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सरकार का ही नहीं विपक्ष का भी इम्तहान
Updated Tue, 20 Mar 2018 02:36 AM IST
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ब्यूरो/ राकेश खंडूड़ी, देहरादून
गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में मंगलवार से शुरू होने जा रहे बजट सत्र में सरकार का ही नहीं विपक्ष का भी इम्तहान है। कांग्रेस तल्ख तेवरों के साथ सदन में उतरने के इरादे जता रही है। दिल्ली में पार्टी के महाधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की पाठशाला से कांग्रेस सीधे सत्र में उतर रही है। लौटते ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने जिस तीखे अंदाज में सरकार पर हमला बोला, उसने जाहिर कर दिया कि वह कमजोर संख्या बल के बावजूद मजबूत इरादों के साथ सदन में उतरेगी। कहीं न कहीं उनके इस अंदाज में यूपी और बिहार के उपचुनावों में भाजपा की पराजय से मिली ताकत भी है। विपक्ष का तरकश मुद्दों के तीरों से भरा पड़ा है। कमोबेश इसका अंदाजा सरकार को भी है। वरना शासन से विभागों के मुखियाओं को चिट्ठी भेजकर 100 से ज्यादा मुद्दों की तगड़ी तैयारी कर लेने का मशविरा नहीं गया होता। 17 सालों में यह भी पहली बार हुआ कि सरकार के मुख्य सचिव को विभागीय सचिवों को यह दिशा-निर्देश देने पड़े कि वे एक-एक मुद्दे की तैयारी करके आएं।
इन सब के बावजूद असल इम्तहान विपक्ष का ही है। खासतौर पर गैरसैंण के मुद्दे पर। हालांकि विपक्ष गैरसैंण के मुद्दे पर सीधे जंग छेड़ने के बजाय स्थायी राजधानी के सवाल पर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा है। बकौल नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश, हम सरकार से स्थायी राजधानी पर रुख स्पष्ट करने की मांग करेंगे।
राजधानी के बाद विपक्ष के तरकश में दूसरा सबसे बड़ा तीर एनएच 74 का घोटाला है। मुख्यमंत्री के ऐलान के बावजूद घोटाले की सीबीआई जांच न होने से विपक्ष हमलावर है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह अब इस घोटाले की जांच उच्च न्यायालय के सिटिंग जजों से कराने की मांग कर रहे हैं। बकौल प्रीतम, जीरो टालरेंस पर सरकार पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। उसने एनएच घोटाले की सीबीआई से जांच नहीं कराई। लोकायुक्त नहीं बनाया। जीएसटी और नोटबंदी के बाद किसानों और व्यापारियों की आत्महत्या के बावजूद कोई हल नहीं निकाला। ऐसे तमाम मुद्दे हैं, जिन पर विपक्ष सरकार को बेपर्दा करने की चेतावनी दे रहा है। लेकिन यह आने वाले दिनों में साफ होगा कि विपक्ष की कमान से छूटने वाले तीरों में कितना वेग है और वे कितने मारक हैं। परीक्षा सिर्फ सरकार की नहीं विपक्ष की भी है।
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गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में मंगलवार से शुरू होने जा रहे बजट सत्र में सरकार का ही नहीं विपक्ष का भी इम्तहान है। कांग्रेस तल्ख तेवरों के साथ सदन में उतरने के इरादे जता रही है। दिल्ली में पार्टी के महाधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की पाठशाला से कांग्रेस सीधे सत्र में उतर रही है। लौटते ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने जिस तीखे अंदाज में सरकार पर हमला बोला, उसने जाहिर कर दिया कि वह कमजोर संख्या बल के बावजूद मजबूत इरादों के साथ सदन में उतरेगी। कहीं न कहीं उनके इस अंदाज में यूपी और बिहार के उपचुनावों में भाजपा की पराजय से मिली ताकत भी है। विपक्ष का तरकश मुद्दों के तीरों से भरा पड़ा है। कमोबेश इसका अंदाजा सरकार को भी है। वरना शासन से विभागों के मुखियाओं को चिट्ठी भेजकर 100 से ज्यादा मुद्दों की तगड़ी तैयारी कर लेने का मशविरा नहीं गया होता। 17 सालों में यह भी पहली बार हुआ कि सरकार के मुख्य सचिव को विभागीय सचिवों को यह दिशा-निर्देश देने पड़े कि वे एक-एक मुद्दे की तैयारी करके आएं।
इन सब के बावजूद असल इम्तहान विपक्ष का ही है। खासतौर पर गैरसैंण के मुद्दे पर। हालांकि विपक्ष गैरसैंण के मुद्दे पर सीधे जंग छेड़ने के बजाय स्थायी राजधानी के सवाल पर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा है। बकौल नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश, हम सरकार से स्थायी राजधानी पर रुख स्पष्ट करने की मांग करेंगे।
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राजधानी के बाद विपक्ष के तरकश में दूसरा सबसे बड़ा तीर एनएच 74 का घोटाला है। मुख्यमंत्री के ऐलान के बावजूद घोटाले की सीबीआई जांच न होने से विपक्ष हमलावर है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह अब इस घोटाले की जांच उच्च न्यायालय के सिटिंग जजों से कराने की मांग कर रहे हैं। बकौल प्रीतम, जीरो टालरेंस पर सरकार पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। उसने एनएच घोटाले की सीबीआई से जांच नहीं कराई। लोकायुक्त नहीं बनाया। जीएसटी और नोटबंदी के बाद किसानों और व्यापारियों की आत्महत्या के बावजूद कोई हल नहीं निकाला। ऐसे तमाम मुद्दे हैं, जिन पर विपक्ष सरकार को बेपर्दा करने की चेतावनी दे रहा है। लेकिन यह आने वाले दिनों में साफ होगा कि विपक्ष की कमान से छूटने वाले तीरों में कितना वेग है और वे कितने मारक हैं। परीक्षा सिर्फ सरकार की नहीं विपक्ष की भी है।
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