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लोकगीतों पर ठोड़ा नृत्य से मचाई धूम
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
खत पशगांव के क्वानू में आयोजित बिस्सू पर्व का पारंपरिक तरीके से समापन हुआ। पर्व के अंतिम दिन हजारों की संख्या में लोगों ने लोक संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरी। पर्व में ठोड़ा नृत्य आकर्षण का केंद्र बना रहा।
स्थानीय निवासियों ने लोकगीतों की धुनों पर ठोड़ा (तीर धनुष का खेल) खेलकर धूम मचाई। मेले में पशगांव के 20 से अधिक गांवों के साथ ही हिमाचल प्रदेश के सैकड़ों लोग शामिल हुए। महिलाओं और पुरुषों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर तांदी और हारुल नृत्य किया। महिलाओं ने जैथो लागो लीट शादो तैथे कइड़ी भी फाटो... पर जमकर नृत्य किया। अधिकांश महिला पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में मेले में पहुंचे, जिससे क्वानू में लोक संस्कृति की शानदार छटा देखने को मिली। खासकर पारंपरिक ठोड़ा नृत्य जौनसार बावर की पुरातन संस्कृति को दर्शा रहा था।
इससे पूर्व पांच दिनों तक चले बिस्सू पर्व के तहत तांदी, रासों, जैंता लोकनृत्यों के माध्यम से जौनसार बावर परगने की पारंपरिक संस्कृति की छटा बिखेरी गई। साथ ही पांच दिनों तक घरों में पारंपरिक पकवान बनाए गए। पूरे परगने में अलग-अलग जगह मनाए गए बिस्सू का समापन क्वानू में आयोजित बिस्सू के दौरान ठोड़ा नृत्य के साथ हुआ।
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खत पशगांव के क्वानू में आयोजित बिस्सू पर्व का पारंपरिक तरीके से समापन हुआ। पर्व के अंतिम दिन हजारों की संख्या में लोगों ने लोक संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरी। पर्व में ठोड़ा नृत्य आकर्षण का केंद्र बना रहा।
स्थानीय निवासियों ने लोकगीतों की धुनों पर ठोड़ा (तीर धनुष का खेल) खेलकर धूम मचाई। मेले में पशगांव के 20 से अधिक गांवों के साथ ही हिमाचल प्रदेश के सैकड़ों लोग शामिल हुए। महिलाओं और पुरुषों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर तांदी और हारुल नृत्य किया। महिलाओं ने जैथो लागो लीट शादो तैथे कइड़ी भी फाटो... पर जमकर नृत्य किया। अधिकांश महिला पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में मेले में पहुंचे, जिससे क्वानू में लोक संस्कृति की शानदार छटा देखने को मिली। खासकर पारंपरिक ठोड़ा नृत्य जौनसार बावर की पुरातन संस्कृति को दर्शा रहा था।
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इससे पूर्व पांच दिनों तक चले बिस्सू पर्व के तहत तांदी, रासों, जैंता लोकनृत्यों के माध्यम से जौनसार बावर परगने की पारंपरिक संस्कृति की छटा बिखेरी गई। साथ ही पांच दिनों तक घरों में पारंपरिक पकवान बनाए गए। पूरे परगने में अलग-अलग जगह मनाए गए बिस्सू का समापन क्वानू में आयोजित बिस्सू के दौरान ठोड़ा नृत्य के साथ हुआ।
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