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पंचायती राज एक्ट संशोधन के खिलाफ प्रधानों ने खोला मोर्चा
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
पंचायती राज एक्ट में हाल ही में किए गए संशोधन के खिलाफ प्रधान संगठन ने मोर्चा खोल दिया है। प्रधानों ने संशोधन को जनप्रतिनिधि विरोधी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ने की चेतावनी दी है। इस बाबत प्रधानों ने राज्यपाल को ज्ञापन भी प्रेषित किया है।
प्रधान संगठन के सचिव रितेश जोशी ने मंगलवार को प्रेस क्लब में मीडिया को बताया कि संशोधन सरकार की बड़ी गलती है। संशोधन के तहत दो बच्चों से अधिक वाले प्रधान का चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। जोशी ने कहा कि इस तरह का संशोधन निकाय चुनाव के लिए भी किया गया था, लेकिन निकाय चुनाव के अनुसार पंचायती राज एक्ट में समय सीमा का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इसी तरह आरक्षित वर्ग के लिए 8वीं और अनारक्षित वर्ग के लिए 10वीं कक्षा की योग्यता रखी गई है। इस नियम से पहाड़ के बहुत से लोग चुनाव में प्रतिभाग करने से वंचित रह जाएंगे। खासकर महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर स्थिति खराब हो जाएगी। जोशी ने कहा कि यदि सरकार उनकी बात नहीं मानती है तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। निचली अदालतों से न्याय नहीं मिला तो वे सुप्रीम कोर्ट में भी फरियाद लगाएंगे।
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पंचायती राज एक्ट में हाल ही में किए गए संशोधन के खिलाफ प्रधान संगठन ने मोर्चा खोल दिया है। प्रधानों ने संशोधन को जनप्रतिनिधि विरोधी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ने की चेतावनी दी है। इस बाबत प्रधानों ने राज्यपाल को ज्ञापन भी प्रेषित किया है।
प्रधान संगठन के सचिव रितेश जोशी ने मंगलवार को प्रेस क्लब में मीडिया को बताया कि संशोधन सरकार की बड़ी गलती है। संशोधन के तहत दो बच्चों से अधिक वाले प्रधान का चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। जोशी ने कहा कि इस तरह का संशोधन निकाय चुनाव के लिए भी किया गया था, लेकिन निकाय चुनाव के अनुसार पंचायती राज एक्ट में समय सीमा का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इसी तरह आरक्षित वर्ग के लिए 8वीं और अनारक्षित वर्ग के लिए 10वीं कक्षा की योग्यता रखी गई है। इस नियम से पहाड़ के बहुत से लोग चुनाव में प्रतिभाग करने से वंचित रह जाएंगे। खासकर महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर स्थिति खराब हो जाएगी। जोशी ने कहा कि यदि सरकार उनकी बात नहीं मानती है तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। निचली अदालतों से न्याय नहीं मिला तो वे सुप्रीम कोर्ट में भी फरियाद लगाएंगे।
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