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-विभागीय जांच के अलावा सीपीआरई भी करेगी जांच
Updated Wed, 20 Dec 2017 01:57 AM IST
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आईआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी एक और जांच
अमर उजाला ब्यूरो/देहरादून।
देहरादून के झाझरा विद्युत उपकेंद्र में 80 एमवीए (मेगा वाट एंपियर) के ट्रांसफार्मर फुंकने की आईआईटी जांच की रिपोर्ट के आधार पर एक और जांच कराई जाएगी। ऊर्जा सचिव राधिका झा ने पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के प्रबंध निदेशक (एमडी) को विभागीय स्तर पर जांच समिति का गठन कर दो माह के अंदर जांच पूरी कर दोषी अधिकारियों/ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है।
इस साल मार्च महीने में झाझरा स्थिति 220 केवी के उपकेंद्र पर 80 एमवीए का ट्रांसफार्मर बिजली की सप्लाई शुरू करते ही फुंक गया था। इस मामले में पिटकुल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा ने चार अधिकारियों को निलंबित करते हुए एक अधिकारी का तबादला कर दिया था। हालांकि बाद में इन अधिकारियों का निलंबन समाप्त कर दिया गया और मुख्यमंत्री के आदेश पर एक अधिकारी का तबादला भी रोक दिया गया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही मामले की आईआईटी, रुड़की से जांच कराई गई थी। आईआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ऊर्जा सचिव ने आदेश जारी किया है कि जांच रिपोर्ट में इंगित की गई कमियों के आधार पर टेंडर प्रक्रिया से लेकर ट्रांसफार्मर पर लोड डालने (एनरजाइज) की गहन जांच करा ली जाए। विभागीय जांच अधिकतम दो माह की अवधि के अंदर पूरी कर ली जाए और दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर इसकी जानकारी शासन को दी जाए। उन्होंने आईआईटी की रिपोर्ट के आधार पर ट्रांसफार्मर की स्थिति का विश्लेषण एवं जांच सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपीआरआई), बंगलूरू से भी कराने का निर्देेश दिया है। ऊर्जा सचिव ने पिटकुल के एमडी को यह निर्देश भी दिया है कि क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर को आईएमपी पावर लिमिटेड से रिप्लेस किया जाए। उधर, ऊर्जा सचिव राधिका झा ने ट्रांसफार्मर की खरीद के लिए पिटकुल के एमडी को पारदर्शी नीति बनाने का निर्देश दिया है।
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अमर उजाला ब्यूरो/देहरादून।
देहरादून के झाझरा विद्युत उपकेंद्र में 80 एमवीए (मेगा वाट एंपियर) के ट्रांसफार्मर फुंकने की आईआईटी जांच की रिपोर्ट के आधार पर एक और जांच कराई जाएगी। ऊर्जा सचिव राधिका झा ने पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के प्रबंध निदेशक (एमडी) को विभागीय स्तर पर जांच समिति का गठन कर दो माह के अंदर जांच पूरी कर दोषी अधिकारियों/ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है।
इस साल मार्च महीने में झाझरा स्थिति 220 केवी के उपकेंद्र पर 80 एमवीए का ट्रांसफार्मर बिजली की सप्लाई शुरू करते ही फुंक गया था। इस मामले में पिटकुल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा ने चार अधिकारियों को निलंबित करते हुए एक अधिकारी का तबादला कर दिया था। हालांकि बाद में इन अधिकारियों का निलंबन समाप्त कर दिया गया और मुख्यमंत्री के आदेश पर एक अधिकारी का तबादला भी रोक दिया गया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही मामले की आईआईटी, रुड़की से जांच कराई गई थी। आईआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ऊर्जा सचिव ने आदेश जारी किया है कि जांच रिपोर्ट में इंगित की गई कमियों के आधार पर टेंडर प्रक्रिया से लेकर ट्रांसफार्मर पर लोड डालने (एनरजाइज) की गहन जांच करा ली जाए। विभागीय जांच अधिकतम दो माह की अवधि के अंदर पूरी कर ली जाए और दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर इसकी जानकारी शासन को दी जाए। उन्होंने आईआईटी की रिपोर्ट के आधार पर ट्रांसफार्मर की स्थिति का विश्लेषण एवं जांच सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपीआरआई), बंगलूरू से भी कराने का निर्देेश दिया है। ऊर्जा सचिव ने पिटकुल के एमडी को यह निर्देश भी दिया है कि क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर को आईएमपी पावर लिमिटेड से रिप्लेस किया जाए। उधर, ऊर्जा सचिव राधिका झा ने ट्रांसफार्मर की खरीद के लिए पिटकुल के एमडी को पारदर्शी नीति बनाने का निर्देश दिया है।
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