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क्षमा धर्म रूपी पुष्प की प्रथम पंखुड़ी : नरेश चंद
Updated Wed, 26 Sep 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
भारतीय जैन मिलन की ओर से आयोजित क्षमावाणी महापर्व पर महामंत्री नरेश चंद जैन ने पर्युषण पर्व के बारे में बताते हुए कहा कि क्षमा धर्म रूपी पुष्प की प्रथम पंखुड़ी है। मंगलवार को गांधी रोड स्थित जैन भवन में आयोजित कार्यक्रम में जैन समुदाय के लोगों ने जाने अनजाने में हुई गलतियों के लिए माफी मांगी।
दस दिन तक चले दशलक्षण पर्व के समापन पर नरेश चंद जैन ने प्रवचन में कहा कि आत्मा का चिंतामणि रत्न यदि किसी को माना गया है तो वह क्षमा है। जीवन का पहला लक्ष्य सुख की प्राप्ति है, जो क्रोध, मान, माया और लोभ पर विजय प्राप्त किए बिना संभव नहीं है। लेकिन कोई भी व्यक्ति क्षमा के बिना सच्ची विजय प्राप्त नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि अगर मनुष्य के मन में क्षमा हीनता आ जाती है तो वह किसी का भी प्रिय नहीं बन सकता। बदले की भावना न रख कर शांत भावों से क्षमा कर देना या किसी से क्षमा मांगना ही क्षमा भाव है। उधर जैन धर्मशाला में आयोजित क्षमावाणी महापर्व के मौके पर जैन समुदाय के लोगों ने भी जाने अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगी। इस मौके पर नेम चंद जैन, प्रवीण जैन, संदीप जैन, अमित जैन, डॉ. संजीव जैन, राकेश जैन, अशोक जैन, सुनील जैन, नवीन जैन, विजय जैन, शांति प्रकाश जैन, वीना जैन महेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।
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भारतीय जैन मिलन की ओर से आयोजित क्षमावाणी महापर्व पर महामंत्री नरेश चंद जैन ने पर्युषण पर्व के बारे में बताते हुए कहा कि क्षमा धर्म रूपी पुष्प की प्रथम पंखुड़ी है। मंगलवार को गांधी रोड स्थित जैन भवन में आयोजित कार्यक्रम में जैन समुदाय के लोगों ने जाने अनजाने में हुई गलतियों के लिए माफी मांगी।
दस दिन तक चले दशलक्षण पर्व के समापन पर नरेश चंद जैन ने प्रवचन में कहा कि आत्मा का चिंतामणि रत्न यदि किसी को माना गया है तो वह क्षमा है। जीवन का पहला लक्ष्य सुख की प्राप्ति है, जो क्रोध, मान, माया और लोभ पर विजय प्राप्त किए बिना संभव नहीं है। लेकिन कोई भी व्यक्ति क्षमा के बिना सच्ची विजय प्राप्त नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि अगर मनुष्य के मन में क्षमा हीनता आ जाती है तो वह किसी का भी प्रिय नहीं बन सकता। बदले की भावना न रख कर शांत भावों से क्षमा कर देना या किसी से क्षमा मांगना ही क्षमा भाव है। उधर जैन धर्मशाला में आयोजित क्षमावाणी महापर्व के मौके पर जैन समुदाय के लोगों ने भी जाने अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगी। इस मौके पर नेम चंद जैन, प्रवीण जैन, संदीप जैन, अमित जैन, डॉ. संजीव जैन, राकेश जैन, अशोक जैन, सुनील जैन, नवीन जैन, विजय जैन, शांति प्रकाश जैन, वीना जैन महेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।
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