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आयुष्मान योजना:: काशीपुर के अस्पताल संचालक पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। काशीपुर के आस्था अस्पताल के मालिक के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। आरोप है इस अस्पताल का मालिक एक सरकारी अस्पताल में भी संविदा पर तैनात है। जो पूरी तरह नियम विरुद्ध है। इसके अलावा उसने कई लोगों को फर्जी तरीके से सरकारी अस्पताल से अपने निजी अस्पताल में रेफर करना दर्शाया है। उसके बाद उनका विभिन्न पैकेज के तहत इलाज दर्शाकर लाखों रुपये क्लेम के हड़प लिए। सोमवार को उनके खिलाफ जांच करने वाली दो सदस्यीय टीम ने रिपोर्ट सीईओ कार्यालय में भेज दी है। जांच में सभी आरोप सही पाए गए हैं।
आस्था अस्पताल के मालिक डॉ. राजीव कुमार हैं। इस अस्पताल को अटल आयुष्मान योजना के तहत 18 दिसंबर 2018 को सूचीबद्ध किया गया था। डॉ. राजीव कुमार ने उस वक्त बताया था कि वे इस अस्पताल के पूर्णकालिक डॉक्टर हैं। जबकि, ऑडिट में पाया गया कि वे एलडी भट्ट राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय काशीपुर में संविदा पर तैनात हैं। सूचीबद्ध होने की तिथि से छह अप्रैल 2019 तक उसने खुद ही 17 मरीजों को अपने अस्पताल में रेफर किया। इसके अलावा एक और सरकारी अस्पताल की फर्जी मुहर लगाकर उसने 17 मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में रेफर भी किया। इनमें से सात मरीज उसने खुद के अस्पताल में भर्ती किए। प्राथमिक जांच में यह भी पाया गया है कि उन्होंने एक-एक परिवारों के कई-कई सदस्यों को एक साथ भर्ती होना दिखाया है। जिनका अस्पताल में इलाज किए बिना ही विभिन्न पैकेजों के अंतर्गत लाखों की राशि हड़प ली। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने आस्था अस्पताल को अटल आयुष्मान की सूची से बाहर कर दिया। उसके बाद दो सदस्यीय टीम से इसकी जांच कराई गई। इसमें आस्था अस्पताल के खिलाफ धोखाधड़ी के भी साक्ष्य मिले हैं। जांच रिपोर्ट सोमवार को सीईओ कार्यालय को सौंप दी है। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक अस्पताल के मालिक के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है। इधर, राज्य स्वास्थ्य अभिकरण के अध्यक्ष दिलीप कोटिया ने बताया कि इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट के जो बिंदु हैं उन्हें सीईओ योजना को बता दिया है। आगे की कार्रवाई सीईओ स्तर से या उनके निर्देश मिलने के बाद की जाएगी।
पीएचसी की बनाई फर्जी मुहर
जांच में यह भी पाया गया कि डॉ. राजीव कुमार ने फर्जीवाड़ा किया है। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केलाखेड़ा ऊधमसिंह नगर की मुहर लगाकर भी मरीज रेफर किए हैं। जबकि, इस स्वास्थ्य केंद्र से इनका कोई लेना-देना ही नहीं है। यहां से 17 मरीज आस्था हॉस्पिटल को रेफर करना दर्शाया गया है।
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अस्पताल में नहीं थे मरीज, क्लेम कर दी रकम
एक ही परिवार की तीन महिलाओं को 30 मार्च 2019 को एलडी भट्ट एलोपैथिक चिकित्सालय से आस्था हॉस्पिटल में रेफर किया गया। इन तीनों मरीजों में से कोई भी वहां भर्ती ही नहीं था। जबकि, इन्हें दिए गए इलाज की रकम को क्लेम कर दिया गया।
नौ परिवारों के 21 मरीज
सूचीबद्ध होने की तिथि से छह अप्रैल 2019 तक आस्था अस्पताल में कुल 57 मरीजों को रेफर किया गया। इनमें से 21 मरीज नौ परिवारों से संबंधित हैं। जांच में पाया गया कि इस तरह एक ही परिवार के कई सदस्य एक साथ भर्ती होना भी संदेह के घेरे में है, लिहाजा इसमें भी बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है।
दो पैकेज में 34 मरीजों का इलाज
जांच में सामने आया है कि आस्था अस्पताल में 34 मरीजों का दो ही पैकेज के अंतर्गत इलाज होना दर्शाया गया है। इनमें 10 मरीजों का एक्यूट गैस्ट्ररोएंटेरिटिस विद मॉडरेट डी हाईड्रेशन और 24 मरीजों का एंटेरिक फीवर पैकेज के अंतर्गत इलाज किया गया है। इनमें दो महिला मरीज कलावती और नईमा को बहुत कम समय में एक से अधिक बार योजना के अंतर्गत इलाज देना दर्शाया गया है।
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देहरादून। काशीपुर के आस्था अस्पताल के मालिक के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। आरोप है इस अस्पताल का मालिक एक सरकारी अस्पताल में भी संविदा पर तैनात है। जो पूरी तरह नियम विरुद्ध है। इसके अलावा उसने कई लोगों को फर्जी तरीके से सरकारी अस्पताल से अपने निजी अस्पताल में रेफर करना दर्शाया है। उसके बाद उनका विभिन्न पैकेज के तहत इलाज दर्शाकर लाखों रुपये क्लेम के हड़प लिए। सोमवार को उनके खिलाफ जांच करने वाली दो सदस्यीय टीम ने रिपोर्ट सीईओ कार्यालय में भेज दी है। जांच में सभी आरोप सही पाए गए हैं।
आस्था अस्पताल के मालिक डॉ. राजीव कुमार हैं। इस अस्पताल को अटल आयुष्मान योजना के तहत 18 दिसंबर 2018 को सूचीबद्ध किया गया था। डॉ. राजीव कुमार ने उस वक्त बताया था कि वे इस अस्पताल के पूर्णकालिक डॉक्टर हैं। जबकि, ऑडिट में पाया गया कि वे एलडी भट्ट राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय काशीपुर में संविदा पर तैनात हैं। सूचीबद्ध होने की तिथि से छह अप्रैल 2019 तक उसने खुद ही 17 मरीजों को अपने अस्पताल में रेफर किया। इसके अलावा एक और सरकारी अस्पताल की फर्जी मुहर लगाकर उसने 17 मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में रेफर भी किया। इनमें से सात मरीज उसने खुद के अस्पताल में भर्ती किए। प्राथमिक जांच में यह भी पाया गया है कि उन्होंने एक-एक परिवारों के कई-कई सदस्यों को एक साथ भर्ती होना दिखाया है। जिनका अस्पताल में इलाज किए बिना ही विभिन्न पैकेजों के अंतर्गत लाखों की राशि हड़प ली। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने आस्था अस्पताल को अटल आयुष्मान की सूची से बाहर कर दिया। उसके बाद दो सदस्यीय टीम से इसकी जांच कराई गई। इसमें आस्था अस्पताल के खिलाफ धोखाधड़ी के भी साक्ष्य मिले हैं। जांच रिपोर्ट सोमवार को सीईओ कार्यालय को सौंप दी है। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक अस्पताल के मालिक के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है। इधर, राज्य स्वास्थ्य अभिकरण के अध्यक्ष दिलीप कोटिया ने बताया कि इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट के जो बिंदु हैं उन्हें सीईओ योजना को बता दिया है। आगे की कार्रवाई सीईओ स्तर से या उनके निर्देश मिलने के बाद की जाएगी।
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पीएचसी की बनाई फर्जी मुहर
जांच में यह भी पाया गया कि डॉ. राजीव कुमार ने फर्जीवाड़ा किया है। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केलाखेड़ा ऊधमसिंह नगर की मुहर लगाकर भी मरीज रेफर किए हैं। जबकि, इस स्वास्थ्य केंद्र से इनका कोई लेना-देना ही नहीं है। यहां से 17 मरीज आस्था हॉस्पिटल को रेफर करना दर्शाया गया है।
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अस्पताल में नहीं थे मरीज, क्लेम कर दी रकम
एक ही परिवार की तीन महिलाओं को 30 मार्च 2019 को एलडी भट्ट एलोपैथिक चिकित्सालय से आस्था हॉस्पिटल में रेफर किया गया। इन तीनों मरीजों में से कोई भी वहां भर्ती ही नहीं था। जबकि, इन्हें दिए गए इलाज की रकम को क्लेम कर दिया गया।
नौ परिवारों के 21 मरीज
सूचीबद्ध होने की तिथि से छह अप्रैल 2019 तक आस्था अस्पताल में कुल 57 मरीजों को रेफर किया गया। इनमें से 21 मरीज नौ परिवारों से संबंधित हैं। जांच में पाया गया कि इस तरह एक ही परिवार के कई सदस्य एक साथ भर्ती होना भी संदेह के घेरे में है, लिहाजा इसमें भी बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है।
दो पैकेज में 34 मरीजों का इलाज
जांच में सामने आया है कि आस्था अस्पताल में 34 मरीजों का दो ही पैकेज के अंतर्गत इलाज होना दर्शाया गया है। इनमें 10 मरीजों का एक्यूट गैस्ट्ररोएंटेरिटिस विद मॉडरेट डी हाईड्रेशन और 24 मरीजों का एंटेरिक फीवर पैकेज के अंतर्गत इलाज किया गया है। इनमें दो महिला मरीज कलावती और नईमा को बहुत कम समय में एक से अधिक बार योजना के अंतर्गत इलाज देना दर्शाया गया है।