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रेरा में बगैर पंजीकरण सीलिंग जमीन पर कर दी प्लाटिंग
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
नगर निगम क्षेत्र में शामिल हुए हर्रावाला-मियांवाला की सीमा पर प्लाटिंग का खेल शुरू हो गया है। इसके चलते उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने 13 बीघा सीलिंग जमीन पर प्लाटिंग करने के मामले में मालिकों को नोटिस भेजा है। साथ ही जमीन की खरीद फरोख्त पर भी रोक लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
बता दें, इस भूखंड को बाग की जमीन होने के कारण सीलिंग एक्ट से छूट दी गई है। ऐसे में यहां प्लाटिंग नहीं की जा सकती है। रेरा अध्यक्ष विष्ण कुमार ने बताया कि उनके यहां पूर्व जिला पंचायत सदस्य पुष्पा बड़थ्वाल की शिकायत आई थी। शिकायत पत्र के अनुसार हर्रावाला-मियांवाला की सीमा पर अवैध प्लाटिंग की तैयारी चल रही है। बिल्डर जो खसरा नंबर 587क, 588 मि, 590, 591, 593, 994 व 996 पर प्लाटिंग कर रहा है, उसने रेरा में कोई पंजीकरण नहीं है। वहीं, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण से भी कोई नक्शा पास नहीं कराया गया है। निवेशकों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए पहले जमीन की मूल प्रकृति को देखा जाएगा, इसके बाद ही प्लाटिंग करने अनुमति दी जाएगी। रेरा अध्यक्ष के मुताबिक सीलिंग एक्ट में केवल उन भूखंडों को छूट थी, जो बगीचे आदि थे। जमीन का भू-उपयोग बदलने पर उस जमीन पर सरकार का अधिकार हो जाएगा। ऐसे में इस जमीन से पेड़ काटने तथा प्लाटिंग पर वह सरकार में शामिल हो जाएगी।
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नगर निगम क्षेत्र में शामिल हुए हर्रावाला-मियांवाला की सीमा पर प्लाटिंग का खेल शुरू हो गया है। इसके चलते उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने 13 बीघा सीलिंग जमीन पर प्लाटिंग करने के मामले में मालिकों को नोटिस भेजा है। साथ ही जमीन की खरीद फरोख्त पर भी रोक लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
बता दें, इस भूखंड को बाग की जमीन होने के कारण सीलिंग एक्ट से छूट दी गई है। ऐसे में यहां प्लाटिंग नहीं की जा सकती है। रेरा अध्यक्ष विष्ण कुमार ने बताया कि उनके यहां पूर्व जिला पंचायत सदस्य पुष्पा बड़थ्वाल की शिकायत आई थी। शिकायत पत्र के अनुसार हर्रावाला-मियांवाला की सीमा पर अवैध प्लाटिंग की तैयारी चल रही है। बिल्डर जो खसरा नंबर 587क, 588 मि, 590, 591, 593, 994 व 996 पर प्लाटिंग कर रहा है, उसने रेरा में कोई पंजीकरण नहीं है। वहीं, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण से भी कोई नक्शा पास नहीं कराया गया है। निवेशकों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए पहले जमीन की मूल प्रकृति को देखा जाएगा, इसके बाद ही प्लाटिंग करने अनुमति दी जाएगी। रेरा अध्यक्ष के मुताबिक सीलिंग एक्ट में केवल उन भूखंडों को छूट थी, जो बगीचे आदि थे। जमीन का भू-उपयोग बदलने पर उस जमीन पर सरकार का अधिकार हो जाएगा। ऐसे में इस जमीन से पेड़ काटने तथा प्लाटिंग पर वह सरकार में शामिल हो जाएगी।
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