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उभरती एथलीट गरिमा को मदद की दरकार
Updated Sun, 12 Aug 2018 02:40 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
बंगलूरू में अभ्यास से लौटते वक्त अज्ञात कार की टक्कर से घायल राज्य की उभरती धाविका गरिमा जोशी को आपकी मदद की दरकार है। दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी में गहरी चोटें आईं हैं। उपचार पर लाखों रुपये का खर्च आ रहा है, जिसे वहन करने में गरिमा का परिवार पूरी तरह असमर्थ है।
अल्मोड़ा के चिलियानौला निवासी निवासी पूरन चंद्र जोशी की बेटी गरिमा जोशी, सोबन सिंह जीना परिसर अल्मोड़ा में बीए द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा हैं। गरिमा का चयन 27 मई को बंगलूरू में इंटरनेशनल एसोसिएट ऑफ एथलेटिक्स फेडरेशन की ओर से आयोजित होने वाली हाफ मैराथन के लिए हुआ था। बंगलूरू रवाना होने से पहले गरिमा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मिलने पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने उनका हौसला बढ़ाते हुए 25 हजार रुपये की मदद भी दी। प्रतियोगिता में गरिमा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देशभर के करीब 11 हजार एथलीटों के बीच छठा स्थान हासिल किया। इसके बाद मणिपाल में होने वाली अगली प्रतियोगिता के लिए गरिमा बंगलूरू में रहकर अभ्यास करने लगीं।
31 मई को अभ्यास से लौटते समय एक कार ने गरिमा को टक्कर मार दी और वह गंभीर घायल हो गईं। सूचना मिलते ही पिता पूरन चंद्र जोशी बंगलूरू पहुंचे। रीढ़ की हड्डी में फ्रेक्चर के बाद ऑपरेशन कर 18 रॉड इंप्लांट की गई। इसमें 12 लाख से अधिक का खर्च आया। जोशी ने बताया कि स्थानीय कारोबारी हीरा सिंह अधिकारी ने उन्हें 50 हजार की मदद की। इसके अलावा रिश्तेदारों, दोस्तों एवं अन्य लोगों से उधार लेकर अस्पताल का यह खर्च चुकाया। दुर्घटना में गरिमा की स्पाइनल कॉलर भी टूट गई, जिससे कमर से नीचे का हिस्सा पूरी तरह निष्क्रिय हो गया। पिता ने बताया कि गरिमा की तबीयत में सुधार है, लेकिन कमर से नीचे के हिस्से का एहसास पूरी तरह खत्म हो गया है।
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पांच लाख से अधिक की मदद चाहिए
गरिमा के स्पाइनल कॉलर का करीब आठ हफ्ते का उपचार होना है, जिसमें सवा पांच लाख रुपये से अधिक का खर्च आना है। पिता पूरन चंद्र ने बताया कि उपचार का इस्टीमेट उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा को दिया है, जिन्होंने उन्होंने मदद का भरोसा दिलाया है।
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सरकार को दिए ढाई लाख के बिल
पूरन चंद्र जोशी ने बताया कि गरिमा के उपचार के लिए उन्होंने 12 लाख से अधिक उधार लिए हैं। बेरोजगार होने के कारण वह उपचार की रकम नहीं जुटा पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार से मदद की आस में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को उपचार के ढाई लाख से अधिक के बिल करीब 16 दिन पहले दिए थे। मगर, अभी तक कुछ नहीं हुआ।
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कैंसर से जूझ रहीं मां
गरिमा की मां आशा जोशी भी कैंसर से जूझ रही हैं। उनका लंबे समय से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उपचार चल रहा है। उनका एक पैर भी काटना पड़ा है। पिता पूरन चंद्र ने बताया कि वह पिछले 20 दिनों से दिल्ली में हैं। जबकि, बंगलूरू के एक अस्पताल में भर्ती गरिमा की देखरेख उनका भाई कर रहा है।
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आप भी करें गरिमा की मदद
आप भी अपनी तरफ से गरिमा के उपचार में सहयोग कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए उनके पिता पूरन चंद्र जोशी के मोबाइल नंबर 8938822456 पर संपर्क किया जा सकता है।
