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सैंज गांव में 12 साल बाद मनाया गया जागड़ा
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
साहिया। शिलगुर देवता के शाही स्नान से लौटने के बाद शनिवार को अठगांव खत के सैंज गांव स्थित मूल मंदिर में 12 साल बाद जागड़ा पर्व मनाया गया। इस दौरान देव दर्शन के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालु उमड़ पड़े। महिलाओं ने हारुल, तांदी, रासों, झैंता पर शानदार लोक नृत्य कर लोक संस्कृति की छटा बिखेरी।
वहीं, देव जागड़े में सैकड़ों ग्रामीणों ने देव दर्शन कर पुण्य कमाया। इसके बाद मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। जागड़ा पर्व में देर रात तक पूूजा-अर्चना के साथ ही लोक गीतों और लोक नृत्यों का दौर चलता रहा। उल्लेखनीय है कि सैंज मंदिर से शिलगुर देवता 12 साल बाद शाही स्नान को निकले थे। हरिद्वार से शाही स्नान कर लौटने के बाद गत 12 जून को देवता हिमाचल प्रदेश के चूड़धार शाही स्नान को गए। तीन दिन की पद यात्रा के बाद सैंज गांव के मूल मंदिर लौटने पर जागड़ा पर्व मनाया गया। लाल व सफेद रंग की पताकाओं के साथ देव पालकी के मंदिर परिसर में पहुंचते ही शिलगुर महाराज के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। विधिविधान से देव पालकी को गर्भगृह में स्थापित करने के बाद मंदिर परिसर में ही लोक गीतों और लोक नृत्यों का दौर चला।
इस दौरान पुजारी धर्मा शर्मा, वजीर दर्शन नेगी, भंडारी सरदार सिंह, श्रीचंद शर्मा, महावीर सिंह नेगी, प्रशांत नेगी, रणवीर सिंह नेगी, विजयराम, सिंघाराम, धरम सिंह, मोहर सिंह, जालम सिंह आदि मौजूद रहे।
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साहिया। शिलगुर देवता के शाही स्नान से लौटने के बाद शनिवार को अठगांव खत के सैंज गांव स्थित मूल मंदिर में 12 साल बाद जागड़ा पर्व मनाया गया। इस दौरान देव दर्शन के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालु उमड़ पड़े। महिलाओं ने हारुल, तांदी, रासों, झैंता पर शानदार लोक नृत्य कर लोक संस्कृति की छटा बिखेरी।
वहीं, देव जागड़े में सैकड़ों ग्रामीणों ने देव दर्शन कर पुण्य कमाया। इसके बाद मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। जागड़ा पर्व में देर रात तक पूूजा-अर्चना के साथ ही लोक गीतों और लोक नृत्यों का दौर चलता रहा। उल्लेखनीय है कि सैंज मंदिर से शिलगुर देवता 12 साल बाद शाही स्नान को निकले थे। हरिद्वार से शाही स्नान कर लौटने के बाद गत 12 जून को देवता हिमाचल प्रदेश के चूड़धार शाही स्नान को गए। तीन दिन की पद यात्रा के बाद सैंज गांव के मूल मंदिर लौटने पर जागड़ा पर्व मनाया गया। लाल व सफेद रंग की पताकाओं के साथ देव पालकी के मंदिर परिसर में पहुंचते ही शिलगुर महाराज के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। विधिविधान से देव पालकी को गर्भगृह में स्थापित करने के बाद मंदिर परिसर में ही लोक गीतों और लोक नृत्यों का दौर चला।
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इस दौरान पुजारी धर्मा शर्मा, वजीर दर्शन नेगी, भंडारी सरदार सिंह, श्रीचंद शर्मा, महावीर सिंह नेगी, प्रशांत नेगी, रणवीर सिंह नेगी, विजयराम, सिंघाराम, धरम सिंह, मोहर सिंह, जालम सिंह आदि मौजूद रहे।
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