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माता के भजनों पर झूमे श्रद्धालु
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा अर्चना की गई। नव दंपत्तियों ने घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना कर संतान प्राप्ति की कामना की।
कालसी के दुर्गा माता मंदिर में माता के भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। डाकपत्थर रोड स्थित दुर्गा माता मंदिर में माता के दर्शनों के लिए सुबह से श्रद्धालुुओं की कतार लगी रही। भोजावाला के दुर्गा माता मंदिर में भक्तों ने माता के जयकारे लगाए। वहीं, कालीमाता मंदिर अस्पताल रोड में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया गया। बाड़वाला मंदिर के पंडित सुनील पैन्यूली ने भक्तों को बताया कि देवी के पांचवें स्वरूप की कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से भी जाना जाता है।
देवी के पांचवें स्वरूप का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं। इस देवी की चार भुजाएं हैं। ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बाईं तरफ ऊपर वाली भुजा वरदमुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। उन्होंने कहा कि स्कंदमाता का व्यवहार भक्तों के प्रति दयालु और वात्सल्य वाला है। साथ ही डाकपत्थर, हरबर्टपुर, सहसपुर, सेलाकुई, झाझरा के मंदिरों में भक्त माता के भजनों पर जमकर झूमे।
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चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा अर्चना की गई। नव दंपत्तियों ने घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना कर संतान प्राप्ति की कामना की।
कालसी के दुर्गा माता मंदिर में माता के भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। डाकपत्थर रोड स्थित दुर्गा माता मंदिर में माता के दर्शनों के लिए सुबह से श्रद्धालुुओं की कतार लगी रही। भोजावाला के दुर्गा माता मंदिर में भक्तों ने माता के जयकारे लगाए। वहीं, कालीमाता मंदिर अस्पताल रोड में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया गया। बाड़वाला मंदिर के पंडित सुनील पैन्यूली ने भक्तों को बताया कि देवी के पांचवें स्वरूप की कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से भी जाना जाता है।
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देवी के पांचवें स्वरूप का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं। इस देवी की चार भुजाएं हैं। ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बाईं तरफ ऊपर वाली भुजा वरदमुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। उन्होंने कहा कि स्कंदमाता का व्यवहार भक्तों के प्रति दयालु और वात्सल्य वाला है। साथ ही डाकपत्थर, हरबर्टपुर, सहसपुर, सेलाकुई, झाझरा के मंदिरों में भक्त माता के भजनों पर जमकर झूमे।
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