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राजाजी टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों को हादसों से बचाने को बनेंगे दो फ्लाईओवर , एनजीटी में हुइ्र सुनवायी
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर राजाजी टाइगर रिजर्व के मोतीचूर कोरिडोर में वन्यजीवों को हादसों से बचाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एक साल के भीतर 290 मीटर और 1200 मीटर के दो फ्लाईओवर का निर्माण करेगा। बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इसका हलफनामा दिया है।
राजाजी के पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्र के वन्यजीव (हाथी, बाघ, तेंदुआ व गुलदार) स्वच्छंद विचरण कर सके इसके लिए वर्ष 2009 में सुप्रीमकोर्ट ने मोतीचूर कोरिडोर के निर्माण के आदेश जारी किए गए थे। इसके तहत हरिद्वार से लाल तप्पड़ तक जगह-जगह फ्लाईओवर का निर्माण किया जाना था। मोतीचूर में 731 मीटर फ्लाईओवर का निर्माण किया जाना था। वर्ष 2011 में कोरिडोर का निर्माण शुरू किया गया। लेकिन, पिछले आठ साल से निर्माण पूरा नहीं हो पाया। इसका सीधा असर टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों पर पड़ रहा है। इसी प्रकरण को लेकर बृहस्पतिवार को सुनवाई हुई। अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों ने एक हलफनामा दिया है। इसमें बताया गया कि वे पूरे क्षेत्र में कोरिडोर नहीं बना सकते लेकिन, जहां से वन्यजीवों की आवाजाही ज्यादा होती है वहां वे एक साल के भीतर 290 मीटर और 1200 मीटर फ्लाईओवर का निर्माण करवा देंगे।
कई बार हो चुकी बैठकें, नतीजा शून्य
कोरिडोर बनाने के लिए वन विभाग और एनएचएआई अधिकारियों के बीच पिछले एक दशक में 24 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन, अब तक इनका नतीजा शून्य रहा। वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में एनएचएआई के अफसर यह आश्वासन देते रहे कि निर्माण जल्द किया जाएगा। बावजूद पिछले एक दशक से स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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देहरादून। दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर राजाजी टाइगर रिजर्व के मोतीचूर कोरिडोर में वन्यजीवों को हादसों से बचाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एक साल के भीतर 290 मीटर और 1200 मीटर के दो फ्लाईओवर का निर्माण करेगा। बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इसका हलफनामा दिया है।
राजाजी के पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्र के वन्यजीव (हाथी, बाघ, तेंदुआ व गुलदार) स्वच्छंद विचरण कर सके इसके लिए वर्ष 2009 में सुप्रीमकोर्ट ने मोतीचूर कोरिडोर के निर्माण के आदेश जारी किए गए थे। इसके तहत हरिद्वार से लाल तप्पड़ तक जगह-जगह फ्लाईओवर का निर्माण किया जाना था। मोतीचूर में 731 मीटर फ्लाईओवर का निर्माण किया जाना था। वर्ष 2011 में कोरिडोर का निर्माण शुरू किया गया। लेकिन, पिछले आठ साल से निर्माण पूरा नहीं हो पाया। इसका सीधा असर टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों पर पड़ रहा है। इसी प्रकरण को लेकर बृहस्पतिवार को सुनवाई हुई। अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों ने एक हलफनामा दिया है। इसमें बताया गया कि वे पूरे क्षेत्र में कोरिडोर नहीं बना सकते लेकिन, जहां से वन्यजीवों की आवाजाही ज्यादा होती है वहां वे एक साल के भीतर 290 मीटर और 1200 मीटर फ्लाईओवर का निर्माण करवा देंगे।
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कई बार हो चुकी बैठकें, नतीजा शून्य
कोरिडोर बनाने के लिए वन विभाग और एनएचएआई अधिकारियों के बीच पिछले एक दशक में 24 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन, अब तक इनका नतीजा शून्य रहा। वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में एनएचएआई के अफसर यह आश्वासन देते रहे कि निर्माण जल्द किया जाएगा। बावजूद पिछले एक दशक से स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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