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सुर्खियों में आए पीएम मोदी का परिधान तैयार करने वाले रणसिंह
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ब्यूरो/ अमर उजाला, विकासनगर।
कालसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भगवान बदरीनाथ और केदारनाथ यात्रा के दौरान पहने गए जौनसारी परिधान चोड़ा सिलने वाले दर्जी रणसिंह सुर्खियों में आ गए हैं। लोग रणसिंह से मिलकर तथा फोन पर स्थानीय पारंपरिक परिधानों की जानकारी ले रहे हैं।
वहीं, सोमवार सुबह से ही उनके घर पर परिधानों की जानकारी लेने वालों की भीड़ लगी रही। कई लोगों ने रणसिंह को पारंपरिक परिधानों के ऑर्डर भी दिए। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने बदरीनाथ-केदारनाथ की यात्रा के दौरान जौनसार बावर का पारंपरिक परिधान भूरे रंग का चोड़ा पहना था। यह चोड़ा चकराता क्षेत्र के होड़ा ग्राम निवासी पारंपरिक परिधानों के विशेषज्ञ दर्जी रण सिंह ने बनाया था। रणसिंह के बताया कि चोड़ा के लिए उप निदेशक केएस चौहान ने क्षेत्र के समाजसेवी पंडित केशव राम से स्थानीय शुद्ध ऊन मंगाकर दी थी।
रणसिंह के मुताबिक उन्हें इस बात का पता था कि यह परिधान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उपहार में देने के लिए तैयार करवाया जा रहा है। इस कारण उन्होंने इस परिधान को अपेक्षाकृत अधिक तन्मयता और मेहनत के साथ शानदार कटिंग और सिलाई करके तैयार किया था। रणसिंह 40 वर्ष से अधिक समय से क्षेत्र के पारंपरिक परिधान चोड़ा, घाघरा, कुर्ती, टोपी, जंगेल आदि बना रहे हैं।
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कालसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भगवान बदरीनाथ और केदारनाथ यात्रा के दौरान पहने गए जौनसारी परिधान चोड़ा सिलने वाले दर्जी रणसिंह सुर्खियों में आ गए हैं। लोग रणसिंह से मिलकर तथा फोन पर स्थानीय पारंपरिक परिधानों की जानकारी ले रहे हैं।
वहीं, सोमवार सुबह से ही उनके घर पर परिधानों की जानकारी लेने वालों की भीड़ लगी रही। कई लोगों ने रणसिंह को पारंपरिक परिधानों के ऑर्डर भी दिए। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने बदरीनाथ-केदारनाथ की यात्रा के दौरान जौनसार बावर का पारंपरिक परिधान भूरे रंग का चोड़ा पहना था। यह चोड़ा चकराता क्षेत्र के होड़ा ग्राम निवासी पारंपरिक परिधानों के विशेषज्ञ दर्जी रण सिंह ने बनाया था। रणसिंह के बताया कि चोड़ा के लिए उप निदेशक केएस चौहान ने क्षेत्र के समाजसेवी पंडित केशव राम से स्थानीय शुद्ध ऊन मंगाकर दी थी।
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रणसिंह के मुताबिक उन्हें इस बात का पता था कि यह परिधान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उपहार में देने के लिए तैयार करवाया जा रहा है। इस कारण उन्होंने इस परिधान को अपेक्षाकृत अधिक तन्मयता और मेहनत के साथ शानदार कटिंग और सिलाई करके तैयार किया था। रणसिंह 40 वर्ष से अधिक समय से क्षेत्र के पारंपरिक परिधान चोड़ा, घाघरा, कुर्ती, टोपी, जंगेल आदि बना रहे हैं।
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