{"_id":"59568c524f1c1b423b8b45e1","slug":"31498844242-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीएम के तेवर भी पड़े ठंडे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीएम के तेवर भी पड़े ठंडे
Updated Fri, 30 Jun 2017 11:07 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
जिला प्रशासन ने सिंचाई विभाग की मेला भूमि से पक्के कब्जों व अतिक्रमण को ध्वस्त करने की योजना पर पानी फेर दिया है। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को ही साफ कर दिया था कि उनकी प्राथमिकता में कांवड़ मेला की व्यवस्था बनाना है न की सिंचाई विभाग का अतिक्रमण हटाना। अधीनस्थों के रुख को भांप कर जिलाधिकारी दीपक रावत के अतिक्रमण विरोधी तेवर भी ठंड़े पड़ गए।
दो दिन के अभियान में एक भी ऐसा अतिक्रमण व कब्जा नहीं हटाया गया, जिसका उल्लेख किया जा सके। केवल पॉलिथीन की पन्नी तानकर फड़ लगाने वालों की पन्नी फाड़ने, ठेली वालों खदेड़ने तथा बाजार में दुकानदारों को सड़क से कुछ पीछे धकेलने के अलावा कुछ किया नहीं गया है। पुलिस चौकी हरकी पैड़ी का सड़क पर पसरा अतिक्रमण तक जस का तस है। जिसको हटाने के लिए सूचना आयोग और जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन तक आदेश दे चुके थे। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक का होर्डिंग लगाकर चाय सहित अन्य खानपान के होटल की ओर प्रशासन की टीम ने झांका तक नहीं है। दुकानदार बेधड़क सड़क जुुठे बर्तन धोकर गंदा पानी सड़क पर बहा रहा है। पंतद्वीप वाहन पार्किंग के दुकानदारों ने शुक्रवार को अभियान चलने की सूचना पर सुबह ही अपनी ठेलियों को पार्किंग से पंतद्वीप घाट के प्लेटफार्म पर बंद कर खड़ा कर दिया था। एक भी ठेला जब्त नहीं किया गया है। जबकि डीएम ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को अतिक्रमणकारियों का सामान जब्त कर नीलाम करने को निर्देश दिया था, परंतु उनके अधीनस्थ अभियान में शामिल अधिकारियों ने सिंचाई विभाग को ऐसा नहीं करने दिया। इससे सिंचाई खंड हरिद्वार के तत्कालीन अधिशासी अभियंता डीके सिंह का डीएम के सामने किया गया यह दावा सही साबित होता है कि अतिक्रमण कराने में कई प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कांग्रेस व भाजपा के बड़े नेताओं का हाथ है।
हरिद्वार।
जिला प्रशासन ने सिंचाई विभाग की मेला भूमि से पक्के कब्जों व अतिक्रमण को ध्वस्त करने की योजना पर पानी फेर दिया है। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को ही साफ कर दिया था कि उनकी प्राथमिकता में कांवड़ मेला की व्यवस्था बनाना है न की सिंचाई विभाग का अतिक्रमण हटाना। अधीनस्थों के रुख को भांप कर जिलाधिकारी दीपक रावत के अतिक्रमण विरोधी तेवर भी ठंड़े पड़ गए।
दो दिन के अभियान में एक भी ऐसा अतिक्रमण व कब्जा नहीं हटाया गया, जिसका उल्लेख किया जा सके। केवल पॉलिथीन की पन्नी तानकर फड़ लगाने वालों की पन्नी फाड़ने, ठेली वालों खदेड़ने तथा बाजार में दुकानदारों को सड़क से कुछ पीछे धकेलने के अलावा कुछ किया नहीं गया है। पुलिस चौकी हरकी पैड़ी का सड़क पर पसरा अतिक्रमण तक जस का तस है। जिसको हटाने के लिए सूचना आयोग और जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन तक आदेश दे चुके थे। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक का होर्डिंग लगाकर चाय सहित अन्य खानपान के होटल की ओर प्रशासन की टीम ने झांका तक नहीं है। दुकानदार बेधड़क सड़क जुुठे बर्तन धोकर गंदा पानी सड़क पर बहा रहा है। पंतद्वीप वाहन पार्किंग के दुकानदारों ने शुक्रवार को अभियान चलने की सूचना पर सुबह ही अपनी ठेलियों को पार्किंग से पंतद्वीप घाट के प्लेटफार्म पर बंद कर खड़ा कर दिया था। एक भी ठेला जब्त नहीं किया गया है। जबकि डीएम ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को अतिक्रमणकारियों का सामान जब्त कर नीलाम करने को निर्देश दिया था, परंतु उनके अधीनस्थ अभियान में शामिल अधिकारियों ने सिंचाई विभाग को ऐसा नहीं करने दिया। इससे सिंचाई खंड हरिद्वार के तत्कालीन अधिशासी अभियंता डीके सिंह का डीएम के सामने किया गया यह दावा सही साबित होता है कि अतिक्रमण कराने में कई प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कांग्रेस व भाजपा के बड़े नेताओं का हाथ है।
विज्ञापन