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लेखपालों की हड़ताल से तहसीलों में हाहाकार, फरियादियों की फजीहत
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लेखपालों की हड़ताल से तहसीलों में हाहाकार, फरियादियों की फजीहत
ब्यूरोे/अमर उजाला
देहरादून। कई माह से जारी लेखपालों की हड़ताल के चलते जिले की तमाम तहसीलों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो गया है। आलम यह है कि तहसीलों में आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, मूल निवास प्रमाणपत्र, हैसियत प्रमाणपत्र न बनने से आवेदकों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। सदर तहसील में ही रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज के 6106 मामले लटके पड़े हैं। इससे राजस्व का भी भारी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा जाति प्रमाणपत्र के 641 आवेदक, मूल निवास के 1209 आवेदक, आय प्रमाणपत्र के 2077 आवेदक प्रमाणपत्र पाने के लिए कई माह से तहसील के चक्कर काट रहे हैं। सबसे अधिक दिक्कत उन युवाआें को हो रही हैं जिन्हें सरकारी नौकरियां के लिए आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, मूल निवास प्रमाणपत्र जमा करना है। ये स्थिति तो सिर्फ सदर तहसील की है। कमोवेश यही स्थिति डोईवाला, ऋषिकेश, विकासनगर, त्यूनी, चकराता व कालसी तहसीलों की भी है। जहां हजाराें की संख्या में प्रमाणपत्रों व दाखिल-खारिज के मामले लटके हुए हैं।
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मुख्यमंत्री राहत कोष से नहीं मिल पा रही सहायता
लेखपालों की हड़ताल से उन गरीब लोगों को भी बड़ी दिक्कत हो रही है जिन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता मिलनी है। लेखपालों की हड़ताल से उनका भौतिक सत्यापन नही हो पा रहा है। ऐसे में उन्हें आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही है। राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री राहत कोष से अकेले सदर तहसील में ही 539 गरीबों को आर्थिक सहायता की दरकार है।
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पांच लेखपालों पर हो एक कानूनगो की तैनाती
हड़ताली लेखपालों का कहना है कि वर्तमान में 15 लेखपालों पर एक कानूनगो की तैनाती है। जबकि उत्तर प्रदेश में 10 लेखपालों पर एक कानूनगो की तैनाती है। लेखपालों की मांग है कि पांच लेखपालों पर एक कानूनगो की तैनाती की जाए। यह मांग साल 2006 से की जा रही है। इस संबंध में शासन में सचिव के साथ वार्ता भी हो चुकी है। सचिव स्तर से आश्वासन भी दिया गया लेकिन आज तक इस पर कुछ नहीं हो पाया है।
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428 लेखपालों की जगह हो 1000 लेखपालों की तैनाती
भूलेख संवर्गीय कर्मचारी संघ के संरक्षक राधेश्याम का कहना है कि वर्तमान में राज्य में महज 428 लेखपालों की तैनाती है। जो मानक के अनुरूप बेहद कम है। देहरादून में महज 73 लेखपाल व पांच कानूनगो की तैनाती है। जबकि पिछले कई साल के भीतर जिस तरीके से राज्य व देहरादून की आबादी बढ़ी है उसे देखते हुुए 1000 से अधिक लेखपालों की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने पद ग्रहण करने के साथ ही घोषणा की थी कि राज्य में 1000 लेखपालों की भर्ती होगी। राजस्व परिषद में जिलों से प्रस्ताव भी मांगा था लेकिन बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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ये हैं हड़ताली लेखपालों की मांगें
1- राजस्व एवं भूलेख कार्यों में एसआईटी व पुलिस का हस्तक्षेप बंद कराया जाए।
2- राजस्व निरीक्षक क्षेत्राें का नए सिरे से पुनर्गठन कराया जाए।
3- राजस्व निरीक्षक के पदों पर पदोन्नति जल्द की जाए।
4- नायब तहसीलदारों के पदों पर पदोन्नति दी जाए।
5- आय प्रमाणपत्र बनाने के लिए आय आगणन मानकों का नए सिरे से निर्धारण किया जाए।
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सरकार व शासन लेखपालों की मांगों के प्रति गंभीर नहीं है। मांगें नहीं माने जाने पर हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा। लेखपालों की हड़ताल से तमाम लोगों को परेशानियां हो रही हैं। इसका ज्ञान है लेकिन हड़ताल करना लेखपालों की मजबूरी है। सरकार व शासन को प्रकरण को सुलझाने के लिए ठोस पहल करनी चाहिए।
- राधेश्याम, संरक्षक, भूलेख संवर्गीय कर्मचारी संघ
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लेखपालों की मांगों के संबंध में जिला प्रशासन, राजस्व परिषद व शासन स्तर पर कई दौर की वार्ता हो चुकी हैं। निर्णय शासन स्तर लिया जाना है। जिला प्रशासन स्तर पर कुछ भी नहीं किया जा सकता है। उम्मीद है कि लेखपालों की हड़ताल जल्द समाप्त हो जाएगी।
- रामजी शरण शर्मा, अपर जिलाधिकारी
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ब्यूरोे/अमर उजाला
देहरादून। कई माह से जारी लेखपालों की हड़ताल के चलते जिले की तमाम तहसीलों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो गया है। आलम यह है कि तहसीलों में आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, मूल निवास प्रमाणपत्र, हैसियत प्रमाणपत्र न बनने से आवेदकों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। सदर तहसील में ही रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज के 6106 मामले लटके पड़े हैं। इससे राजस्व का भी भारी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा जाति प्रमाणपत्र के 641 आवेदक, मूल निवास के 1209 आवेदक, आय प्रमाणपत्र के 2077 आवेदक प्रमाणपत्र पाने के लिए कई माह से तहसील के चक्कर काट रहे हैं। सबसे अधिक दिक्कत उन युवाआें को हो रही हैं जिन्हें सरकारी नौकरियां के लिए आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, मूल निवास प्रमाणपत्र जमा करना है। ये स्थिति तो सिर्फ सदर तहसील की है। कमोवेश यही स्थिति डोईवाला, ऋषिकेश, विकासनगर, त्यूनी, चकराता व कालसी तहसीलों की भी है। जहां हजाराें की संख्या में प्रमाणपत्रों व दाखिल-खारिज के मामले लटके हुए हैं।
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मुख्यमंत्री राहत कोष से नहीं मिल पा रही सहायता
लेखपालों की हड़ताल से उन गरीब लोगों को भी बड़ी दिक्कत हो रही है जिन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता मिलनी है। लेखपालों की हड़ताल से उनका भौतिक सत्यापन नही हो पा रहा है। ऐसे में उन्हें आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही है। राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री राहत कोष से अकेले सदर तहसील में ही 539 गरीबों को आर्थिक सहायता की दरकार है।
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पांच लेखपालों पर हो एक कानूनगो की तैनाती
हड़ताली लेखपालों का कहना है कि वर्तमान में 15 लेखपालों पर एक कानूनगो की तैनाती है। जबकि उत्तर प्रदेश में 10 लेखपालों पर एक कानूनगो की तैनाती है। लेखपालों की मांग है कि पांच लेखपालों पर एक कानूनगो की तैनाती की जाए। यह मांग साल 2006 से की जा रही है। इस संबंध में शासन में सचिव के साथ वार्ता भी हो चुकी है। सचिव स्तर से आश्वासन भी दिया गया लेकिन आज तक इस पर कुछ नहीं हो पाया है।
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428 लेखपालों की जगह हो 1000 लेखपालों की तैनाती
भूलेख संवर्गीय कर्मचारी संघ के संरक्षक राधेश्याम का कहना है कि वर्तमान में राज्य में महज 428 लेखपालों की तैनाती है। जो मानक के अनुरूप बेहद कम है। देहरादून में महज 73 लेखपाल व पांच कानूनगो की तैनाती है। जबकि पिछले कई साल के भीतर जिस तरीके से राज्य व देहरादून की आबादी बढ़ी है उसे देखते हुुए 1000 से अधिक लेखपालों की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने पद ग्रहण करने के साथ ही घोषणा की थी कि राज्य में 1000 लेखपालों की भर्ती होगी। राजस्व परिषद में जिलों से प्रस्ताव भी मांगा था लेकिन बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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ये हैं हड़ताली लेखपालों की मांगें
1- राजस्व एवं भूलेख कार्यों में एसआईटी व पुलिस का हस्तक्षेप बंद कराया जाए।
2- राजस्व निरीक्षक क्षेत्राें का नए सिरे से पुनर्गठन कराया जाए।
3- राजस्व निरीक्षक के पदों पर पदोन्नति जल्द की जाए।
4- नायब तहसीलदारों के पदों पर पदोन्नति दी जाए।
5- आय प्रमाणपत्र बनाने के लिए आय आगणन मानकों का नए सिरे से निर्धारण किया जाए।
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सरकार व शासन लेखपालों की मांगों के प्रति गंभीर नहीं है। मांगें नहीं माने जाने पर हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा। लेखपालों की हड़ताल से तमाम लोगों को परेशानियां हो रही हैं। इसका ज्ञान है लेकिन हड़ताल करना लेखपालों की मजबूरी है। सरकार व शासन को प्रकरण को सुलझाने के लिए ठोस पहल करनी चाहिए।
- राधेश्याम, संरक्षक, भूलेख संवर्गीय कर्मचारी संघ
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लेखपालों की मांगों के संबंध में जिला प्रशासन, राजस्व परिषद व शासन स्तर पर कई दौर की वार्ता हो चुकी हैं। निर्णय शासन स्तर लिया जाना है। जिला प्रशासन स्तर पर कुछ भी नहीं किया जा सकता है। उम्मीद है कि लेखपालों की हड़ताल जल्द समाप्त हो जाएगी।
- रामजी शरण शर्मा, अपर जिलाधिकारी