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जिला स्तर पर बनाए जाएं एग्रो-बिजनेस कंसोर्टियम : राज्यपाल
Updated Wed, 14 Mar 2018 01:32 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल ने कहा कि कृषि किसानों के लिए तभी मुनाफे का सौदा होगा, जब जिला स्तर पर एग्रो बिजनेस कंसोर्टियम बनाए जाएं। इसके अलावा कृषि विशेषज्ञों को किसानों के भीतर आधुनिक खेती के प्रति भरोसा पैदा करना होगा।
राज्यपाल मंगलवार को कनक चौक के पास स्थित एक होटल में एसोचैम द्वारा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार व भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान की ओर से ‘खाद्य प्रसंस्करण व किसान संपदा योजना’ विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि खेती को व्यवसाय का रूप देने के लिए एग्रो बिजनेस कंसोर्टियम स्थापित करने की जरूरत है, जहां किसानों को मार्केटिंग आदि की जानकारी दी जाए। महामहिम ने कहा कि सूबे के हर जिले में मिट्टी की अपनी विशेषता है। जीबी पंत विवि ने जिलेवार रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें दिखाया गया है कि किस जिले में क्या फसल लगाएं, जिससे किसानों को अधिक से अधिक लाभ हो।
वहीं, राज्य कृषि व उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड में पलायन रोकने के लिए कृषि पर फोकस करना होगा। उद्यानिकी विकास के लिए 700 करोड़ रुपये की योजना को हरी झंडी मिल चुकी है। राज्य में पोस्ट-हार्वेस्टिंग नुकसान काफी अधिक है। ऐसे में खाद्य प्रसंस्करण महत्वपूर्ण है, जिससे दूसरे, तीसरे व चौथे ग्रेड के फलों का भी उपयोग किया जा सकेगा। हॉर्टीकल्चर स्वरोजगार का बेहतर विकल्प है। सरकार चमोली में फूलों की खेती को बढ़ावा दे रही है। इस मौके पर आईसीएआर निदेशक डॉ. पीके मिश्रा, एसोचैम के चेतन विज, डॉ. बांके बिहारी, शैलेश पवार, भूपेंद्र सिंह, मनोज गौड़ आदि ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में काफी संख्या में कृषि वैज्ञानिक व किसान मौजूद रहे।
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राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल ने कहा कि कृषि किसानों के लिए तभी मुनाफे का सौदा होगा, जब जिला स्तर पर एग्रो बिजनेस कंसोर्टियम बनाए जाएं। इसके अलावा कृषि विशेषज्ञों को किसानों के भीतर आधुनिक खेती के प्रति भरोसा पैदा करना होगा।
राज्यपाल मंगलवार को कनक चौक के पास स्थित एक होटल में एसोचैम द्वारा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार व भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान की ओर से ‘खाद्य प्रसंस्करण व किसान संपदा योजना’ विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि खेती को व्यवसाय का रूप देने के लिए एग्रो बिजनेस कंसोर्टियम स्थापित करने की जरूरत है, जहां किसानों को मार्केटिंग आदि की जानकारी दी जाए। महामहिम ने कहा कि सूबे के हर जिले में मिट्टी की अपनी विशेषता है। जीबी पंत विवि ने जिलेवार रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें दिखाया गया है कि किस जिले में क्या फसल लगाएं, जिससे किसानों को अधिक से अधिक लाभ हो।
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वहीं, राज्य कृषि व उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड में पलायन रोकने के लिए कृषि पर फोकस करना होगा। उद्यानिकी विकास के लिए 700 करोड़ रुपये की योजना को हरी झंडी मिल चुकी है। राज्य में पोस्ट-हार्वेस्टिंग नुकसान काफी अधिक है। ऐसे में खाद्य प्रसंस्करण महत्वपूर्ण है, जिससे दूसरे, तीसरे व चौथे ग्रेड के फलों का भी उपयोग किया जा सकेगा। हॉर्टीकल्चर स्वरोजगार का बेहतर विकल्प है। सरकार चमोली में फूलों की खेती को बढ़ावा दे रही है। इस मौके पर आईसीएआर निदेशक डॉ. पीके मिश्रा, एसोचैम के चेतन विज, डॉ. बांके बिहारी, शैलेश पवार, भूपेंद्र सिंह, मनोज गौड़ आदि ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में काफी संख्या में कृषि वैज्ञानिक व किसान मौजूद रहे।
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