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आज से बच्चों को स्कूल ले जाएंगे ऑटो चालक
Updated Wed, 01 Aug 2018 02:28 AM IST
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आज से बच्चों को स्कूल ले जाएंगे ऑटो चालक
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। आज से ऑटो वाले अंकल बच्चों को स्कूल ले जाएंगे। आरटीओ से वार्ता के बाद दून ऑटो रिक्शा यूनियन ने ऑटो चलाने का निर्णय लिया है। बुधवार से 1500 ऑटो चालक करीब 12 हजार बच्चों को स्कूल ले जाएंगे। वहीं, उन्होंने परिवहन विभाग के मानकों को एक महीने के भीतर पूरा करने का आश्वासन दिया। ऑटो चालकों ने फोन कर कल से बच्चों को स्कूल ले जाने की जानकारी अभिभावकों को दे दी है।
मंगलवार को भाजपा प्रदेश मंत्री सुनील उनियाल गामा के नेतृत्व में दून ऑटो रिक्शा यूनियन का प्रतिनिधिमंडल आरटीओ डीसी पठोई से मिला। आरटीओ ने ऑटो चालकों को वर्दी पहनने, बच्चों की सुरक्षा के लिए रॉड लगाने और अग्निशमन यंत्र जल्द लगाने के निर्देश दिए। इसके अलावा अन्य मानकों को एक महीने के भीतर पूरा करने के लिए कहा, जिस पर सहमति जताते हुए यूनियन के पदाधिकारियों ने बुधवार से बच्चों को स्कूल ले जाने का निर्णय लिया। इस दौरान यूनियन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा, महासचिव राम सिंह, साबिर खान, नरेंद्र शर्मा, इंद्रजीत कुकरेजा, राकेश अग्रवाल, विनोद शर्मा, केतन सोनकर, शाहनवाज, मुकेश, मोहम्मद दाऊद, शराफत अली, फिरोज खान, रविंद्र डोरा, संजय, दीपक, विशाल आदि मौजूद रहे।
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कोट ...
वार्ता के बाद ऑटो चालकों ने बुधवार से बच्चों को स्कूल ले जाने का निर्णय लिया है। उम्मीद है कि अभिभावकों को राहत मिलेगी लेकिन एक महीने में मानकों को हर हाल में पूरा करना है। इसके बाद किसी भी तरह का समय नहीं दिया जाएगा।
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- डीसी पठोई, आरटीओ
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स्कूली वाहनों के लिए मानक
- स्कूली वाहन चलाने के लिए चालक को पांच साल का अनुभव होना जरूरी है।
- वाहन की खिड़कियों के बाहर लोहे की जाली लगी होनी अनिवार्य है।
- वाहन की सीट के नीचे बच्चों के बैग रखने का स्थान होना चाहिए।
- वाहन में फर्स्ट एड बॉक्स की व्यवस्था होनी चाहिए।
- छात्राओं की बस में महिला परिचालक की व्यवस्था होनी चाहिए।
- बस में दरवाजों के अलावा दो इमरजेंसी दरवाजे होना जरूरी हैं।
- स्कूली वाहन का रंग पीला और दोनों ओर नीली पट्टी होना अनिवार्य है।
- वाहन में अग्निशमन यंत्र और स्पीड गवर्नर का होना जरूरी है।
ऑटो रिक्शा नहीं पहुंचने से परेशान रहे अभिभावक
देहरादून। मंगलवार सुबह भी ऑटो चालकों के नहीं पहुंचने से अभिभावक परेशान रहे। वह स्वयं ही बच्चों को छोड़ने और लाने के लिए स्कूल पहुंचे। वहीं कई बच्चे ई-रिक्शा और अन्य वाहनों के जरिये स्कूल पहुंचे।
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ऑटो यूनियन से तीन मानकों पर बनी सहमति
- स्कूली बच्चों को लाने, ले जाने के समय ऑटो में दोनों साइडें बंद होंगी।
