{"_id":"5c3ced10bdec227347764866","slug":"154749684410-vikas-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कथा में बताया भागवत का सार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कथा में बताया भागवत का सार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
हरबर्टपुर के विवेक विहार में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास ने समुद्र मंथन और वामन अवतार के प्रसंग का वर्णन किया। कथा व्यास शक्ति प्रसाद देवली ने कहा कि ओम नमो भगवते वासुदेवाय: नम: भागवत का सार है।
उन्होंने कहा कि जब अमृत की प्राप्ति के लिए देवों और असुरों ने समुद्र मंथन शुरू किया, तब भगवान ने कच्छप का अवतार लिया और अपने ऊपर मथनी रखी। गणेश जी की पूजा के बाद समुद्र मंथन शुरू हुआ। मंथन में 14 रत्न की प्राप्ति हुई। सबसे पहले विष निकला, जिससे सभी देव एवं असुर डर गए। तब भगवान शंकर ने विष को ग्रहण कर गले में संग्रहित किया, तभी से भगवान शंकर नीलकंठ कहलाए। अंत में अमृत का प्रादुर्भाव हुआ। अमृत के लिए देव और असुरों को आपस में लड़ता देख भगवान विष्णु ने मोहिनी का अवतार लिया और देवों को अमृत का पान कराया। इसके बाद कथा व्यास शक्ति प्रसाद ने भगवान नारायण के वामन अवतार का प्रसंग सुनाया। भगवान ने वामन रूप में राक्षसों के राजा बलि से तीन कदम जमीन दान में मांगी। दानवीर बलि ने वामन द्वारा मांगे गए दान को स्वीकार किया और भगवान से जमीन नाप लेने को कहा। तब वामन भगवान ने तीन कदम में पूरी सृष्टि को नाप लिया। कथा को श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ सुना। इस दौरान भजन मंडली द्वारा सुंदर भजनों की भी प्रस्तुति दी गई। इस मौके पर विनोद देवली, राम कुमार रतूड़ी, प्रवीन, ज्योति पंत, वीर सिंह राणा, अतुल शर्मा, हरीचंद नागवाल, लीला राणा, सुनीता बिष्ट आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
हरबर्टपुर के विवेक विहार में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास ने समुद्र मंथन और वामन अवतार के प्रसंग का वर्णन किया। कथा व्यास शक्ति प्रसाद देवली ने कहा कि ओम नमो भगवते वासुदेवाय: नम: भागवत का सार है।
उन्होंने कहा कि जब अमृत की प्राप्ति के लिए देवों और असुरों ने समुद्र मंथन शुरू किया, तब भगवान ने कच्छप का अवतार लिया और अपने ऊपर मथनी रखी। गणेश जी की पूजा के बाद समुद्र मंथन शुरू हुआ। मंथन में 14 रत्न की प्राप्ति हुई। सबसे पहले विष निकला, जिससे सभी देव एवं असुर डर गए। तब भगवान शंकर ने विष को ग्रहण कर गले में संग्रहित किया, तभी से भगवान शंकर नीलकंठ कहलाए। अंत में अमृत का प्रादुर्भाव हुआ। अमृत के लिए देव और असुरों को आपस में लड़ता देख भगवान विष्णु ने मोहिनी का अवतार लिया और देवों को अमृत का पान कराया। इसके बाद कथा व्यास शक्ति प्रसाद ने भगवान नारायण के वामन अवतार का प्रसंग सुनाया। भगवान ने वामन रूप में राक्षसों के राजा बलि से तीन कदम जमीन दान में मांगी। दानवीर बलि ने वामन द्वारा मांगे गए दान को स्वीकार किया और भगवान से जमीन नाप लेने को कहा। तब वामन भगवान ने तीन कदम में पूरी सृष्टि को नाप लिया। कथा को श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ सुना। इस दौरान भजन मंडली द्वारा सुंदर भजनों की भी प्रस्तुति दी गई। इस मौके पर विनोद देवली, राम कुमार रतूड़ी, प्रवीन, ज्योति पंत, वीर सिंह राणा, अतुल शर्मा, हरीचंद नागवाल, लीला राणा, सुनीता बिष्ट आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन