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टीचर कॉलोनी में पेयजल संकट
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
सहसपुर ब्लॉक मुख्यालय की एक हजार से अधिक आबादी वाली टीचर कॉलोनी के लोग लंबे समय से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इसी कॉलोनी में जल संस्थान का कार्यालय भी है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों को पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
ब्लॉक के जल संस्थान कार्यालय से लगी टीचर कॉलोनी में पिछले एक दशक से पेयजल संकट छाया हुआ है। यहां पेयजल आपूर्ति करने के लिए तीन दशक पूर्व लाइन बिछाई गई थी। स्थानीय निवासी तरुण बिष्ट, गणेश भट्ट, प्रकाशी, अंजना रानी, मुस्तकीम अहमद, अब्बास अली, पीतांबर बडोला ने बताया कि गर्मियां शुरू होते ही नल सूख जाते हैं। इसका कारण जर्जर पेयजल लाइन के साथ ही कम क्षमता वाली पेयजल लाइन है। जल संस्थान अधिकारियों से कई बार नई लाइन बिछाने की गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन अधिकारी समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
उधर, क्षेत्रीय विधायक सहदेव पुंडीर ने बताया कि सहसपुर विधानसभा में नई पेयजल योजना के पुनर्गठन के लिए सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है। बजट स्वीकृत होते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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सहसपुर ब्लॉक मुख्यालय की एक हजार से अधिक आबादी वाली टीचर कॉलोनी के लोग लंबे समय से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इसी कॉलोनी में जल संस्थान का कार्यालय भी है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों को पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
ब्लॉक के जल संस्थान कार्यालय से लगी टीचर कॉलोनी में पिछले एक दशक से पेयजल संकट छाया हुआ है। यहां पेयजल आपूर्ति करने के लिए तीन दशक पूर्व लाइन बिछाई गई थी। स्थानीय निवासी तरुण बिष्ट, गणेश भट्ट, प्रकाशी, अंजना रानी, मुस्तकीम अहमद, अब्बास अली, पीतांबर बडोला ने बताया कि गर्मियां शुरू होते ही नल सूख जाते हैं। इसका कारण जर्जर पेयजल लाइन के साथ ही कम क्षमता वाली पेयजल लाइन है। जल संस्थान अधिकारियों से कई बार नई लाइन बिछाने की गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन अधिकारी समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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उधर, क्षेत्रीय विधायक सहदेव पुंडीर ने बताया कि सहसपुर विधानसभा में नई पेयजल योजना के पुनर्गठन के लिए सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है। बजट स्वीकृत होते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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