सोम दत्त त्यागी, केसी पब्लिक स्कूल की अनीशा अरोड़ा, जेपी शर्मा सहित कई निदेशक एवं प्राचार्य मौजूद रहे।
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