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विधायकों में असंतोष की गहराई नापने जुटेंगे 'गुप्तचर'

Wed, 18 Jul 2018 12:44 AM IST
Updated Wed, 18 Jul 2018 12:44 AM IST
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विधायकों में असंतोष की गहराई नापने जुटेंगे 'गुप्तचर'
रुड़की। मुख्यमंत्री के खिलाफ क्या विधायकों और मंत्रियों असंतोष है, और अगर है तो कितना, इसकी थाह नापने के लिए आरएसएस सक्रिय हो गया है। सांसद निशंक की समीक्षा बैठक के दौरान आरएसएस की ओर से हरिद्वार जिले में सक्रिय गुप्तचर भी विधायकों और पार्टी नेताओं की थाह ले रहे थे। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री और सरकार को लेकर पनप रहे कथित आक्रोश के बाबत आरएसएस जल्द ही अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप सकता है।
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लक्सर से भाजपा विधायक संजय गुप्ता ने मुख्यमंत्री और एक कबीना मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोला तो अब अन्य विधायकों में भी अंदरखाने पनप रही नाराजगी सरेआम होती दिख रही है। यह बात अलग है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के डर से कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। पार्टी संगठन के लोग सरकार के खिलाफ न बोलने की बाध्यता से जुड़े हैं। ऐसे में अब आरएसएस के गुप्तचर विधायकों की नाराजगी का फीडबैक लेकर केंद्रीय हाईकमान तक पहुंचाने की कवायद में जुट गए हैं। तीन दिन पूर्व प्रदेश की राजनीति में अचानक आए भूचाल के बाद विभिन्न जिलों के आरएसएस कार्यकर्ताओं ने हरिद्वार और रुड़की में डेरा डाल दिया है।
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सूत्रों के मुताबिक ये कार्यकर्ता लक्सर और ज्वालापुर क्षेत्र में भी संगठन के नेताओं एवं आम लोगों से फीडबैक ले रहे हैं। मंगलवार को भाजपा विधायक प्रदीप बत्रा के गंगनहर किनारे स्थित कैंप कार्यालय पर आयोजित सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की समीक्षा बैठक में भी आरएस्एस के ‘गुप्तचरों’ ने भीड़ के बीच ही नेताओं के दिलों का परखा। ऐसे ही आरएसएस के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें सरकार के बारे में विधायकों की नाराजगी को लेकर ‘ऊपर’ तक फीडबैक पहुंचाना है।
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बिन पानी ‘मछली’ की तरह ‘छटपटा’ रहे विधायक:
रुड़की। क्षेत्र और आसपास के विधायकों की स्थिति इन दिनों बिना पानी के बेबस मछली की तरह होती जा रही है। विधायक संजय गुप्ता के बयान को लेकर बैठकों में तो दिखावे के लिए निंदा की जा रही है, लेकिन अंदरखाने हर कोई यही कहता नजर आ रहा है कि जो संजय ने कहा है, वह है तो सही ही। एक विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्थिति यह हो गई है कि थाने और कोतवालियों तक में उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं है। जिसकी सिफारिश करते हैं, उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं। प्रशासन मनमाने तरीके से अतिक्रमण हटा रहा है। एक कोतवाल तक का उनका कहने से स्थानांतरण नहीं हो रहा है। यह स्थिति करीब-करीब सभी विधायकों की है। विधायकों का यहां तक कहना है कि प्रदेश में ऐसा लग ही नहीं रहा है कि कोई सरकार है और वे विधायक हैं।
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