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अगलाड़ घाटी की जैव विविधता के संरक्षण पर जोर

Wed, 06 Mar 2019 02:10 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 06 Mar 2019 02:10 AM IST
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अगलाड़ घाटी की जैव विविधता के संरक्षण पर जोर
अगलाड़ घाटी की जैव विविधता के संरक्षण पर जोर
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ब्यूरो/अमर उजाला
मसूरी। अगलाड़ घाटी की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण पर जोर देने व क्षेत्रीय सांस्कृतिक धरोहर राजमौण का स्वरूप बदलने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। यह आयोजन तितली ट्रस्ट की पहल पर वन विभाग, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट के सहयोग से किया गया। जिसमें वक्ताओं ने क्षेत्र की छोटी नदियों, गाद-गदेरों में मछली पकड़ने के लिए ब्लीचिंग पाउडर, डायनामाइट और विद्युत के इस्तेमाल पर रोक लगाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा स्थानीय लोगों की सहभागिता से जौनपुर के प्रसिद्ध राजमौण मेले के लिए सुझाव मांगे गए, ताकि सांस्कृतिक धरोहर बनाए रखने के साथ ही पर्यटन की दृष्टि से इसको विकसित किया जा सके।
मंगलवार को प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि जैव विविधता के संरक्षण पर कार्य करने की जरूरत है, ताकि समय रहते इसके कुप्रभाव से बचा जा सके। तितली ट्रस्ट के संस्थापक संजय सौंधी ने कहा कि अगलाड़ घाटी की जैव विविधता को बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगलाड़ नदी में मछली पकड़ने के लिए ब्लीचिंग पाउडर, डायनामाइट और विद्युत करंट का इस्तेमाल करने पर रोक लगनी चाहिए। जैव विविधता के संरक्षण के लिए सिर्फ अगलाड़ घाटी ही नहीं बल्कि ऐसी सभी नदियों पर किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जैव विविधता के संरक्षण पर लोगों को जागरूक करने के लिए 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस पर नैनबाग में जन सहभागिता से ईको मेला आयोजित किया जाएगा।
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डीएफओ कहकशां नसीम ने कहा कि जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए छात्रों को भी जागरूक किया जा रहा है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट के डॉ. जेए जॉनसन ने अगलाड़ नदी में पायी जाने वाली मछलियों की प्रजातियों व अगलाड़ घाटी की जैव विविधताओं के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया अगलाड़ नदी की जलवायु मछलियों के प्रजनन के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। अगलाड़ नदी में मछलियों की लगभग 15 प्रजातियां हैं, जिनमें कैटफिश, गोल्डन महासीर, पत्थरचट्टा, ब्राउनट्राउट, रूपिकोला, स्नोट्राउट, स्पिनी एल, जुम्बो, हिलस्ट्रेम कैटफिश, बारिल आदि हैं।
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कार्यशाला में एसडीओ वन प्रभाग मसूरी नीरज शर्मा, मौण मेला क्षेत्रीय प्रतिनिधि सोबत सिंह कैंतुरा, जनार्दन बिजल्वाण, सूरत सिंह खरकाई, कुंवर सिंह चौहान, शरण सिंह पंवार, वन क्षेत्राधिकारी जौनपुर मनमोहन सिंह बिष्ट (मगरा रेंज), नीलम बर्तवाल (कैंपटी रेंज), राजेंद्र सिंह रावत (भद्रीगाड रेंज), अनूप राणा (देवलसारी रेंज), एडवोकेट कार्तिकेय शर्मा, हिलदारी संस्था के अरविंद शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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