यहां मिलता है 24 तरह का नमक, स्वाद ऐसा कि दूर-दूर से खींचे चले आते हैं लोग
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पहाड़ में अपने हुनर का अच्छा उपयोग करके यहां के स्थानीय उत्पादों से नमक बनाकर देश ही नहीं, विदेशों में भी काकड़ीघाट का ‘पिसी नूण’ (सिलबट्टे का पिसा हुआ नमक) मांग हो गई है।
काकड़ीघाट के पर्यटक सूचना केंद्र के भवन को किराए पर लेकर दस दिसंबर 2012 से इसकी शुरुआत करने वाली दीपा खनायत निवासी नौगांव (अल्मोड़ा) बताती हैं कि शुरू में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा।
दो साल तक पहाड़ी नूण (पिसी नूण) बनाने के लिए मसाले आदि गांवों में जाकर खरीदने पड़ते थे। इसके बाद नमक की पिसाई के साथ ही अन्य दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। लेकिन, हिम्मत नहीं हारी और काम जारी रखा।
इस पिसी नूण की है मांग
पिसी नूण बनाने के काम में आज यहां छह महिलाओं को भी रोजगार मिला हुआ है। पिसी नूण की बढ़ती मांग पर अब यहां 24 प्रकार के स्वाद का नमक महिलाएं तैयार कर रहीं हैं।
इसे खरीदने के लिए स्थानीय लोगों के अलावा पर्यटकों की भी भीड़ रहती है। गर्मी में बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक भी सड़क किनारे रुककर पिसी नूण ले जाते हैं।
पिसी नूण बनाने के लिए काली मिर्च, लाल मिर्च, जीरा, अदरक, लहसुन, हींग, जीरा, तिल, भंगीरा, हरा धनिया, भूनी मिर्च, काला जीरा, अलसी, दैण, मिक्स मसाले का बारी-बारी से नमक पिसकर रोजाना पांच किलो नमक सिलबट्टे पर तैयार कर उसके छोटे-छोटे पैकेटों में भरकर इसकी पैकिंग की जाती है।
इन शहरों में जा रहा है नमक
अब पहाड़ी दाल के साथ मिलेगा मडुवे का आटा
दीपा खनायत ने बताया कि यहां पर काम सीख कर गए कई लोगों ने अपने शहरों में स्टॉल लगाए हैं। इस साल से हमारे केंद्र में पहाड़ी दालों के साथ मडुवे का आटा भी मिल सकेगा। बताया कि पिसी नूण के चलते ग्रामीण अब अधिक मसाले की खेती करने लगे हैं।