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रोडवेज प्रबंधन से वार्ता फिर विफल, दो से कार्य बहिष्कार
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन की दून मंडल इकाई की रोडवेज प्रबंधन से हुई दो दौर की वार्ता फिर विफल हो गई है। इससे गुस्साए कर्मचारियों ने दो जुलाई से कार्य बहिष्कार करने का निर्णय लिया। वहीं बुधवार से कर्मचारियों ने समय पर वेतन देने समेत 15 सूत्री मांगों के लिए मंडलीय प्रबंधक कार्यालय में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इस दौरान करीब 200 बसों का संचालन प्रभावित रहा। जिसकी वजह से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
यूनियन की दून मंडल इकाई के सदस्यों ने विभिन्न मांगों में लिए 29 मई को दून मंडलीय प्रबंधक पवन मेहरा को ज्ञापन सौंपा था। इसमें उन्होंने जल्द मांगें पूरी करने की मांग की थी। यूनियन के महामंत्री अशोक चौधरी एवं क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रवीण सैनी, मंत्री केपी सिंह ने बताया कि 15 मई को समझौता वार्ता का जब कार्यवृत्त जारी किया तो सभी मांगों को नहीं माना गया था। उसके बाद यूनियन ने सात जून से प्रदेश स्तर पर कार्यबहिष्कार की घोषणा की थी। इस बीच वित्त मंत्री प्रकाश पंत का निधन हो गया था। जिसकी वजह से इसे टालना पड़ा। लेकिन इस दौरान भी सरकार ने मांगों का संज्ञान नहीं लिया। जिसकी वजह से यूनियन ने दो जुलाई से प्रदेशव्यापी कार्यबहिष्कार की चेतावनी दी है।
यूनियन के महामंत्री अशोक चौधरी ने आरोप लगाया कि एक संगठन के दबाव में रोडवेज में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, यदि यही स्थिति रही तो रोडवेज की आर्थिक स्थिति और दयनीय हो जाएगी। उन्होंने डग्गामार बस संचालकों के खिलाफ केस दर्ज करने, दिल्ली आईएसबीटी में काउंटर बढ़ाने, खराब वाल्वो बसों को बेड़े से हटाने आदि की मांग की। इसके अलावा अनुबंधित ढाबों पर यात्रियों से मनमाना पैसा वसूलने और उनकी जांच करने के बाद ही ढाबों से अनुबंध करने की बात भी कही। उधर, यूनियन के धरना-प्रदर्शन से करीब 200 बसों का संचालन प्रभावित रहा। मजबूरन सवारियों को टैक्सी और निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
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देहरादून। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन की दून मंडल इकाई की रोडवेज प्रबंधन से हुई दो दौर की वार्ता फिर विफल हो गई है। इससे गुस्साए कर्मचारियों ने दो जुलाई से कार्य बहिष्कार करने का निर्णय लिया। वहीं बुधवार से कर्मचारियों ने समय पर वेतन देने समेत 15 सूत्री मांगों के लिए मंडलीय प्रबंधक कार्यालय में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इस दौरान करीब 200 बसों का संचालन प्रभावित रहा। जिसकी वजह से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
यूनियन की दून मंडल इकाई के सदस्यों ने विभिन्न मांगों में लिए 29 मई को दून मंडलीय प्रबंधक पवन मेहरा को ज्ञापन सौंपा था। इसमें उन्होंने जल्द मांगें पूरी करने की मांग की थी। यूनियन के महामंत्री अशोक चौधरी एवं क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रवीण सैनी, मंत्री केपी सिंह ने बताया कि 15 मई को समझौता वार्ता का जब कार्यवृत्त जारी किया तो सभी मांगों को नहीं माना गया था। उसके बाद यूनियन ने सात जून से प्रदेश स्तर पर कार्यबहिष्कार की घोषणा की थी। इस बीच वित्त मंत्री प्रकाश पंत का निधन हो गया था। जिसकी वजह से इसे टालना पड़ा। लेकिन इस दौरान भी सरकार ने मांगों का संज्ञान नहीं लिया। जिसकी वजह से यूनियन ने दो जुलाई से प्रदेशव्यापी कार्यबहिष्कार की चेतावनी दी है।
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यूनियन के महामंत्री अशोक चौधरी ने आरोप लगाया कि एक संगठन के दबाव में रोडवेज में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, यदि यही स्थिति रही तो रोडवेज की आर्थिक स्थिति और दयनीय हो जाएगी। उन्होंने डग्गामार बस संचालकों के खिलाफ केस दर्ज करने, दिल्ली आईएसबीटी में काउंटर बढ़ाने, खराब वाल्वो बसों को बेड़े से हटाने आदि की मांग की। इसके अलावा अनुबंधित ढाबों पर यात्रियों से मनमाना पैसा वसूलने और उनकी जांच करने के बाद ही ढाबों से अनुबंध करने की बात भी कही। उधर, यूनियन के धरना-प्रदर्शन से करीब 200 बसों का संचालन प्रभावित रहा। मजबूरन सवारियों को टैक्सी और निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
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