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क्या सभी फर्जी शिक्षकों पर कस पाएगा शिकंजा?
Updated Mon, 17 Sep 2018 12:32 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
एसआईटी के आदेश पर रुड़की तहसील प्रशासन की ओर से 81 शिक्षकों के स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जांच के बाद भी क्या सभी फर्जी शिक्षक पकड़ में आ पाएंगे। क्योंकि जांच में जो कई समस्याएं सामने आ रही हैं, जो तहसील प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा रही है। जांच के दौरान कई प्रकरण ऐसे सामने आ रहे हैं, जिनमें शिक्षकों के नाम तहसील के रिकॉर्ड में तो दर्ज हैं, लेकिन उनकी मूल पत्रावलियां नहीं मिल रही हैं। इसके अलावा कई प्रकरण ऐसे भी हैं, जिनमें राज्य के समीपवर्ती इलाकों में रह रहे लोगों ने स्थानीय स्तर पर रिश्तेदारी में रहकर पढ़ाई की और जमीन आदि अपने नाम कराकर प्रमाणपत्र ले लिए।
हाल ही में एसआईटी की ओर से रुड़की तहसील प्रशासन से 81 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है। एसआईटी ने रिपोर्ट में देरी के संबंध में जिला प्रशासन को भी अवगत कराया है। लिहाजा जांच में तेजी लाने के लिए तहसील प्रशासन ने सभी जांचों को लेखपालों और कानूनगो को वितरित कर दिया है। लेकिन सूत्रों की मानें तो सभी जांचों में सही निष्कर्ष निकल पाने की उम्मीद नहीं है। बताया जा रहा है कि जांच के दौरान कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनके रिकॉर्ड में नाम तो दर्ज हैं, लेकिन उनकी पत्रावलियां नहीं मिल रही हैं। ऐसे ही एक मामले की तहसील में जांच भी चल रही है। बीते 27 अप्रैल को की गई जांच में पता चला कि रुड़की निवासी एक शिक्षक लक्सर क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय में तैनात है। उक्त शिक्षक का तहसील से वर्ष 2005 में जाति प्रमाणपत्र बना है, लेकिन तहसील में मूल पत्रावली नहीं मिली। इस बाबत शिक्षक से जवाब तलब करने के साथ ही जिलाधिकारी को भी रिपोर्ट भेजी गई है।
इसके अलावा रुड़की तहसील प्रशासन की ओर 12 सितंबर को की गई जांच में पाया गया कि मानकपुर आदम निवासी शिक्षक का तहसील की पंजिका में रिकॉर्ड दर्ज था, लेकिन मौके पर इस नाम के व्यक्ति के रहने की तस्दीक नहीं हुई। इसके बाद तहसील प्रशासन ने उक्त शिक्षक का स्थायी निवास प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि जिन लोगों ने क्षेत्र की रिश्तेदारी में रहकर प्रमाणपत्र बनवा लिए हैं, उनकी बारीकी से जांच करना कठिन होगा। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ब्रह्मपाल सिंह सैनी ने बताया कि इस बात की संभावना है कि कुछ शिक्षकों ने शातिराना ढंग से प्रमाणपत्र बनवा लिए हैं। उनका सत्यापन काफी कठिन होगा। वहीं, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने बताया कि पुराने समय में बने प्रमाणपत्रों की बारीकी से जांच का काम कठिन हैं। अधिकारियों से हर पहलू की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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एसआईटी के आदेश पर रुड़की तहसील प्रशासन की ओर से 81 शिक्षकों के स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जांच के बाद भी क्या सभी फर्जी शिक्षक पकड़ में आ पाएंगे। क्योंकि जांच में जो कई समस्याएं सामने आ रही हैं, जो तहसील प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा रही है। जांच के दौरान कई प्रकरण ऐसे सामने आ रहे हैं, जिनमें शिक्षकों के नाम तहसील के रिकॉर्ड में तो दर्ज हैं, लेकिन उनकी मूल पत्रावलियां नहीं मिल रही हैं। इसके अलावा कई प्रकरण ऐसे भी हैं, जिनमें राज्य के समीपवर्ती इलाकों में रह रहे लोगों ने स्थानीय स्तर पर रिश्तेदारी में रहकर पढ़ाई की और जमीन आदि अपने नाम कराकर प्रमाणपत्र ले लिए।
हाल ही में एसआईटी की ओर से रुड़की तहसील प्रशासन से 81 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है। एसआईटी ने रिपोर्ट में देरी के संबंध में जिला प्रशासन को भी अवगत कराया है। लिहाजा जांच में तेजी लाने के लिए तहसील प्रशासन ने सभी जांचों को लेखपालों और कानूनगो को वितरित कर दिया है। लेकिन सूत्रों की मानें तो सभी जांचों में सही निष्कर्ष निकल पाने की उम्मीद नहीं है। बताया जा रहा है कि जांच के दौरान कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनके रिकॉर्ड में नाम तो दर्ज हैं, लेकिन उनकी पत्रावलियां नहीं मिल रही हैं। ऐसे ही एक मामले की तहसील में जांच भी चल रही है। बीते 27 अप्रैल को की गई जांच में पता चला कि रुड़की निवासी एक शिक्षक लक्सर क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय में तैनात है। उक्त शिक्षक का तहसील से वर्ष 2005 में जाति प्रमाणपत्र बना है, लेकिन तहसील में मूल पत्रावली नहीं मिली। इस बाबत शिक्षक से जवाब तलब करने के साथ ही जिलाधिकारी को भी रिपोर्ट भेजी गई है।
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इसके अलावा रुड़की तहसील प्रशासन की ओर 12 सितंबर को की गई जांच में पाया गया कि मानकपुर आदम निवासी शिक्षक का तहसील की पंजिका में रिकॉर्ड दर्ज था, लेकिन मौके पर इस नाम के व्यक्ति के रहने की तस्दीक नहीं हुई। इसके बाद तहसील प्रशासन ने उक्त शिक्षक का स्थायी निवास प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि जिन लोगों ने क्षेत्र की रिश्तेदारी में रहकर प्रमाणपत्र बनवा लिए हैं, उनकी बारीकी से जांच करना कठिन होगा। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ब्रह्मपाल सिंह सैनी ने बताया कि इस बात की संभावना है कि कुछ शिक्षकों ने शातिराना ढंग से प्रमाणपत्र बनवा लिए हैं। उनका सत्यापन काफी कठिन होगा। वहीं, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने बताया कि पुराने समय में बने प्रमाणपत्रों की बारीकी से जांच का काम कठिन हैं। अधिकारियों से हर पहलू की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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