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जलस्तर बढ़ाने से पहले हो 415 परिवारों का पुनर्वास
Updated Fri, 21 Sep 2018 10:12 PM IST
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नई टिहरी। राज्य सरकार की ओर से टिहरी बांध का जल स्तर बढ़ाने की अनुमति दिए जाने का बांध प्रभावितों ने विरोध किया है। उन्होंने जलस्तर बढ़ाने से पहले चिह्नित 415 परिवारों का पुनर्वास और झील के कारण भूस्खलन से प्रभावित परिवारों की समस्याओं का निराकरण करने की मांग की।
शुक्रवार को नंदगांव में आयोजित प्रभावितों की बैठक में बिना पुनर्वास के सरकार की ओर से झील का जलस्तर आरएल 830 मीटर तक बढ़ाए जाने की अनुमति देने का पुरजोर विरोध किया गया। प्रभावितों ने कहा कि वर्ष 2010 में अचानक जलस्तर आरएल 830 तक बढ़ने से दर्जनों गांव भूस्खलन की चपेट में हैं। भूस्खलन से प्रभावित 415 परिवार पुनर्वास को चिह्नित है, लेकिन वर्षों बाद भी सरकार और टीएचडीसी प्रभावितों के पुनर्वास को भूमि उपलब्ध नहीं करवाई गई, जिसके चलते प्रभावित परिवार जीर्णशीर्ण हो चुके घरों में खतरे की साये में रहने को मजबूर है। उन्होंने चिह्नित परिवारों के पुनर्वास किए बिना जलस्तर न बढ़ाने, टीएचडीसी की कोर्ट में लगाई याचिकाएं वापस लेने, जिन गांवों के 75 फीसदी परिवारों का पुनर्वास हो गया है, वहां के अवशेष 25 फीसदी परिवारों को भूखंड समेत अन्य सुविधाएं देने, प्रभावितों के पुनर्वास को चिह्नित वन भूमि प्रकरण का निराकरण करने और नंदगांव के बांध प्रभावितों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की।
आंशिक डूब क्षेत्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष सोहन सिंह राणा ने कहा कि टीएचडीसी बांध प्रभावितों के पक्ष में सरकार की ओर से लिए जा रहे हर निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दे रही है, वहीं सरकार टीएचडीसी पर मेहरबानी कर जलस्तर बढ़ाने की अनुमति दे रही है। मामले में शनिवार को एक प्रतिनिधिमंडल कृषि मंत्री सुबोध उनियाल से मिलेगा। इसके बाद आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। बैठक में प्रधान प्रदीप भट्ट, राजेंद्र कुमांई, जगदंबा सेमवाल, राम सिंह, मंगसीरी देवी, शूरवीर सिंह, उम्मेद सिंह, गंगा देवी, बृहस्पति, रूकमणी देवी, देवी, अंजू देवी मौजूद थे।
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शुक्रवार को नंदगांव में आयोजित प्रभावितों की बैठक में बिना पुनर्वास के सरकार की ओर से झील का जलस्तर आरएल 830 मीटर तक बढ़ाए जाने की अनुमति देने का पुरजोर विरोध किया गया। प्रभावितों ने कहा कि वर्ष 2010 में अचानक जलस्तर आरएल 830 तक बढ़ने से दर्जनों गांव भूस्खलन की चपेट में हैं। भूस्खलन से प्रभावित 415 परिवार पुनर्वास को चिह्नित है, लेकिन वर्षों बाद भी सरकार और टीएचडीसी प्रभावितों के पुनर्वास को भूमि उपलब्ध नहीं करवाई गई, जिसके चलते प्रभावित परिवार जीर्णशीर्ण हो चुके घरों में खतरे की साये में रहने को मजबूर है। उन्होंने चिह्नित परिवारों के पुनर्वास किए बिना जलस्तर न बढ़ाने, टीएचडीसी की कोर्ट में लगाई याचिकाएं वापस लेने, जिन गांवों के 75 फीसदी परिवारों का पुनर्वास हो गया है, वहां के अवशेष 25 फीसदी परिवारों को भूखंड समेत अन्य सुविधाएं देने, प्रभावितों के पुनर्वास को चिह्नित वन भूमि प्रकरण का निराकरण करने और नंदगांव के बांध प्रभावितों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की।
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आंशिक डूब क्षेत्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष सोहन सिंह राणा ने कहा कि टीएचडीसी बांध प्रभावितों के पक्ष में सरकार की ओर से लिए जा रहे हर निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दे रही है, वहीं सरकार टीएचडीसी पर मेहरबानी कर जलस्तर बढ़ाने की अनुमति दे रही है। मामले में शनिवार को एक प्रतिनिधिमंडल कृषि मंत्री सुबोध उनियाल से मिलेगा। इसके बाद आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। बैठक में प्रधान प्रदीप भट्ट, राजेंद्र कुमांई, जगदंबा सेमवाल, राम सिंह, मंगसीरी देवी, शूरवीर सिंह, उम्मेद सिंह, गंगा देवी, बृहस्पति, रूकमणी देवी, देवी, अंजू देवी मौजूद थे।
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