- ड्राइवर वर्दी पहनेंगे।
- वाहन में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था की जाएगी।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। आज से ऑटो वाले अंकल बच्चों को स्कूल ले जाएंगे। आरटीओ से वार्ता के बाद दून ऑटो रिक्शा यूनियन ने ऑटो चलाने का निर्णय लिया है। बुधवार से 1500 ऑटो चालक करीब 12 हजार बच्चों को स्कूल ले जाएंगे। वहीं, उन्होंने परिवहन विभाग के मानकों को एक महीने के भीतर पूरा करने का आश्वासन दिया। ऑटो चालकों ने फोन कर कल से बच्चों को स्कूल ले जाने की जानकारी अभिभावकों को दे दी है।
मंगलवार को भाजपा प्रदेश मंत्री सुनील उनियाल गामा के नेतृत्व में दून ऑटो रिक्शा यूनियन का प्रतिनिधिमंडल आरटीओ डीसी पठोई से मिला। आरटीओ ने ऑटो चालकों को वर्दी पहनने, बच्चों की सुरक्षा के लिए रॉड लगाने और अग्निशमन यंत्र जल्द लगाने के निर्देश दिए। इसके अलावा अन्य मानकों को एक महीने के भीतर पूरा करने के लिए कहा, जिस पर सहमति जताते हुए यूनियन के पदाधिकारियों ने बुधवार से बच्चों को स्कूल ले जाने का निर्णय लिया। इस दौरान यूनियन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा, महासचिव राम सिंह, साबिर खान, नरेंद्र शर्मा, इंद्रजीत कुकरेजा, राकेश अग्रवाल, विनोद शर्मा, केतन सोनकर, शाहनवाज, मुकेश, मोहम्मद दाऊद, शराफत अली, फिरोज खान, रविंद्र डोरा, संजय, दीपक, विशाल आदि मौजूद रहे।
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कोट ...
वार्ता के बाद ऑटो चालकों ने बुधवार से बच्चों को स्कूल ले जाने का निर्णय लिया है। उम्मीद है कि अभिभावकों को राहत मिलेगी लेकिन एक महीने में मानकों को हर हाल में पूरा करना है। इसके बाद किसी भी तरह का समय नहीं दिया जाएगा।
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- डीसी पठोई, आरटीओ
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स्कूली वाहनों के लिए मानक
- स्कूली वाहन चलाने के लिए चालक को पांच साल का अनुभव होना जरूरी है।
- वाहन की खिड़कियों के बाहर लोहे की जाली लगी होनी अनिवार्य है।
- वाहन की सीट के नीचे बच्चों के बैग रखने का स्थान होना चाहिए।
- वाहन में फर्स्ट एड बॉक्स की व्यवस्था होनी चाहिए।
- छात्राओं की बस में महिला परिचालक की व्यवस्था होनी चाहिए।
- बस में दरवाजों के अलावा दो इमरजेंसी दरवाजे होना जरूरी हैं।
- स्कूली वाहन का रंग पीला और दोनों ओर नीली पट्टी होना अनिवार्य है।
- वाहन में अग्निशमन यंत्र और स्पीड गवर्नर का होना जरूरी है।
ऑटो रिक्शा नहीं पहुंचने से परेशान रहे अभिभावक
देहरादून। मंगलवार सुबह भी ऑटो चालकों के नहीं पहुंचने से अभिभावक परेशान रहे। वह स्वयं ही बच्चों को छोड़ने और लाने के लिए स्कूल पहुंचे। वहीं कई बच्चे ई-रिक्शा और अन्य वाहनों के जरिये स्कूल पहुंचे।
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ऑटो यूनियन से तीन मानकों पर बनी सहमति
- स्कूली बच्चों को लाने, ले जाने के समय ऑटो में दोनों साइडें बंद होंगी।
- ड्राइवर वर्दी पहनेंगे।
- वाहन में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था की जाएगी।