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बालिकाओं के लिए गुणवता परक शिक्षा अब भी सपना
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ब्यूरो/अमर उजाला, साहिया
सरकार भले ही शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने और सरकारी विद्यालयों को पर्याप्त संसाधन मुहैया कराने के दावा कर रही हो। लेकिन, जमीनी हकीकत इससे अलग है। ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के लिए गुणवत्ता परक शिक्षा अब भी सपना बनी हुई है। आलम यह है कि वर्षों से कई विद्यालयों को अपना भवन तक नसीब नहीं हुआ है। इस कारण इन विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के साथ ही शिक्षकों को भी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
ऐसा ही हाल जौनसार-बावर परगने के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज साहिया का है। विद्यालय अपने स्थापना काल से ही जिला पंचायत के पांच कमरों के डाक बंगले में संचालित हो रहा है। पांच कक्षों में छह से बारह तक की कक्षाएं संचालित करना ही मुश्किल का काम है। छात्राओं को प्रयोगशाला और पुस्तकालय की सुविधा भी नहीं मिल रही है।
जौनसार-बावर परगने के साहिया में ग्रामीण छात्राओं के लिए वर्ष 2012 में बालिका इंटर कॉलेज की स्थापना की गई थी। वर्तमान में विद्यालय में दो सौ छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। छह से बारह तक की कक्षाओं को संचालित करने के लिए विद्यालय के पास उधार के पांच कमरे ही हैं। जबकि, विद्यालय में इंटरमीडिएट की कला और विज्ञान की कक्षाओं सहित कुल नौ कक्षाओं का संचालन हो रहा है। पांच कक्षों में नौ कक्षाओं का संचालन करना शिक्षकों के लिए भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। साथ ही विद्यालय के प्रशासनिक कक्ष और छात्राओं को प्रयोगशाला, पुस्तकालय की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के लिए गुणवत्ता परक शिक्षा अब भी सपना बनी हुई है।
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विद्यालय भवन निर्माण के लिए भूमि के चयन की प्रक्रिया पूरी कर पत्रावली शासन को भेज दी गई है। बजट स्वीकृत होते ही स्कूल भवन का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
- आरएस राणा, खंड शिक्षा अधिकारी, कालसी
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इन विद्यालयों के पास भी नहीं है अपना भवन
विकासखंड कालसी के अंतर्गत कुछ विद्यालय हाईस्कूल के रूप में अपग्रेड होने के बावजूद जूनियर हाईस्कूलों के भवनों में संचालित हो रहे हैं। हाईस्कूल पंजिया, दातनू, समाल्टा, कनबुआ, कांडोईधार, गबेला सहित कई जूनियर हाईस्कूल और इंटर कॉलेज कोरूवा पिछले एक साल और इंटर कॉलेज दसऊ पिछले दो साल से हाईस्कूल के भवनों में ही संचालित किए जा रहे हैं।
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सरकार भले ही शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने और सरकारी विद्यालयों को पर्याप्त संसाधन मुहैया कराने के दावा कर रही हो। लेकिन, जमीनी हकीकत इससे अलग है। ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के लिए गुणवत्ता परक शिक्षा अब भी सपना बनी हुई है। आलम यह है कि वर्षों से कई विद्यालयों को अपना भवन तक नसीब नहीं हुआ है। इस कारण इन विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के साथ ही शिक्षकों को भी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
ऐसा ही हाल जौनसार-बावर परगने के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज साहिया का है। विद्यालय अपने स्थापना काल से ही जिला पंचायत के पांच कमरों के डाक बंगले में संचालित हो रहा है। पांच कक्षों में छह से बारह तक की कक्षाएं संचालित करना ही मुश्किल का काम है। छात्राओं को प्रयोगशाला और पुस्तकालय की सुविधा भी नहीं मिल रही है।
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जौनसार-बावर परगने के साहिया में ग्रामीण छात्राओं के लिए वर्ष 2012 में बालिका इंटर कॉलेज की स्थापना की गई थी। वर्तमान में विद्यालय में दो सौ छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। छह से बारह तक की कक्षाओं को संचालित करने के लिए विद्यालय के पास उधार के पांच कमरे ही हैं। जबकि, विद्यालय में इंटरमीडिएट की कला और विज्ञान की कक्षाओं सहित कुल नौ कक्षाओं का संचालन हो रहा है। पांच कक्षों में नौ कक्षाओं का संचालन करना शिक्षकों के लिए भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। साथ ही विद्यालय के प्रशासनिक कक्ष और छात्राओं को प्रयोगशाला, पुस्तकालय की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के लिए गुणवत्ता परक शिक्षा अब भी सपना बनी हुई है।
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विद्यालय भवन निर्माण के लिए भूमि के चयन की प्रक्रिया पूरी कर पत्रावली शासन को भेज दी गई है। बजट स्वीकृत होते ही स्कूल भवन का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
- आरएस राणा, खंड शिक्षा अधिकारी, कालसी
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इन विद्यालयों के पास भी नहीं है अपना भवन
विकासखंड कालसी के अंतर्गत कुछ विद्यालय हाईस्कूल के रूप में अपग्रेड होने के बावजूद जूनियर हाईस्कूलों के भवनों में संचालित हो रहे हैं। हाईस्कूल पंजिया, दातनू, समाल्टा, कनबुआ, कांडोईधार, गबेला सहित कई जूनियर हाईस्कूल और इंटर कॉलेज कोरूवा पिछले एक साल और इंटर कॉलेज दसऊ पिछले दो साल से हाईस्कूल के भवनों में ही संचालित किए जा रहे हैं।