फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   चित्रकारों ने कैनवास पर उकेरे जनजातीय जीवन के रंग

चित्रकारों ने कैनवास पर उकेरे जनजातीय जीवन के रंग

Sat, 08 Jun 2019 01:48 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jun 2019 01:48 AM IST
विज्ञापन
चित्रकारों ने कैनवास पर उकेरे जनजातीय जीवन के रंग
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
विज्ञापन

ललित कला अकादमी की ओर से आईटीआईटीआई में आयोजित कला शिविर में विभिन्न राज्यों के चित्रकारों ने कैनवास पर जनजातीय जीवन के रंग उकेर कर लोगों को मंत्रमुग्ध किया। कला शिविर में चित्रकारों ने महाराष्ट्र की वारली कला, बिहार की मधुबनी, मध्यप्रदेश की परंपरागत शैली और आधुनिक शैली के चित्रों को आकर्षक रूप दिया।
शुक्रवार को झाझरा में विज्ञान धाम के पास स्थित इन्फ ॉरमेशन टेक्नोलॉजी इंफ ॉरमेशन फॉर द ट्राइब्स ऑफ इंडिया (आईटीआईटीआई) में सात दिवसीय राष्ट्रीय जनजाति कला शिविर का समापन हुआ। शिविर में उत्तराखंड टैक्नीकल यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार अनिता रावत और एडमिरल एचसी बिष्ट ने शिरकत की। उन्होंने चित्रों की बारीकियां जानने के साथ ही कलाकारों की कल्पना की सराहना की। वहीं, पूर्व सांसद तरुण विजय ने बताया कि आदिवासी कला समाज को जीने का संदेश देते है। उन्होंने बताया कि इन सभी कलाकृतियों को उत्तरा आर्ट गैलरी में प्रदर्शित किया जाएगा।
विज्ञापन

कला शिविर में लोकनृत्य, प्रदूषण से पर्यावरण को नुकसान, तमील के नायक-नायिका, बारिश का किसानों के जीवन पर प्रभाव आदि पर आधारित चित्र देखते ही बनते थे। चित्रों में मानवजीवन के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ पशु-पक्षी एवं प्रकृति का चित्रण और रंगों का संयोजन चित्रकरों की विशेषताओं को दर्शा रहे थे। कार्यक्रम में सभी चित्रकारों को प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

----
कलाकृतियों से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
राष्ट्रीय जनजाति कला शिविर में चित्रकारों ने अपनी कलाकृतियों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। पर्यावरण संरक्षण पर बनाई गई कलाकृतियों ने सभी को आकर्षित किया। चित्रकार नवल किशोर ने बताया कि उन्होंने अपनी कलाकृतियों में लोकनृत्य, हिंदू रिति-रिवाज में शादी समारोह की महत्ता, कलश, सूर्य देवता, कुलदेवी आदि का समावेश किया है। तमिलनाडु से पहुंचे दीन दयाल और दया निधि ने दूनवासियों को तमिल संस्कृत से अवगत कराने का प्रयास किया। ढोल-डमरू की महत्ता और नंदी पर विराजमान नायक-नायिका की कलाकृति को लोगों ने खूब सराहा। मध्यप्रदेश के वेंकट रमन सिंह श्याम ने प्रदूषण से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को अपने चित्रों में दर्शाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed