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21 उद्यमियों को दी पिरूल से बिजली बनाने की अनुमति
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21 उद्यमियों को दी पिरूल से बिजली बनाने की अनुमति
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पिरूल से बिजली बनाने को लेकर राज्य सकरार की ओर से 21 उद्यमियों को प्लांट लगाने व बिजली उत्पादन की अनुमति दे दी गई है। मुख्यमंत्री की ओर से सभी उद्यमियों को शुक्रवार को ‘लेटर ऑफ अवार्ड’ जारी कर दिया गया है। इन सभी उद्यमियों में से 20 उद्यमियों द्वारा राज्य के विभिन्न इलाकों में पिरूल से बिजली बनाने के प्लांट लगाए जाएंगे। उद्यमी पिरूल से बायोमास ब्रिकेटिंग तैयार करेंगे। ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बताया कि उद्यमियों द्वारा लगाए गए प्लांटों से फिलहाल 675 किलोवाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा जो यूपीसीएल खरीदेगा।
ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बताया कि जंगलों से पिरूल इकट्ठा करने की जिम्मेदारी वन पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों व महिला मंगल दलों को सौंपी गई है। इस पिरूल को एक रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जाएगा। राज्य सरकार की ओर से तैयार पिरूल नीति के तहत चयनित उद्यमियों को बैंकों से बिना किसी गारंटी के ही ऋण दिया जाएगा। ऊर्जा सचिव ने बताया कि पिरूल से बिजली बनाने को राज्य में बढ़ावा दिया जा सके, इसके लिए सभी जिलाधिकारियों को भी आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए जा चुके हैं। जंगलों से अब तक 240 मीट्रिक टन पिरूल जमा किया जा चुका है। ऊर्जा सचिव का कहना है कि पिरूल से बिजली बनाने के लिए नए प्लांट स्थापित करने को लेकर समय समय पर समीक्षा की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि राज्य के विभिन्न इलाकों में अधिक से अधिक प्लांट लगाए जाएं ताकि अधिक से अधिक बिजली उत्पादन करने के साथ ही रोजगार के अवसर मुहैया कराए जा सकें।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पिरूल से बिजली बनाने को लेकर राज्य सकरार की ओर से 21 उद्यमियों को प्लांट लगाने व बिजली उत्पादन की अनुमति दे दी गई है। मुख्यमंत्री की ओर से सभी उद्यमियों को शुक्रवार को ‘लेटर ऑफ अवार्ड’ जारी कर दिया गया है। इन सभी उद्यमियों में से 20 उद्यमियों द्वारा राज्य के विभिन्न इलाकों में पिरूल से बिजली बनाने के प्लांट लगाए जाएंगे। उद्यमी पिरूल से बायोमास ब्रिकेटिंग तैयार करेंगे। ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बताया कि उद्यमियों द्वारा लगाए गए प्लांटों से फिलहाल 675 किलोवाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा जो यूपीसीएल खरीदेगा।
ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बताया कि जंगलों से पिरूल इकट्ठा करने की जिम्मेदारी वन पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों व महिला मंगल दलों को सौंपी गई है। इस पिरूल को एक रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जाएगा। राज्य सरकार की ओर से तैयार पिरूल नीति के तहत चयनित उद्यमियों को बैंकों से बिना किसी गारंटी के ही ऋण दिया जाएगा। ऊर्जा सचिव ने बताया कि पिरूल से बिजली बनाने को राज्य में बढ़ावा दिया जा सके, इसके लिए सभी जिलाधिकारियों को भी आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए जा चुके हैं। जंगलों से अब तक 240 मीट्रिक टन पिरूल जमा किया जा चुका है। ऊर्जा सचिव का कहना है कि पिरूल से बिजली बनाने के लिए नए प्लांट स्थापित करने को लेकर समय समय पर समीक्षा की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि राज्य के विभिन्न इलाकों में अधिक से अधिक प्लांट लगाए जाएं ताकि अधिक से अधिक बिजली उत्पादन करने के साथ ही रोजगार के अवसर मुहैया कराए जा सकें।
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