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यमुना समेत 11 नदियों को निर्मल बनाने के लिए मंथन
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। गंगा को निर्मल, अविरल बनाने को लेकर शुरू की कवायद के बीच अब केंद्र सरकार ने यमुना समेत देश की 11 और प्रमुख नदियों को स्वच्छ, निर्मल बनाने के साथ ही पुनर्जीवित करने की पहल की है। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आदेश पर वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के वैज्ञानिकों ने परियोजना पर काम करना शुरू कर दिया है। सभी वैज्ञानिकों ने नदियों के किनारे अधिक से अधिक पेड़ लगाने और आमजन को इसके प्रति जागरूक करने की बात कही।
वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में शुक्रवार का एक दिवसीय वैज्ञानिक सेमिनार का आयोजन किया गया। संस्थान के निदेशक एएस रावत ने यमुना समेत 13 प्रमुख नदियों को स्वच्छ बनाने की दिशा में अब तक किए प्रयासोें की जानकारी दी। कहा कि भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् वानिकी मध्यस्थता के जरिए 13 बड़ी नदियों के पुनरोद्धार का कार्य कर रही है। वानिकी मध्यस्थता के जरिए यमुना के पुनरोद्धार की डीपीआर का कार्य मार्च 2020 तक तैयार कर लिया जाएगा। 30 सितंबर 2020 तक इसे मंत्रालय को सौंपा जाएगा। उप महानिदेशक डॉ. एसडी शर्मा ने नदियों को साफ सुथरा बनाने को लेकर इस्तेमाल की जा रही तकनीकाें के बारे में बताया। इससे पूर्व परियोजना के समन्वयक डॉ. दिनेश कुमार ने परियोजना के बारे में जानकारी दी। सेमिनार को पूर्व प्रमुख वन संरक्षक डॉ. आरबीएस रावत, वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक मोनिष मल्लिक, मुख्य वन संरक्षक जीसी पांडे, आईआईटी रुड़की, राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की, भारतीय सुदूर संवेदी संस्थान, मृदा संरक्षण, वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि के वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों ने संबोधित किया।
परियोजना में गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, ब्रह्मपुत्र नदियां भी शामिल
परियोजना समन्यवक डॉ. दिनेश कुमार ने परियोजना में यमुना के अलावा कावेरी, कृष्णा, गोदावरी, महानदी, ब्रह्मपुत्र, रावी, सतलुज, व्यास, चिनाब और झेलम जैसी नदियाें को भी शामिल किया है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद को नदियों का अध्ययन करने व परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। परिषद के नौ क्षेत्रीय संस्थानों को अलग-अलग नदियों का अध्ययन करने और रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा सौंपा है।
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देहरादून। गंगा को निर्मल, अविरल बनाने को लेकर शुरू की कवायद के बीच अब केंद्र सरकार ने यमुना समेत देश की 11 और प्रमुख नदियों को स्वच्छ, निर्मल बनाने के साथ ही पुनर्जीवित करने की पहल की है। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आदेश पर वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के वैज्ञानिकों ने परियोजना पर काम करना शुरू कर दिया है। सभी वैज्ञानिकों ने नदियों के किनारे अधिक से अधिक पेड़ लगाने और आमजन को इसके प्रति जागरूक करने की बात कही।
वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में शुक्रवार का एक दिवसीय वैज्ञानिक सेमिनार का आयोजन किया गया। संस्थान के निदेशक एएस रावत ने यमुना समेत 13 प्रमुख नदियों को स्वच्छ बनाने की दिशा में अब तक किए प्रयासोें की जानकारी दी। कहा कि भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् वानिकी मध्यस्थता के जरिए 13 बड़ी नदियों के पुनरोद्धार का कार्य कर रही है। वानिकी मध्यस्थता के जरिए यमुना के पुनरोद्धार की डीपीआर का कार्य मार्च 2020 तक तैयार कर लिया जाएगा। 30 सितंबर 2020 तक इसे मंत्रालय को सौंपा जाएगा। उप महानिदेशक डॉ. एसडी शर्मा ने नदियों को साफ सुथरा बनाने को लेकर इस्तेमाल की जा रही तकनीकाें के बारे में बताया। इससे पूर्व परियोजना के समन्वयक डॉ. दिनेश कुमार ने परियोजना के बारे में जानकारी दी। सेमिनार को पूर्व प्रमुख वन संरक्षक डॉ. आरबीएस रावत, वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक मोनिष मल्लिक, मुख्य वन संरक्षक जीसी पांडे, आईआईटी रुड़की, राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की, भारतीय सुदूर संवेदी संस्थान, मृदा संरक्षण, वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि के वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों ने संबोधित किया।
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परियोजना में गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, ब्रह्मपुत्र नदियां भी शामिल
परियोजना समन्यवक डॉ. दिनेश कुमार ने परियोजना में यमुना के अलावा कावेरी, कृष्णा, गोदावरी, महानदी, ब्रह्मपुत्र, रावी, सतलुज, व्यास, चिनाब और झेलम जैसी नदियाें को भी शामिल किया है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद को नदियों का अध्ययन करने व परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। परिषद के नौ क्षेत्रीय संस्थानों को अलग-अलग नदियों का अध्ययन करने और रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा सौंपा है।
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