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पेयजल योजना पर स्वीकृति के ढाई साल बाद भी शुरू नहीं हुआ काम
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
सहसपुर ब्लॉक की एक दर्जन से अधिक ग्रामीण बस्तियों में पेयजल किल्लत से निजात मिलने की उम्मीद धूमिल होती नजर आ रही है। कारण ब्लॉक क्षेत्र के लिए 18 करोड़ रुपये की लागत से मालढुंग जलाशय से बनने वाली पेयजल योजना पर स्वीकृति के ढाई साल बाद भी काम शुरू नहीं हुआ है। योजना की स्वीकृति के बाद भी अमल में नहीं आने से लोग शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।
सहसपुर ब्लॉक के डूंगा, भानवाला, भाऊवाला, तेलपुरा, राजावाला, सेंट्रल होपटाउन, बहादरपुर, भगवानपुर, बड़ोवाला, भरतपुर, गढ़वाली बस्ती, रामसावाला सहित कई अन्य बस्तियों में दशकों से पेयजल किल्लत बनी हुई है। चार दशक पुरानी पेयजल लाइन इन क्षेत्रों की बढ़ती जनसंख्या की पेयजल आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हैं। लिहाजा, ग्रामीण बस्तियों की 40 हजार से अधिक की आबादी गर्मियों में पीने के पानी की समस्या से जूझ रही है। सहसपुर के पूर्व प्रधान सुंदर थापा ने बताया कि पेयजल किल्लत को देखते हुए भाजपा सरकार के गठन के पहले माह में ही मालढुंग जलाशय से 18 करोड़ रुपये की लागत से नई पेयजल लाइन बिछाने को स्वीकृति मिली थी। तब एक माह बाद योजना पर कार्य शुरू करने की बात कही गई थी। योजना के तहत जलाशय के पानी को ओवरहेड टैंक के माध्यम से डूंगा में एकत्र कर ग्रामीण बस्तियों के लिए नई पेयजल लाइन बिछाई जानी थी, लेकिन योजना पर कार्य शुरू नहीं होने से पेयजल किल्लत से निजात की उम्मीद धूमिल हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन जनता की मूलभूत सुविधाओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
वहीं, सहसपुर विधायक सहदेव पुंडीर ने कहा कि योजना की डीपीआर तैयार हो चुकी है। प्रयास रहेगा कि अगले वर्ष गर्मियों से पहले योजना निर्माण कार्य पूरा कर पेयजल किल्लत दूर की जाए।
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सहसपुर ब्लॉक की एक दर्जन से अधिक ग्रामीण बस्तियों में पेयजल किल्लत से निजात मिलने की उम्मीद धूमिल होती नजर आ रही है। कारण ब्लॉक क्षेत्र के लिए 18 करोड़ रुपये की लागत से मालढुंग जलाशय से बनने वाली पेयजल योजना पर स्वीकृति के ढाई साल बाद भी काम शुरू नहीं हुआ है। योजना की स्वीकृति के बाद भी अमल में नहीं आने से लोग शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।
सहसपुर ब्लॉक के डूंगा, भानवाला, भाऊवाला, तेलपुरा, राजावाला, सेंट्रल होपटाउन, बहादरपुर, भगवानपुर, बड़ोवाला, भरतपुर, गढ़वाली बस्ती, रामसावाला सहित कई अन्य बस्तियों में दशकों से पेयजल किल्लत बनी हुई है। चार दशक पुरानी पेयजल लाइन इन क्षेत्रों की बढ़ती जनसंख्या की पेयजल आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हैं। लिहाजा, ग्रामीण बस्तियों की 40 हजार से अधिक की आबादी गर्मियों में पीने के पानी की समस्या से जूझ रही है। सहसपुर के पूर्व प्रधान सुंदर थापा ने बताया कि पेयजल किल्लत को देखते हुए भाजपा सरकार के गठन के पहले माह में ही मालढुंग जलाशय से 18 करोड़ रुपये की लागत से नई पेयजल लाइन बिछाने को स्वीकृति मिली थी। तब एक माह बाद योजना पर कार्य शुरू करने की बात कही गई थी। योजना के तहत जलाशय के पानी को ओवरहेड टैंक के माध्यम से डूंगा में एकत्र कर ग्रामीण बस्तियों के लिए नई पेयजल लाइन बिछाई जानी थी, लेकिन योजना पर कार्य शुरू नहीं होने से पेयजल किल्लत से निजात की उम्मीद धूमिल हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन जनता की मूलभूत सुविधाओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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वहीं, सहसपुर विधायक सहदेव पुंडीर ने कहा कि योजना की डीपीआर तैयार हो चुकी है। प्रयास रहेगा कि अगले वर्ष गर्मियों से पहले योजना निर्माण कार्य पूरा कर पेयजल किल्लत दूर की जाए।
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