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विदेशों में बढ़ी भारत की दवाओं की मांग : रेड्डी
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विदेशों में बढ़ी भारत की दवाओं की मांग : रेड्डी
ब्यूरो/अमर उजाला
मसूरी। फेडरेशन ऑफ फार्मा इंटरप्रन्योर का वार्षिक अधिवेशन शनिवार को गांधी चौक स्थित एक होटल के सभागार में संपन्न हुआ, जिसमें उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों की डेढ़ सौ से अधिक फार्मा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। ड्रग कंट्रोलर जनरल इंडिया डॉ. ऐश्वरा रेडडी ने कहा कि भारत दवा के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी देश बन गया है। भारत से एक लाख 40 हजार करोड़ का व्यवसाय किया जा रहा है। गुणवत्ता युक्त दवाओं के मामले में भी देश की विश्वसनीयता बढ़ी है।
रेडडी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य आम आदमी को गुणवत्ता युक्त जीवन रक्षक दवाएं व सस्ते दाम पर मुहैया करना है। इसके लिए सभी शहरों में जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत की दवाएं 190 देशों में इस्तेमाल की जा रही हैं, जिससे करीब एक लाख 40 हजार करोड़ तक का व्यवसाय हो रहा है। इसमें उत्तराखंड का बहुत बड़ा योगदान है। यहां दवा उद्योग बहुत तेजी से आगे बढ़ा है। यहां गुणवत्ता युक्त दवाइयां बनाई जा रही हैं, यहां बनी दवाइयों की मांग पूरे विश्व में है। उत्तराखंड वर्तमान में देश की 20 प्रतिशत दवाओं की पूर्ति कर रहा है। यहां पर विश्व स्वास्थ्य संगठन से एक सौ से अधिक कंपनियां मानक का प्रमाण पत्र हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई दवाओं के दाम तय किए है ताकि आम आदमी को सस्ती व गुणवत्ता युक्त दवा मिल सके। इनमें टीबी, डायबिटीज, मलेरिया, कैंसर सहित कई दवाइयां हैं।
इस मौके पर उत्तराखंड फार्मा एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके जैन ने कहा कि फार्मा वर्तमान में बहुत बड़ा उद्योग बन चुका है, जिसमें आधुनिक तकनीक से क्रांति आ गई है। फेडरेशन के तकनीकी चेयरमैन विनोद कलानी ने कहा कि दवा कंपनियों में तकनीकी बढ़ाने में सरकार के स्तर से प्रयास तेज किए जाने चाहिए। सचिव अपराजिता ने कहा कि सरकार इस उद्योग को आगे बढ़ाने में सहयोग करे।
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इस मौके पर ड्रग कंट्रोलर उत्तराखंड ताजवर सिंह, सतीश सिंगला, संजय सिन्हा, प्रमोद पलानी, अपराजिता, अशोक गोयल, नीरज भाटिया, एनएस भाटिया, अब्दुल मतीन, चेतन सोबती, संजीव गुप्ता, अनिल शर्मा, केशव सैनी, राकेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में दवा निर्माता मौजूद रहे।
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ब्यूरो/अमर उजाला
मसूरी। फेडरेशन ऑफ फार्मा इंटरप्रन्योर का वार्षिक अधिवेशन शनिवार को गांधी चौक स्थित एक होटल के सभागार में संपन्न हुआ, जिसमें उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों की डेढ़ सौ से अधिक फार्मा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। ड्रग कंट्रोलर जनरल इंडिया डॉ. ऐश्वरा रेडडी ने कहा कि भारत दवा के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी देश बन गया है। भारत से एक लाख 40 हजार करोड़ का व्यवसाय किया जा रहा है। गुणवत्ता युक्त दवाओं के मामले में भी देश की विश्वसनीयता बढ़ी है।
रेडडी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य आम आदमी को गुणवत्ता युक्त जीवन रक्षक दवाएं व सस्ते दाम पर मुहैया करना है। इसके लिए सभी शहरों में जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत की दवाएं 190 देशों में इस्तेमाल की जा रही हैं, जिससे करीब एक लाख 40 हजार करोड़ तक का व्यवसाय हो रहा है। इसमें उत्तराखंड का बहुत बड़ा योगदान है। यहां दवा उद्योग बहुत तेजी से आगे बढ़ा है। यहां गुणवत्ता युक्त दवाइयां बनाई जा रही हैं, यहां बनी दवाइयों की मांग पूरे विश्व में है। उत्तराखंड वर्तमान में देश की 20 प्रतिशत दवाओं की पूर्ति कर रहा है। यहां पर विश्व स्वास्थ्य संगठन से एक सौ से अधिक कंपनियां मानक का प्रमाण पत्र हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई दवाओं के दाम तय किए है ताकि आम आदमी को सस्ती व गुणवत्ता युक्त दवा मिल सके। इनमें टीबी, डायबिटीज, मलेरिया, कैंसर सहित कई दवाइयां हैं।
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इस मौके पर उत्तराखंड फार्मा एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके जैन ने कहा कि फार्मा वर्तमान में बहुत बड़ा उद्योग बन चुका है, जिसमें आधुनिक तकनीक से क्रांति आ गई है। फेडरेशन के तकनीकी चेयरमैन विनोद कलानी ने कहा कि दवा कंपनियों में तकनीकी बढ़ाने में सरकार के स्तर से प्रयास तेज किए जाने चाहिए। सचिव अपराजिता ने कहा कि सरकार इस उद्योग को आगे बढ़ाने में सहयोग करे।
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इस मौके पर ड्रग कंट्रोलर उत्तराखंड ताजवर सिंह, सतीश सिंगला, संजय सिन्हा, प्रमोद पलानी, अपराजिता, अशोक गोयल, नीरज भाटिया, एनएस भाटिया, अब्दुल मतीन, चेतन सोबती, संजीव गुप्ता, अनिल शर्मा, केशव सैनी, राकेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में दवा निर्माता मौजूद रहे।