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बंगलूरू में अभ्यास से लौटते वक्त अज्ञात कार की टक्कर से घायल राज्य की उभरती धाविका गरिमा जोशी को आपकी मदद की दरकार है। दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी में गहरी चोटें आईं हैं। उपचार पर लाखों रुपये का खर्च आ रहा है, जिसे वहन करने में गरिमा का परिवार पूरी तरह असमर्थ है।
अल्मोड़ा के चिलियानौला निवासी निवासी पूरन चंद्र जोशी की बेटी गरिमा जोशी, सोबन सिंह जीना परिसर अल्मोड़ा में बीए द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा हैं। गरिमा का चयन 27 मई को बंगलूरू में इंटरनेशनल एसोसिएट ऑफ एथलेटिक्स फेडरेशन की ओर से आयोजित होने वाली हाफ मैराथन के लिए हुआ था। बंगलूरू रवाना होने से पहले गरिमा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मिलने पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने उनका हौसला बढ़ाते हुए 25 हजार रुपये की मदद भी दी। प्रतियोगिता में गरिमा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देशभर के करीब 11 हजार एथलीटों के बीच छठा स्थान हासिल किया। इसके बाद मणिपाल में होने वाली अगली प्रतियोगिता के लिए गरिमा बंगलूरू में रहकर अभ्यास करने लगीं।
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31 मई को अभ्यास से लौटते समय एक कार ने गरिमा को टक्कर मार दी और वह गंभीर घायल हो गईं। सूचना मिलते ही पिता पूरन चंद्र जोशी बंगलूरू पहुंचे। रीढ़ की हड्डी में फ्रेक्चर के बाद ऑपरेशन कर 18 रॉड इंप्लांट की गई। इसमें 12 लाख से अधिक का खर्च आया। जोशी ने बताया कि स्थानीय कारोबारी हीरा सिंह अधिकारी ने उन्हें 50 हजार की मदद की। इसके अलावा रिश्तेदारों, दोस्तों एवं अन्य लोगों से उधार लेकर अस्पताल का यह खर्च चुकाया। दुर्घटना में गरिमा की स्पाइनल कॉलर भी टूट गई, जिससे कमर से नीचे का हिस्सा पूरी तरह निष्क्रिय हो गया। पिता ने बताया कि गरिमा की तबीयत में सुधार है, लेकिन कमर से नीचे के हिस्से का एहसास पूरी तरह खत्म हो गया है।
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पांच लाख से अधिक की मदद चाहिए
गरिमा के स्पाइनल कॉलर का करीब आठ हफ्ते का उपचार होना है, जिसमें सवा पांच लाख रुपये से अधिक का खर्च आना है। पिता पूरन चंद्र ने बताया कि उपचार का इस्टीमेट उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा को दिया है, जिन्होंने उन्होंने मदद का भरोसा दिलाया है।
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सरकार को दिए ढाई लाख के बिल
पूरन चंद्र जोशी ने बताया कि गरिमा के उपचार के लिए उन्होंने 12 लाख से अधिक उधार लिए हैं। बेरोजगार होने के कारण वह उपचार की रकम नहीं जुटा पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार से मदद की आस में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को उपचार के ढाई लाख से अधिक के बिल करीब 16 दिन पहले दिए थे। मगर, अभी तक कुछ नहीं हुआ।
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कैंसर से जूझ रहीं मां
गरिमा की मां आशा जोशी भी कैंसर से जूझ रही हैं। उनका लंबे समय से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उपचार चल रहा है। उनका एक पैर भी काटना पड़ा है। पिता पूरन चंद्र ने बताया कि वह पिछले 20 दिनों से दिल्ली में हैं। जबकि, बंगलूरू के एक अस्पताल में भर्ती गरिमा की देखरेख उनका भाई कर रहा है।
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आप भी करें गरिमा की मदद
आप भी अपनी तरफ से गरिमा के उपचार में सहयोग कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए उनके पिता पूरन चंद्र जोशी के मोबाइल नंबर 8938822456 पर संपर्क किया जा सकता है।