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कलियुग का 'श्रवण' है मेरठ का राहुल
Updated Mon, 23 Jul 2018 12:33 AM IST
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हरिद्वार। आधुनिकता की चकाचौंध के बाद भी समाज में ऐसी युवा भी हैं जो अपने माता-पिता और बुजुर्गों के लिए संवेदनशील है। कलियुग के श्रवण मेरठ के रहने वाले राहुल कुमार अपने दादा-दादी को लेकर धार्मिक यात्रा पर निकले हैं। मजेदार बात यह है कि हरकी पैड़ी पर गंगाजल भरने के बाद उन्होंने अपने दादा-दादी को कांवड़ पर बिठाकर पैदल ही अपने घर के लिए निकले हैं।
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के चंदेसी गांव निवासी राहुल कुमार 19 जुलाई को अपने दादा छोटेलाल (90) दादी कश्मीरी (80) पिता कमल सिंह और तीन मामा (अमित, जॉनी और सोनवीर) के साथ बस से ऋषिकेश आए। 20 जुलाई को उन्होंने अपने दादा-दादी को नीलकंठ महादेव के दर्शन कराने के बाद हरिद्वार लौट आए। 21 जुलाई को हरिद्वार में चंडी देवी और मंसा देवी के दर्शन कराए। रविवार की सुबह दादा दादी को गंगा में पावन डुबकी लगवाकर गंगाजल भरा। इसके बाद राहुल ने दादा-दादी को कांवड़ पर बैठाया और हरकी पैड़ी से मेरठ तक के पैदल सफर की शुरुआत की। राहुल की इस यात्रा में उसके पिता और तीनों मामा पैदल ही चल रहे हैं। चिलचिलाती धूप और तपती सड़कें उनके कदमों को नहीं रुक पाई।
सभी को मिले ऐसा बेटा
राहुल के दादा और दादी का कहना है कि भगवान राहुल जैसा बेटा सभी मां बाप को दे। उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा 9 अगस्त को मेरठ के औघड़ नाथ मंदिर में जलाभिषेक करने के बाद समाप्त होगी।
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लोगों की सोच बदलना चाहते हैं राहुल
मेरठ में एक निजी कंपनी में इलेक्ट्रिीशियन राहुल कुमार का कहना है कि युवा पीढ़ी की धारणा अपने बुजुर्गों को लेकर ठीक नहीं होती। शादी के बाद अधिकांश लोग अपने मां-बाप को अकेले छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि वह युवा पीढ़ी की सोच बदलना चाहते हैं। इसीलिए इस तरह की यात्रा पर निकले हैं। उन्होंने बताया कि वह पूरे संसार को बताना चाहते हैं कि बुजुर्गों की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं।
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उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के चंदेसी गांव निवासी राहुल कुमार 19 जुलाई को अपने दादा छोटेलाल (90) दादी कश्मीरी (80) पिता कमल सिंह और तीन मामा (अमित, जॉनी और सोनवीर) के साथ बस से ऋषिकेश आए। 20 जुलाई को उन्होंने अपने दादा-दादी को नीलकंठ महादेव के दर्शन कराने के बाद हरिद्वार लौट आए। 21 जुलाई को हरिद्वार में चंडी देवी और मंसा देवी के दर्शन कराए। रविवार की सुबह दादा दादी को गंगा में पावन डुबकी लगवाकर गंगाजल भरा। इसके बाद राहुल ने दादा-दादी को कांवड़ पर बैठाया और हरकी पैड़ी से मेरठ तक के पैदल सफर की शुरुआत की। राहुल की इस यात्रा में उसके पिता और तीनों मामा पैदल ही चल रहे हैं। चिलचिलाती धूप और तपती सड़कें उनके कदमों को नहीं रुक पाई।
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सभी को मिले ऐसा बेटा
राहुल के दादा और दादी का कहना है कि भगवान राहुल जैसा बेटा सभी मां बाप को दे। उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा 9 अगस्त को मेरठ के औघड़ नाथ मंदिर में जलाभिषेक करने के बाद समाप्त होगी।
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लोगों की सोच बदलना चाहते हैं राहुल
मेरठ में एक निजी कंपनी में इलेक्ट्रिीशियन राहुल कुमार का कहना है कि युवा पीढ़ी की धारणा अपने बुजुर्गों को लेकर ठीक नहीं होती। शादी के बाद अधिकांश लोग अपने मां-बाप को अकेले छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि वह युवा पीढ़ी की सोच बदलना चाहते हैं। इसीलिए इस तरह की यात्रा पर निकले हैं। उन्होंने बताया कि वह पूरे संसार को बताना चाहते हैं कि बुजुर्गों की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं।