{"_id":"5d0162b2bdec220771037668","slug":"156037188117-vikas-nagar-news107","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरजू ने छेड़ी बांसुरी की तान, झूमे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरजू ने छेड़ी बांसुरी की तान, झूमे लोग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
कालसी। चकराता तहसील के मटियाना में आयोजित तीन दिवसीय जौनसारी सांस्कृतिक एवं साहित्य सम्मेलन का समापन मंगलवार देर रात हो गया। अंतिम दिन प्रख्यात बांसुरी वादक सरजू वर्मा ने बांसुरी की तान छेड़कर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
वहीं, लोक कला मंच चकराता के निर्देशक नंदलाल भारती ने रणसिंघा बजाकर क्षेत्रीय लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। बांसुरी वादन की शुरुआत सरजू वर्मा ने चारूकेशी की धुन से की, इसके बाद उन्होंने प्रसिद्ध बनारसी दादरा की प्रस्तुति दी। उन्होंने बांसुरी पर जब सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा... की धुन बजाई तो मौजूद श्रोताओं के मन में देशभक्ति की भावना हिलोरे मारने लगी। इसके बाद लोककला मंच के कालाकारों ने क्षेत्रीय लोक संस्कृति की छटा बिखेरी।
नंदलाल भारती ने रणसिंघा की गूंज से देव आवाह्न किया तो लोक कलाकरों ने हारुल, तांदी, झैंता, रासों की शानदार प्रस्तुति दी। साथ ही खजानदत्त शर्मा, अज्जू तोमर, जीतराम शर्मा, अंकित सेमवाल, नरेश बादशाह और प्रदीप शर्मा ने भी लोकगीतों की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मदहोश कर दिया। समापन पर लोक साहित्य के संरक्षण और संवर्धन पर चर्चा की गई। रंगकर्मी नंदलाल भारती ने कहा कि किसी भी क्षेत्र का लोक साहित्य उस क्षेत्र की संस्कृति की पहचान और विरासत होती है। लिहाजा लोक साहित्य को बढ़ावा दिया जाना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से क्षेत्रीय बोली में साहित्य सृजन के प्रति गंभीरता से प्रयास करने को कहा।
विज्ञापन
इस दौरान अरविंद शर्मा, दीपक शर्मा, सरदार सिंह शर्मा, अमर दत्त, टीकाराम, हरीश, अंतराम शर्मा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
कालसी। चकराता तहसील के मटियाना में आयोजित तीन दिवसीय जौनसारी सांस्कृतिक एवं साहित्य सम्मेलन का समापन मंगलवार देर रात हो गया। अंतिम दिन प्रख्यात बांसुरी वादक सरजू वर्मा ने बांसुरी की तान छेड़कर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
वहीं, लोक कला मंच चकराता के निर्देशक नंदलाल भारती ने रणसिंघा बजाकर क्षेत्रीय लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। बांसुरी वादन की शुरुआत सरजू वर्मा ने चारूकेशी की धुन से की, इसके बाद उन्होंने प्रसिद्ध बनारसी दादरा की प्रस्तुति दी। उन्होंने बांसुरी पर जब सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा... की धुन बजाई तो मौजूद श्रोताओं के मन में देशभक्ति की भावना हिलोरे मारने लगी। इसके बाद लोककला मंच के कालाकारों ने क्षेत्रीय लोक संस्कृति की छटा बिखेरी।
विज्ञापन
नंदलाल भारती ने रणसिंघा की गूंज से देव आवाह्न किया तो लोक कलाकरों ने हारुल, तांदी, झैंता, रासों की शानदार प्रस्तुति दी। साथ ही खजानदत्त शर्मा, अज्जू तोमर, जीतराम शर्मा, अंकित सेमवाल, नरेश बादशाह और प्रदीप शर्मा ने भी लोकगीतों की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मदहोश कर दिया। समापन पर लोक साहित्य के संरक्षण और संवर्धन पर चर्चा की गई। रंगकर्मी नंदलाल भारती ने कहा कि किसी भी क्षेत्र का लोक साहित्य उस क्षेत्र की संस्कृति की पहचान और विरासत होती है। लिहाजा लोक साहित्य को बढ़ावा दिया जाना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से क्षेत्रीय बोली में साहित्य सृजन के प्रति गंभीरता से प्रयास करने को कहा।
विज्ञापन
इस दौरान अरविंद शर्मा, दीपक शर्मा, सरदार सिंह शर्मा, अमर दत्त, टीकाराम, हरीश, अंतराम शर्मा आदि मौजूद रहे।