{"_id":"5b24258b4f1c1bf26e8b84c3","slug":"31529095563-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फिर बात करेंगे यूपी और उतराखंड के आला अफसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फिर बात करेंगे यूपी और उतराखंड के आला अफसर
Updated Sat, 16 Jun 2018 02:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिर बात करेंगे यूपी और उत्तराखंड के आला अफसर
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। टिहरी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में 25 फीसदी हिस्सेदारी को लेकर उत्तराखंड सरकार यूपी सरकार से वार्ता कर प्रकरण को ‘आउट ऑफ द कोर्ट सेटलमेंट’ की तैयारी में है। प्रकरण सुलझाने को लेकर दोनों राज्यों के प्रमुख सचिवों के अलावा ऊर्जा विभाग के आला अफसर इस मुद्दे पर चर्चा करने की योजना बना रहे हैं। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उत्तराखंड जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा का कहना है कि प्रकरण को कोर्ट से बाहर सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
टिहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट में वर्तमान में 75 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र सरकार और 25 फीसदी हिस्सेदारी यूपी सरकार की है। यह परियोजना अविभाजित राज्य में शुरू की गई थी। ऐसे में केेंद्र सरकार ने जो समझौता किया उसके मुताबिक यूपी को परियोजना से होने वाले लाभ का 25 फीसदी हिस्सा मिला। जब उत्तराखंड का गठन हुआ तो यहां की सरकार ने 25 फीसदी हिस्सेदारी पर अपना दावा ठोका, लेकिन यूपी सरकार ने हिस्सा देने से इंकार कर दिया। वहीं केंद्र सरकार ने यह तर्क देकर 25 फीसदी हिस्सेदारी देने से इंकार कर दिया कि समझौते के मुताबिक यह हिस्सेदारी यूपी को ही दी जाएगी। जब मामला नहीं सुलझा तो उत्तराखंड मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट चला गया, जो अभी विचाराधीन है। अब उत्तराखंड सरकार इस मुद्दे पर यूपी के अफसरों के साथ बैठक कर प्रकरण को ‘आउट आफ द कोर्ट सेटलमेंट’ करना चाहती है।
जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा ने बताया कि प्रकरण को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों के ऊर्जा प्रमुख सचिवों के अलावा विद्युत निगमों के आला अफसर आपस में बैठक कर जल्द ही वार्ता करेंगे। वार्ता की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
विज्ञापन
बकौल प्रबंध निदेशक, यदि यूपी सरकार 25 फीसदी हिस्सेदारी उत्तराखंड को देने पर सहमत हो जाती है तो राज्य सरकार को इससे सालाना एक हजार करोड़ रुपये का वित्तीय लाभ होगा, जो राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए बहुत बड़ी रकम है। इस जटिल प्रकरण को आउट आफ द कोर्ट सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। दोनों राज्यों के प्रमुख सचिव और अन्य आला अफसर इस मुद्दे पर कई बार वार्ता कर चुके हैं लेकिन अभी यूपी को रजामंद नहीं किया जा सका है।
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। टिहरी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में 25 फीसदी हिस्सेदारी को लेकर उत्तराखंड सरकार यूपी सरकार से वार्ता कर प्रकरण को ‘आउट ऑफ द कोर्ट सेटलमेंट’ की तैयारी में है। प्रकरण सुलझाने को लेकर दोनों राज्यों के प्रमुख सचिवों के अलावा ऊर्जा विभाग के आला अफसर इस मुद्दे पर चर्चा करने की योजना बना रहे हैं। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उत्तराखंड जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा का कहना है कि प्रकरण को कोर्ट से बाहर सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
टिहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट में वर्तमान में 75 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र सरकार और 25 फीसदी हिस्सेदारी यूपी सरकार की है। यह परियोजना अविभाजित राज्य में शुरू की गई थी। ऐसे में केेंद्र सरकार ने जो समझौता किया उसके मुताबिक यूपी को परियोजना से होने वाले लाभ का 25 फीसदी हिस्सा मिला। जब उत्तराखंड का गठन हुआ तो यहां की सरकार ने 25 फीसदी हिस्सेदारी पर अपना दावा ठोका, लेकिन यूपी सरकार ने हिस्सा देने से इंकार कर दिया। वहीं केंद्र सरकार ने यह तर्क देकर 25 फीसदी हिस्सेदारी देने से इंकार कर दिया कि समझौते के मुताबिक यह हिस्सेदारी यूपी को ही दी जाएगी। जब मामला नहीं सुलझा तो उत्तराखंड मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट चला गया, जो अभी विचाराधीन है। अब उत्तराखंड सरकार इस मुद्दे पर यूपी के अफसरों के साथ बैठक कर प्रकरण को ‘आउट आफ द कोर्ट सेटलमेंट’ करना चाहती है।
विज्ञापन
जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा ने बताया कि प्रकरण को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों के ऊर्जा प्रमुख सचिवों के अलावा विद्युत निगमों के आला अफसर आपस में बैठक कर जल्द ही वार्ता करेंगे। वार्ता की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
विज्ञापन
बकौल प्रबंध निदेशक, यदि यूपी सरकार 25 फीसदी हिस्सेदारी उत्तराखंड को देने पर सहमत हो जाती है तो राज्य सरकार को इससे सालाना एक हजार करोड़ रुपये का वित्तीय लाभ होगा, जो राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए बहुत बड़ी रकम है। इस जटिल प्रकरण को आउट आफ द कोर्ट सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। दोनों राज्यों के प्रमुख सचिव और अन्य आला अफसर इस मुद्दे पर कई बार वार्ता कर चुके हैं लेकिन अभी यूपी को रजामंद नहीं किया जा सका है।